ट्रायल के लिए बेली ब्रिज पर स्कॉर्पियो चढ़ाया:2.5 टन वजनी कार 30 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चली, बिना तकनीकी समस्या के निकली गाड़ी

ट्रायल के लिए बेली ब्रिज पर स्कॉर्पियो चढ़ाया:2.5 टन वजनी कार 30 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चली, बिना तकनीकी समस्या के निकली गाड़ी

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर 49 मीटर लंबा बेली ब्रिज बना है। जिसपर मंगलवार देर रात सीमा सड़क संगठन ने ट्रायल किया। छोटे वाहनों का परिचालन कराया। परीक्षण के दौरान करीब 2.5 टन वजनी स्कॉर्पियो को 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुल पर चलाकर उसकी मजबूती और स्थिरता की जांच की गई। वाहन में बीआरओ के एक अधिकारी और चालक मौजूद थे। अधिकारियों के अनुसार पूरे परीक्षण में किसी प्रकार का कंपन, तकनीकी खामी या अस्थिरता नहीं पाई गई और वाहन बिना किसी बाधा के पुल के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच गया। प्रारंभिक निरीक्षण में बेली ब्रिज पूरी तरह सुरक्षित और उपयोग योग्य प्रतीत हुआ है, हालांकि अंतिम निर्णय तकनीकी मूल्यांकन और उच्चस्तरीय स्वीकृति के बाद ही लिया जाएगा। सेतु पर स्थापित सभी चार बेली ब्रिज का अलग-अलग विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। चार और पांच जून को अंतिम चरण का ट्रायल प्रस्तावित है, जिसके बाद तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर छोटे वाहनों के परिचालन पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद लंबी दूरी करनी पड़ रही है विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर, नवगछिया, कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लोगों को वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। ऐसे में बेली ब्रिज के सफल ट्रायल से हजारों लोगों में राहत की उम्मीद जगी है। यदि अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो छोटे वाहनों का आवागमन शुरू होने से यात्रा समय कम होगा और वैकल्पिक मार्गों पर बढ़ा दबाव भी घटेगा। BRO अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सभी तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही परिचालन की औपचारिक घोषणा की जाएगी। भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर 49 मीटर लंबा बेली ब्रिज बना है। जिसपर मंगलवार देर रात सीमा सड़क संगठन ने ट्रायल किया। छोटे वाहनों का परिचालन कराया। परीक्षण के दौरान करीब 2.5 टन वजनी स्कॉर्पियो को 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुल पर चलाकर उसकी मजबूती और स्थिरता की जांच की गई। वाहन में बीआरओ के एक अधिकारी और चालक मौजूद थे। अधिकारियों के अनुसार पूरे परीक्षण में किसी प्रकार का कंपन, तकनीकी खामी या अस्थिरता नहीं पाई गई और वाहन बिना किसी बाधा के पुल के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच गया। प्रारंभिक निरीक्षण में बेली ब्रिज पूरी तरह सुरक्षित और उपयोग योग्य प्रतीत हुआ है, हालांकि अंतिम निर्णय तकनीकी मूल्यांकन और उच्चस्तरीय स्वीकृति के बाद ही लिया जाएगा। सेतु पर स्थापित सभी चार बेली ब्रिज का अलग-अलग विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। चार और पांच जून को अंतिम चरण का ट्रायल प्रस्तावित है, जिसके बाद तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर छोटे वाहनों के परिचालन पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद लंबी दूरी करनी पड़ रही है विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर, नवगछिया, कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लोगों को वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। ऐसे में बेली ब्रिज के सफल ट्रायल से हजारों लोगों में राहत की उम्मीद जगी है। यदि अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो छोटे वाहनों का आवागमन शुरू होने से यात्रा समय कम होगा और वैकल्पिक मार्गों पर बढ़ा दबाव भी घटेगा। BRO अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सभी तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही परिचालन की औपचारिक घोषणा की जाएगी।  

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