Rajasthan Police Alert: AI वॉइस क्लोनिंग ठगी का नया खतरनाक तरीका, आवाज की पुष्टि बिना न भेजें पैसे

Rajasthan Police Alert: AI वॉइस क्लोनिंग ठगी का नया खतरनाक तरीका, आवाज की पुष्टि बिना न भेजें पैसे

जयपुर. देशभर सहित राजस्थान में भी ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। राजस्थान पुलिस ने AI Voice Cloning आधारित साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर आम जनता को सतर्क किया है। पुलिस की आधिकारिक एक्स पोस्ट में एक जागरूकता वीडियो जारी कर चेतावनी दी गई है कि अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI ) की मदद से किसी की आवाज को सैकंडों में क्लोन कर परिवार के सदस्यों की तरह फोन कर ठगी रच रहे हैं। लोगों को लगता है कि फोन करने वाला परिवार का सदस्य है, लेकिन असल में वो ठग का फोन होता है।

यह है AI वॉइस क्लोनिंग स्कैम

हाल ही राजस्थान पुलिस ने अपने एक्स हैण्डल पर एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे एक महिला को उसकी बहन की क्लोन की गई आवाज से फोन आता है। फोन करने वाला कहता है कि उसका फोन और सामान चोरी हो गया है, पेपर वर्क के लिए 10 हजार रुपए तुरंत भेज दो। महिला घबराकर पैसे भेजने की तैयारी करती है, लेकिन वेरिफिकेशन के दौरान नंबर स्विच ऑफ मिलता है। बाद में पुलिस अधिकारी समझाते हैं कि यह एआइ वॉइस क्लोनिंग स्कैम है।

अपरिचित नंबर से मदद मांगने पर तुरंत विश्वास न करें

पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी अपरिचित नंबर से परिवार का सदस्य बनकर मदद मांगने पर तुरंत विश्वास न करें। पहले दूसरे माध्यम से (जैसे दूसरे फोन या व्यक्तिगत संपर्क) पुष्टि करें। अगर शक हो तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

पुलिस की सलाह

  • अनजान नंबर से फोन आने पर तुरंत पैसे न ट्रांसफर करें।
  • वॉइस सुनकर भावुक न हों, वेरिफिकेशन जरूरी।
  • परिवार के सदस्यों को पहले से ही इस स्कैम के बारे में बताएं।
  • संदिग्ध गतिविधि पर 1930 या 112 पर संपर्क करें।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

राजस्थान पुलिस का यह अभियान डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ ठगी के तरीके भी बदल रहे हैं, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

AI वॉइस क्लोनिंग कैसे काम करती है?

अपराधी सोशल मीडिया से व्यक्ति की आवाज के सैंपल इकट्ठा करते हैं और एआइ टूल्स से कुछ सेकंड की रिकॉर्डिंग से पूरी बातचीत तैयार कर लेते हैं।

बचाव के उपाय

  • वेरिफिकेशन कॉल करें
  • 1930 हेल्पलाइन याद रखें
  • संदिग्ध लिंक/ऐप न खोलें
  • परिवार में चर्चा करें

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