हरा गमछा को लेकर बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुजफ्फरपुर में हरे रंग का जिक्र करते हुए कहा कि हरा रंग हरियाली और शांति का प्रतीक है, लेकिन जो भी गुंडागर्दी करेगा, उसका स्थान जेल में होगा। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बिहार का राजनीतिक तापमान फिर बढ़ना तय माना जा रहा है।
इससे पहले भी सम्राट चौधरी हरा गमछा को लेकर चर्चा में रहे थे। पटना में आयोजित एआई समिट के दौरान उन्होंने कहा था कि शहर में चार हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अगर एआई से कह दिया जाए कि हरा गमछा पहनने वालों को खोजो, तो वह उन्हें तुरंत ढूंढ़ लेगा। हालांकि मुख्यमंत्री ने यह बात मजाकिया अंदाज में कही थी, लेकिन विपक्ष ने इसे आरजेडी पर तंज के रूप में देखा।
मुख्यमंत्री के उस बयान पर आरजेडी ने कड़ी आपत्ति जताई थी। पार्टी का आरोप था कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं और मुख्यमंत्री लोगों को बांटने की राजनीति कर रहे हैं।
हरा गमछा पर फिर गरमाई सियासत
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को मुजफ्फरपुर जिले के गोसाईपुर में आयोजित सहयोग शिविर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरजेडी पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “बिहार में आजकल हरा गमछा की खूब चर्चा हो रही है। हरा गमछा शांति का प्रतीक है। लेकिन जो गुंडागर्दी करेगा, उसे जेल में डालेंगे ही।”
मुख्यमंत्री के इस बयान के कुछ ही देर बाद आरजेडी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पलटवार किया। पार्टी ने सीवान जिले के बड़हरिया में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना का जिक्र करते हुए लिखा कि अपराधियों को पकड़ने के बजाय बिहार के मुख्यमंत्री दिन-रात अपने सरकारी आवास को सजाने, उसका विस्तार करने और “हरा गमछा-हरा गमछा” जपने में व्यस्त हैं।
आरजेडी ने आरोप लगाया कि एक तरफ अपराधी लगातार घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार पुलिस उन्हें पकड़ने के बजाय बचाने का काम कर रही है। पार्टी ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।
नीट पर चुप, गमछा पर चर्चा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हरा गमछा वाले बयान का विरोध जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी कर चुके हैं। उन्होंने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा था, “सम्राट चौधरी को नीट छात्रा मामले से कोई लेना-देना नहीं है। वह इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोलेंगे, लेकिन हरा गमछा और लाल गमछा कौन पहन रहा है, लोगों को उसी में उलझाने का काम कर रहे हैं।”प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया था कि सरकार जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर जवाब देने के बजाय लोगों का ध्यान दूसरी बातों की ओर मोड़ रही है।


