Middle East Crisis: इजराइल के हमलों, ईरान के दखल और ‘अविश्वास’ ने कैसे रोका शांति समझौता ? जानिए असलियत

Middle East Crisis: इजराइल के हमलों, ईरान के दखल और ‘अविश्वास’ ने कैसे रोका शांति समझौता ? जानिए असलियत

Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति में तनाव लगातार चरम पर पहुंचता जा रहा है। पूरी दुनिया की निगाहें एक संभावित शांति समझौते पर टिकी हुई हैं, लेकिन जमीनी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के अनुसार, इजराइल, लेबनान और ईरान के बीच चल रही भारी तनातनी ने शांति की उम्मीदों को फिलहाल रोक दिया है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बाधा आपसी ‘अविश्वास’ की है। हालात ऐसे हैं कि कोई भी पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा करने के लिए भी तैयार नहीं है।

गोलीबारी से पूरे क्षेत्र में खौफ का माहौल पैदा हो गया

इजराइल की ओर से लेबनान में हाल ही में किए गए लगातार हमलों से स्थिति और भी ज्यादा संवेदनशील और खतरनाक बन गई है। लेबनानी सीमा पर हिजबुल्लाह और इजरायली रक्षा बलों के बीच रुक-रुक कर हो रही गोलीबारी से पूरे क्षेत्र में खौफ का माहौल पैदा हो गया है। इन हिंसक हमलों के कारण किसी भी तरह के शांति समझौते पर शांतिपूर्ण बातचीत करना लगभग मुश्किल हो गया है। राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर हिंसा और बमबारी नहीं रुकती, तब तक किसी भी मेज पर बैठ कर शांति की बात या उम्मीद करना बेमानी है।

ईरान की दखलअंदाजी की वजह से शांति समझौते में देर हो रही

इस पूरे संघर्ष में ईरान के प्रभाव और उसकी भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ईरान लंबे समय से इजराइल की नीतियों का कड़ा विरोध करता रहा है और लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह जैसे समूहों को उसका खुला समर्थन प्राप्त है। इजराइल का साफ तौर पर यह मानना है कि ईरान की इसी दखलअंदाजी की वजह से ही शांति समझौते में बार-बार देरी हो रही है। दूसरी तरफ, ईरान और उसके सहयोगी देशों का तर्क है कि इजराइल की आक्रामक सैन्य नीतियां ही इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ हैं। इसी आपसी अविश्वास और लगातार चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के कारण एक सफल सीजफायर समझौता सिर्फ एक सपना बन कर रह गया है।

एक भयानक और बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है पूरा मिडिल ईस्ट

अंतरराष्ट्रीय समुदाय, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने इस बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही कोई ठोस कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो पूरा मिडिल ईस्ट एक भयानक और बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है। अमेरिका लगातार मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच ‘अविश्वास’ इतना गहरा है कि कोई भी सकारात्मक परिणाम निकल कर सामने नहीं आ पा रहा है।

इजराइल और लेबनान सीमा पर सीजफायर प्रस्ताव पेश करने की संभावना

आने वाले दिनों में अमेरिका और मध्यस्थता कर रहे अन्य देश एक बार फिर सभी पक्षों को बातचीत की मेज पर वापस लाने का दबाव बना सकते हैं। इजराइल और लेबनान सीमा पर तनाव तुरंत कम करने के लिए कुछ नए सीजफायर प्रस्ताव पेश करने की संभावना है। हालांकि, यह देखना सबसे अहम होगा कि क्या ईरान और इजराइल इन वार्ताओं में किसी भी तरह की कूटनीतिक नरमी दिखाते हैं या नहीं।

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