सभी प्रमुख नदियों के तटबंधों की 24 घंटे होगी निगरानी, 4 महीने तक अधिकारी और अभियंता तटबंध पर रहेंगे मुस्तैद

सभी प्रमुख नदियों के तटबंधों की 24 घंटे होगी निगरानी, 4 महीने तक अधिकारी और अभियंता तटबंध पर रहेंगे मुस्तैद

धनंजय मिश्र|मोतिहारी बाढ़ का महीना शुरू होने वाला है। इस बार जल संसाधन विभाग किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी में है। हाल ही में सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने वाल्मीकिनगर से लेकर चंपारण तटबंध, बूढ़ी गंडक और लालबकेया आदि नदियों का अभियंताओं के साथ निरीक्षण कर समीक्षा कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी नदियों के तटबंधों पर अभियंताओं की टीम 24 घंटे कैंप करेगी। अभियंता तटबंधों के कोने-कोने की निगरानी करेंगे। यदि कहीं भी तटबंध टूटा तो नपेंगे। गंडक व कोसी परियोजनाओं की संयुक्त समिति (जेसीकेजीपी) की 11वीं बैठक पिछले दिनों काठमांडू में हुई। दोनों देशों के बीच बाढ़ की सूचना के आदान-प्रदान का निर्णय लिया गया। पहली बार बाढ़ संघर्षात्मक बल का गठन किया गया है। इसमें बाढ़ प्रबंधन में दक्ष माने जाने वाले सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता को अध्यक्ष बनाया गया है। टीम में एक कार्यपालक अभियंता, एक सहायक अभियंता, दो कनीय अभियंता, और आपदा प्रबंधन के एक अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। अरेराज, संग्रामपुर, केसरिया, पकड़ीदयाल, सुगौली, रामगढ़वा, पहाड़पुर, पताही, मधुबन, तेतरिया, मोतिहारी, रक्सौल, ढाका। इन क्षेत्रों में बूढ़ी गंडक, गंडक, लालबकेया, तिलावे, मरनहिया, सरिसवा, धनौती, बंगरी, तीयर, पसाह समेत कई छोटी नदियां। बाढ़ से हर साल 20 लाख की जनसंख्या प्रभावित होती है। 28 सितंबर 2024 को गंडक नदी का जलस्राव 5.62 लाख क्यूसेक हो गया था। इससे पहले 2003 में गंडक में रिकॉर्ड 6.39 लाख क्यूसेक पानी आया था। कई स्थानों पर तटबंध टूट गया। कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया। पानी का बहाव बढ़ने पर वाल्मीकिनगर बराज के सभी गेट खोल दिए जाने के बाद भी पानी ओवरफ्लो हो गया था। धनंजय मिश्र|मोतिहारी बाढ़ का महीना शुरू होने वाला है। इस बार जल संसाधन विभाग किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी में है। हाल ही में सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने वाल्मीकिनगर से लेकर चंपारण तटबंध, बूढ़ी गंडक और लालबकेया आदि नदियों का अभियंताओं के साथ निरीक्षण कर समीक्षा कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी नदियों के तटबंधों पर अभियंताओं की टीम 24 घंटे कैंप करेगी। अभियंता तटबंधों के कोने-कोने की निगरानी करेंगे। यदि कहीं भी तटबंध टूटा तो नपेंगे। गंडक व कोसी परियोजनाओं की संयुक्त समिति (जेसीकेजीपी) की 11वीं बैठक पिछले दिनों काठमांडू में हुई। दोनों देशों के बीच बाढ़ की सूचना के आदान-प्रदान का निर्णय लिया गया। पहली बार बाढ़ संघर्षात्मक बल का गठन किया गया है। इसमें बाढ़ प्रबंधन में दक्ष माने जाने वाले सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता को अध्यक्ष बनाया गया है। टीम में एक कार्यपालक अभियंता, एक सहायक अभियंता, दो कनीय अभियंता, और आपदा प्रबंधन के एक अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। अरेराज, संग्रामपुर, केसरिया, पकड़ीदयाल, सुगौली, रामगढ़वा, पहाड़पुर, पताही, मधुबन, तेतरिया, मोतिहारी, रक्सौल, ढाका। इन क्षेत्रों में बूढ़ी गंडक, गंडक, लालबकेया, तिलावे, मरनहिया, सरिसवा, धनौती, बंगरी, तीयर, पसाह समेत कई छोटी नदियां। बाढ़ से हर साल 20 लाख की जनसंख्या प्रभावित होती है। 28 सितंबर 2024 को गंडक नदी का जलस्राव 5.62 लाख क्यूसेक हो गया था। इससे पहले 2003 में गंडक में रिकॉर्ड 6.39 लाख क्यूसेक पानी आया था। कई स्थानों पर तटबंध टूट गया। कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया। पानी का बहाव बढ़ने पर वाल्मीकिनगर बराज के सभी गेट खोल दिए जाने के बाद भी पानी ओवरफ्लो हो गया था।  

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