जोधपुर। नाबालिग के यौन शोषण मामले में आजीवन कारावास की सजा बरकरार रहने के बाद जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर चुके आसाराम ने जेल में भोजन और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। न्यायाधीश संजीत पुरोहित की एकल पीठ में आसाराम की ओर से अधिवक्ता आरएस सलूजा और अधिवक्ता यशपाल सिंह राजपुरोहित ने कहा कि जेल में उसे पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जा रही हैं।
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याचिका में कहा गया कि पूर्व में जेल प्रशासन को आसाराम को घरेलू भोजन उपलब्ध करवाने तथा आवश्यक दवा और चिकित्सा सुविधा देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इन आदेशों की पालना नहीं हो रही है। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने जवाब पेश करने और पूर्व आदेशों की पालना के लिए समय मांगा। इस पर पीठ ने राज्य सरकार को 3 जून तक का समय दिया है।
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अंतरिम जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने तुरंत गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश भी दिए थे। राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार के मामले में आसाराम की शेष जीवन तक आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि कोर्ट ने आसाराम को गैंगरेप और आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन बलात्कार के मामले में सजा की पुष्टि होने से कोई बड़ी राहत नहीं मिली।
जानें अब तक क्या-क्या हुआ?
31 अगस्त 2013: जोधपुर आश्रम में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम की गिरफ्तारी हुई।
25 अप्रेल 2018: जोधपुर पॉक्सो कोर्ट ने ताउम्र कारावास की सजा सुनाई।
जनवरी 2025: सुप्रीम कोर्ट की शर्तों पर पहली अंतरिम मेडिकल जमानत मिली।
27 अगस्त 2025: राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत विस्तार अर्जी खारिज की।
29 अक्टूबर 2025: राजस्थान हाईकोर्ट ने 6 महीने की मेडिकल जमानत मंजूर की।
6 नवंबर 2025: गुजरात हाईकोर्ट ने भी 6 महीने की अंतरिम जमानत दी।
8 दिसंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने की याचिका खारिज की, हाईकोर्ट को 3 माह में अपील निपटाने का निर्देश दिया।
15 अप्रेल 2026: मेडिकल ग्राउंड पर जमानत आगे बढ़ाने की अर्जी दायर की।
16 अप्रेल 2026: कोर्ट ने जल्दी सुनवाई से इनकार किया।
17 अप्रेल 2026: सजा स्थगन से जुड़ी अपील पर आसाराम पक्ष की बहस पूरी हुई।
20 अप्रेल 2026: पीड़ित पक्ष की बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।


