CM Mohan Yadav on UCC: मध्य प्रदेश में सामान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की कवायद तेज हो चुकी है। इसी कड़ी में सोमवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक वीडियो जारी किया। उन्होंने इस वीडियो में कहा कि-‘सरकार मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मैं प्रदेशवासियों से अपील करता हूंकि कमेटी को अपने सुझाव अवश्य दें।’ कुछ हफ्ते पहले सीएम मोहन यादव ने एमपी यूसीसी की आधिकरिक वेबसाइट (MP UCC Website) को लॉन्च किया था। इसमें राज्य के सभी लोगों से यूसीसी बिल को लेकर सुझाव मांगे थे। इसी को लेकर सीएम ने वीडियो जारी प्रदेशवासियों से अपील की है।
बहनों की शादियों के लिए पर्सनल लॉ मानने की जरुरत नहीं- सीएम
सीएम मोहन यादव ने वीडियो में कहा कि हमारी बहनों की शादियों और पारिवारिक परंपराओं के बारे में धर्म के आधार पर अलग-अलग पर्सनल लॉ मानने की मौजूदा प्रथा अब जरूरी नहीं है। हमें राज्य में एक समान नागरिक संहिता (UCC) की जरूरत है। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड, गुजरात और असम में UCC अपनाने से प्रेरित होकर मध्य प्रदेश सरकार इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।’
‘जनता वेबसाइट पर दें सुझाव’
सीएम ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के नेतृत्व में अलग-अलग विद्वानों वाली एक कमेटी बनाई गई है जो सभी जिलों में हर धर्म के लोगों से सुझाव इकट्ठा करेगी। इसका लक्ष्य इन सुझावों को इकट्ठा करना और मध्य प्रदेश में UCC को लागू करने में तेजी लाना है। उन्होंने कहा कि जनता के सुझाव इकट्ठा करने के लिए एक वेबसाइट लॉन्च की गई है जहां वह अपने सुझाव सरकार तक पहुंचा सकती है।’
सुप्रीम कोर्ट से रिटायर्ड जज रंजना प्रसाद देसाई कमेटी की अध्यक्ष
बता दें कि, 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता में कमेटी का गठन (UCC ) किया गया है। इसके साथ ही इस कमेटी में पांच सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह और सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया को शामिल किया गया है। यह 6 सदस्यीय कमेटी 60 दिनों में अपनी रिपोर्ट सरकार के समक्ष पेश करेगी।
सबसे पहले गोवा, स्वतंत्र भारत में UCC लागू करने वाला पहला राज्य उत्तराखंड
बताते चलें कि समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code/UCC) सबसे गोवा में पुर्तगाली समय 1867 में ही लागू कर दिया गया था। लेकिन स्वतंत्र भारत में इसे लागू करने वाला पहला राज्य उत्तराखंड बना। उत्तराखंड ने 27 जनवरी 2025 को आधिकारिक रूप से इसे लागू कर दिया था। इस कानून का उद्देश्य जहां विवाह, तलाक, संपत्ति, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों में धर्म, जाति या लिंग के भेदभा को खत्म कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है। इसकी खासियत ये है कि यह कानून लिव इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को भी अनिवार्य बनाता है। बहुविवाह पर रोक लगाता है। वहीं भारतीय पुरुष सत्तात्मक समाज में महिलाओं को भी समान अधिकार देता है।


