गोरखपुर में 2 फर्जी IAS, 1 नकली IPS का भंडाफोड़:SDM को भी मार चुके हैं थप्पड़, 4 गर्लफ्रेंड बनाई; लखपति घर में रचाई शादी

गोरखपुर में पुलिस ने दो फर्जी IAS और एक नकली IPS के कारनामों का भंडाफोड़ कर उन्हें अलग-अलग मामलों में जेल भेज दिया। इनका ऐसा भौकाल था कि कई बार पुलिसकर्मी भी भ्रमित हो जाते थे। हालांकि, जेल पहुंचने के बाद हत्या और लूट जैसे मामलों में बंद अपराधी उन्हें मजाक में ‘420 गुरु’ कहकर बुलाने लगे। जेल पहुंचते ही उनकी हेकड़ी और बड़े सपने दोनों खत्म हो गए। जेल में बंद इन दो फर्जी IAS और एक नकली IPS की कहानी सुनकर दूसरे बंदी भी हैरान रह जाते हैं। फर्जी IAS बनकर करोड़ों कमाए, 4 गर्लफ्रेंड भी बनाई बिहार के रहने वाले ललित किशोर ने खुद को IAS अधिकारी बताकर करोड़ों रुपये कमाए और चार गर्लफ्रेंड भी बनाई थीं। इतना ही नहीं, एक बार उसने बिहार के एक SDM को थप्पड़ तक मार दिया था। हालांकि, सामने वाले ने उसे IAS अधिकारी समझकर इसकी शिकायत नहीं की थी। नकली IAS बनकर इंटरव्यू दिए, फिर कर ली शादी इटावा के प्रीतम कुमार निषाद ने फर्जी IAS अधिकारी बनकर कई चैनलों पर इंटरव्यू दिए थे। उसने लोगों को झांसे में लेकर गोरखपुर के एक संपन्न परिवार की लड़की से शादी भी कर ली थी। फर्जी IPS बनकर मांगने लगा रंगदारी गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कर्मचारी शनि वर्मा ने भी कुछ ऐसा ही कारनामा किया था। गलत गतिविधियों के चलते वह यूनिवर्सिटी से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद उसने खुद को IPS अधिकारी बताकर व्यापारियों से रंगदारी मांगनी शुरू कर दी। वह बाकायदा IPS की वर्दी पहनकर फोटो और स्टेटस भी लगाता था। एक व्यापारी ने उसे असली IPS अधिकारी समझकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की। जांच में सामने आया कि वह यूनिवर्सिटी का निलंबित कर्मचारी था। जानिए, बड़े-बड़े कारनामे करने वाले ये शातिर आखिर पुलिस के शिकंजे में कैसे फंसे? फर्जी IAS ललित किशोर के साथ चलते थे 8 गनर बिहार के सीतामढ़ी जिले के मेहसौल गांव निवासी 36 वर्षीय ललित किशोर खुद को IAS अधिकारी गौरव कुमार सिंह बताकर लोगों से ठगी करता था। उसने साल 2019 में MSc की पढ़ाई पूरी की थी। कुछ समय तक कोचिंग में पढ़ाया भी था। ठाट-बाट और आलीशान जिंदगी जीने के लिए उसने फर्जी IAS अधिकारी का रूप धारण कर लिया। अपने रुतबे को दिखाने के लिए उसने पटना से आठ गनर भी हायर किए थे। एक व्यापारी को अपने प्रभाव में लेकर उसने उससे इनोवा समेत कई लग्जरी गाड़ियां हासिल कर ली थीं। ललित शादीशुदा था और उसके दो बच्चे भी हैं। फर्जी IAS बनकर 4 गर्लफ्रेंड भी बनाई
फर्जी अधिकारी बनकर उसने चार लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाया था। आरोप है कि इनमें से तीन गर्लफ्रेंड गर्भवती भी हो गई थीं। इसके अलावा बड़े-बड़े ठेकेदारों को टेंडर दिलाने का झांसा देकर उसने करोड़ों रुपये वसूले थे। एक बार वह भागलपुर में अधिकारी बनकर एक विभाग का निरीक्षण करने तक पहुंच गया था। वहां एक SDM ने उससे कुछ सवाल पूछने की कोशिश की, तो उसने कथित तौर पर उन्हें थप्पड़ मार दिया। हालांकि, सामने वाले ने उसे IAS अधिकारी समझकर इसकी शिकायत नहीं की। बिहार में कई लोगों को ठगने के बाद वह गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र के पास एक 3BHK मकान लेकर रह रहा था। आसपास के लोग भी उसे अधिकारी मानते थे। उसने घर के बाहर IAS अधिकारी का बोर्ड भी लगा रखा था। बताया जाता है कि यह शातिर बिहार में राज्यपाल से प्रशस्ति पत्र भी प्राप्त कर चुका है। ऐसे हुआ गिरफ्तार हाल ही में बिहार चुनाव के दौरान एक व्यक्ति गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर 99 लाख रुपए नकद के साथ पकड़ा गया था। जांच के दौरान ललित किशोर का नाम सामने आया। इसके बाद खुफिया एजेंसियों और गोरखपुर पुलिस ने जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद उसके गनरों को छोड़ दिया गया। गनरों का कहना था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि वे एक ठग के साथ ड्यूटी कर रहे थे। जांच में सामने आया कि ललित ने उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड समेत चार राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रखा था। फिलहाल, ललित किशोर जेल में बंद है, जहां दूसरे बंदी उसे ‘420 गुरु’ कहकर बुलाते हैं। फर्जी IAS बनकर लखपति परिवार में कर ली शादी इटावा जिले के इकदिल थाना क्षेत्र के लुधियात मोहल्ले निवासी प्रीतम कुमार निषाद ने सिर्फ हाईस्कूल तक पढ़ाई की थी। बताया जाता है कि वह शुरू से ही शातिर प्रवृत्ति का था। दिल्ली में एक समाज विशेष के लोगों का एक व्हाट्सएप ग्रुप था, जिसमें प्रीतम भी जुड़ गया था। इसी ग्रुप में एक महिला भी शामिल थीं, जो गोरखपुर में रहने वाली अपनी छोटी बहन के लिए अच्छा रिश्ता तलाश रही थीं। परिवार एक सरकारी अधिकारी लड़का खोज रहा था। इसी दौरान प्रीतम ने व्हाट्सएप ग्रुप में अपनी प्रोफाइल डाली, जिसमें उसने खुद को मानिकपुर का IAS अधिकारी बताया था। यह देखकर महिला ने रिश्ते की बात आगे बढ़ाई। बातचीत आगे बढ़ने पर प्रीतम गोरखपुर आया। बताया जाता है कि वह सरकारी गाड़ी से पहुंचा था। इसके बाद लड़की पक्ष ने रिश्ता तय कर 7 मार्च को शादी की तारीख तय कर दी। मंत्री और अधिकारियों को भी बांटे थे शादी के कार्ड प्रीतम बेखौफ होकर अपनी झूठी पहचान का इस्तेमाल करता रहा। शादी से पहले वह गोरखपुर आया और निषाद समाज के एक कैबिनेट मंत्री तथा कई पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों में शादी के कार्ड भी बांटे। कार्ड पर खुद को IAS अधिकारी लिखे होने के कारण कई नेता भी शादी में शामिल हुए थे। हालांकि, इस दौरान कुछ लोगों को उस पर शक हुआ और उन्होंने उसके बैच और सेवा से जुड़ी जानकारी भी पूछी थी। विदाई के बाद खुली सच्चाई गोरखपुर के एक बड़े मैरिज हाउस में शादी संपन्न हुई। इसके बाद 8 मार्च की सुबह दिल्ली में पढ़ाई कर रही दुल्हन भी प्रीतम के साथ विदा हो गई। शादी में प्रीतम सरकारी गाड़ी से आया था, जिसे देखकर कई लोग प्रभावित हो गए थे। विदाई के कुछ समय बाद एक नेता लड़की के घर पहुंचे और परिजनों से प्रीतम के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि शादी से पहले उन्होंने उसका पता लिया था और अपने समाज के लोगों से जानकारी जुटाई थी। तब पता चला कि वह कथित तौर पर बड़ा ठग है। यह जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने तुरंत लड़की को फोन कर उसकी लोकेशन पूछी। इसके बाद परिवार के लोग कार से इटावा के लिए रवाना हो गए। देर रात करीब 11 बजे वे किसी तरह प्रीतम के घर पहुंचे। वहां पहुंचने पर प्रीतम और उसके परिवार के लोग चौंक गए। परिवार को पता चला कि घर की स्थिति बेहद साधारण थी और वहां शौचालय तक नहीं था। पूछताछ के दौरान दबाव बढ़ने पर प्रीतम ने स्वीकार किया कि वह IAS अधिकारी नहीं है। इसके बाद लड़की के परिजन उसे अपने साथ वापस गोरखपुर ले आए। यहां पहुंचकर कैंट थाने में प्रीतम और उसके परिवार के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई। मार्च के अंतिम सप्ताह में पुलिस टीम इटावा पहुंची, लेकिन प्रीतम घर पर नहीं मिला। बाद में सर्विलांस की मदद से पुलिस ने उसे इटावा क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। तब से वह गोरखपुर जेल में बंद है। यूनिवर्सिटी का निलंबित क्लर्क बना नकली IPS गोरखपुर के पीपीगंज का रहने वाला शनि शर्मा दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी का कर्मचारी था। उसकी कथित हरकतों के चलते यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उसे निलंबित कर दिया था। इसके बाद उसने खुद को IPS अधिकारी बताकर व्यापारियों से वसूली शुरू कर दी। शनि अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर पुलिस वर्दी पहने हुए तस्वीरें लगाता था। उसने घर में IPS जैसी खाकी वर्दी भी रखी हुई थी। आरोप है कि वह व्यापारियों को फोन कर फर्जी एनकाउंटर कराने की धमकी देता था। कई व्यापारी उसके झांसे में भी आ गए थे। धमकी के बाद व्यापारी ने की जांच, खुल गया राज नगर पंचायत पीपीगंज के कपड़ा व्यापारी संदीप सिंह ने बताया कि एक व्यक्ति वर्दी पहनकर उनके घर आया था। उसने खुद को IPS अधिकारी बताते हुए कहा कि दो दिन के अंदर 2 लाख रुपये चाहिए, नहीं तो हत्या के आरोप में फंसाकर जेल भिजवा देगा और एनकाउंटर भी करा देगा। व्यापारी ने बताया कि धमकी देने के बाद वह वहां से चला गया, लेकिन उसका हावभाव संदिग्ध लगा। इसके बाद उन्होंने उसकी पहचान के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। एक दुकानदार को फोटो दिखाने पर पता चला कि वह कोई अधिकारी नहीं, बल्कि कथित ठग है और पीपीगंज क्षेत्र के वार्ड नंबर-1 अंबेडकर नगर में रहता है। इसके बाद व्यापारी ने पीपीगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जब आरोपी को पकड़ने पहुंची तो उसके घर से पुलिस वर्दी भी बरामद हुई। जांच में सामने आया कि वह दूसरे जिलों के व्यापारियों से भी पैसे मांग चुका था। बताया गया कि उसके पिता भी यूनिवर्सिटी में कर्मचारी थे। वर्ष 2015 में उनकी मौत के बाद शनि शर्मा को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी। शनि ने दो शादियां की हैं और उसकी एक पत्नी से दो बच्चे हैं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया। बताया जा रहा है कि बाद में उसे जमानत भी मिल गई।

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