राजस्थान की सियासत में इस वक्त सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के बीच एक बहुत बड़ा और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद की धुरी बने हैं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और आरएलपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल। मदन राठौड़ द्वारा मीडिया के सामने हनुमान बेनीवाल का सामाजिक बहिष्कार करने को लेकर दिए गए एक बयान की आरएलपी प्रमुख ने कड़े शब्दों में निंदा की है और इस पूरे मामले को लेकर अब वे सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। सांसद हनुमान बेनीवाल ने जयपुर में मीडिया से मुखातिब होते हुए साफ तौर पर कहा कि हमारा देश पूरी तरह से बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित पवित्र संविधान और स्थापित कानूनों से चलता है। ऐसे सभ्य समाज में आज के आधुनिक दौर में कोई भी खाप पंचायतें भी किसी नागरिक या जन प्रतिनिधि का सामाजिक बहिष्कार करने का दुस्साहस नहीं कर सकती हैं। ऐसे में एक सत्ताधारी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जैसे जिम्मेदार संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से सामाजिक बहिष्कार करने की बात कहना सीधे तौर पर देश की कानूनी मर्यादाओं को लांघना और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। बेनीवाल ने चेतावनी दी है कि वे इस बयान को लेकर बेहद गंभीर हैं और मदन राठौड़ को इसका कानूनी जवाब भुगतना पड़ेगा।
मदन राठौड़ को जल्द थमाएंगे कानूनी नोटिस : बेनीवाल
इस पूरे सियासी घमासान के कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वे इस मामले को केवल एक राजनैतिक बयान मानकर चुप बैठने वाले नहीं हैं। मदन राठौड़ के इस आपत्तिजनक बयान के खिलाफ विधिक राय लेने के लिए वे पिछले कुछ दिनों से लगातार राजस्थान हाईकोर्ट (Jodhpur & Jaipur Bench) और देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट (New Delhi) के वरिष्ठ और नामचीन अधिवक्ताओं के सीधे संपर्क में हैं।
बेनीवाल ने कहा कि वकीलों की टीम इस बयान के वीडियो फुटेज और अखबारों के बयानों का बारीकी से तकनीकी व कानूनी अध्ययन कर रही है। बहुत जल्द मदन राठौड़ को एक कड़ा कानूनी नोटिस भेजा जाएगा और उसके बाद भी यदि आवश्यक हुआ तो उनके खिलाफ मानहानि और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की धाराओं के तहत कोर्ट में मामला दर्ज कराया जाएगा। बेनीवाल ने साफ लहजे में कहा कि मदन राठौड़ को अपने इस गैर-जिम्मेदाराना बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी या फिर अदालत के कटघरे में खड़े होकर इसका विधिक जवाब देना पड़ेगा।
मदन राठौड़ का पलटवार- ‘युवाओं को उकसा रहे हैं बेनीवाल’
दूसरी तरफ, आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल की इस कानूनी और राजनैतिक घेराबंदी के बाद भाजपा खेमे में भी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बेनीवाल के आरोपों पर पूरी आक्रामकता के साथ पलटवार किया है। मदन राठौड़ ने बेनीवाल पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आरएलपी प्रमुख अपनी ढहती हुई राजनीति को बचाने के लिए राजस्थान के सीधे-साधे ग्रामीण युवाओं को पूरी तरह से भटकाने का काम कर रहे हैं।
मदन राठौड़ ने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है और हमारे लोकतांत्रिक ढांचे में किसी भी सरकार या नीति के खिलाफ अपनी असहमति जताने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार देश के प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है। परंतु, असहमति जताने के नाम पर किसी भी नेता या दल को प्रदेश की स्थापित कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या आम जनता व युवाओं को हिंसा और अशांति के लिए उकसाने का अधिकार कतई नहीं दिया जा सकता है। राठौड़ ने स्पष्ट किया कि जो लोग कानून तोड़ेंगे, प्रशासन उनके खिलाफ पूरी सख्ती से निपटेगा।
सत्ता में आते ही बदल गई बीजेपी : बेनीवाल
प्रेस वार्ता के दौरान हनुमान बेनीवाल ने केवल सामाजिक बहिष्कार के मुद्दे पर ही मदन राठौड़ को नहीं घेरा, बल्कि उन्होंने वर्तमान भजनलाल शर्मा सरकार की कार्यप्रणाली पर भी कई तीखे नीतिगत सवाल खड़े किए। बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान की जनता पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में हुए अनगिनत पेपर लीक मामलों, संगठित माफियाओं की मनमर्जी और लगातार बढ़ते अपराधों से पूरी तरह से आहत और त्रस्त हो चुकी थी। इसी वजह से प्रदेश की जनता ने एक बड़े बदलाव की उम्मीद में भारी उम्मीदों के साथ भारतीय जनता पार्टी को सत्ता सौंपी थी।
मगर, सत्ता की मलाई हाथ में आते ही भाजपा अपने पुराने सभी वादों को भूल गई है और पूरी तरह से बदल चुकी है। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि आज भाजपा के राज में भी प्रदेश का युवा और बेरोजगार वर्ग उसी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहा है जैसा वह पिछली सरकार के समय महसूस करता था। सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में भारी ढिलाई आ चुकी है जिससे जमीनी स्तर पर जनता के काम पूरी तरह से ठप पड़े हैं।
‘500 गायों की मौत पर BJP चुप क्यों?’
गौवंश के मुद्दे पर भाजपा के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए नागौर सांसद ने एक बहुत बड़ा और बेहद संवेदनशील मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में विपक्ष की भूमिका में थी, तब यदि प्रदेश के किसी भी कोने में एक गाय का कंकाल भी मिल जाता था, तो भाजपा के तमाम छोटे-बड़े नेता सड़कों पर उतर आते थे और तत्कालीन सरकार के खिलाफ पूरे प्रदेश भर में एक बड़ा राजनीतिक माहौल खड़ा करने लग जाते थे।
मगर आज जब राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में प्रशासनिक लापरवाही और उचित प्रबंधन न होने के कारण 500 से अधिक पवित्र गायों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, तो पूरी की पूरी भाजपा और उसके बड़े नेता रहस्यमयी चुप्पी साधे बैठे हैं। बेनीवाल ने मीडिया के माध्यम से सीधे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से प्रश्न पूछा कि क्या अब उन 500 मृत गायों की पीड़ा भाजपा को दिखाई नहीं दे रही है? क्या गायों के नाम पर राजनीति करना और वोट बटोरना ही भाजपा का एकमात्र असली मकसद है? इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की यह खामोशी मरुधरा के गौ-भक्तों के साथ एक बड़ा विश्वासघात है।
‘2.5 वर्षों में एक भी बड़ा मगरमच्छ नहीं पकड़ा’
पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर भी सांसद हनुमान बेनीवाल ने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों का हवाला देकर प्रदेश सरकार को घेरा। बेनीवाल ने याद दिलाया कि राजस्थान विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े-बड़े मंचों से मारवाड़ और शेखावाटी की जनता से यह वादा किया था कि भाजपा की सरकार बनते ही युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक माफियाओं को पाताल से भी खोजकर निकाला जाएगा और उन्हें सलाखों के पीछे भेजकर कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाएगी।
बेनीवाल ने तंज कसते हुए कहा कि केंद्र में मोदी सरकार के लगातार तीसरे कार्यकाल और प्रदेश में भाजपा सरकार के इस पूरे समयावधि के दौरान धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। सरकार ने पिछले 2.5 वर्षों (ढाई वर्षों) की अवधि में केवल कुछ छोटे-मोटे दलालों और परीक्षार्थियों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपाई है, लेकिन जो इस पूरे रैकेट के असली आका और बड़े मगरमच्छ हैं, उन्हें सरकार ने आज तक हाथ भी नहीं लगाया है। वे बड़े मगरमच्छ आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और युवा दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
‘भले ही हमारा 1 भी विधायक नहीं, पर…’
अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) की सांगठनिक स्थिति और भविष्य के वजूद पर बात करते हुए हनुमान बेनीवाल ने बेहद बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने इस सच को स्वीकार किया कि पिछले विधानसभा चुनाव में जहां आरएलपी के 3 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, वहीं इस बार के चुनाव परिणामों के बाद विधानसभा में हमारी पार्टी का एक भी विधायक (0 विधायक) नहीं है। बेनीवाल ने कहा कि विधायकों की संख्या से हनुमान बेनीवाल की राजनीति और जन-संघर्ष को नहीं नापा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मैंने अकेले अपने दम पर आरएलपी जैसी एक क्षेत्रीय पार्टी का गठन करके पूरे राजस्थान की जनता को यह साफ संदेश दिया है कि मरुधरा में कांग्रेस और भाजपा के एकाधिकार को चुनौती देने वाली एक मजबूत ‘तीसरी ताकत’ पूरी मजबूती के साथ खड़ी हो चुकी है। विधायकों की संख्या शून्य होने के बावजूद आज भी राजस्थान की जनता के हक की लड़ाई, किसानों के मुद्दे और युवाओं के रोजगार की बात आरएलपी ही हर मोर्चे पर सड़क से लेकर संसद तक पूरी ताकत के साथ लड़ रही है और जनता इस बात को अच्छी तरह जानती है।
‘ईद के बहाने दंगा भड़काने की फिराक में थी सरकार’
भैराणा धाम आंदोलन के दौरान हुए घटनाक्रमों पर एक बहुत बड़ा और सनसनीखेज राजनीतिक आरोप लगाते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल ने तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब भैराणा धाम में ऐतिहासिक महापंचायत का सफल आयोजन करने के बाद हमारे हजारों कार्यकर्ताओं और साधु-संतों ने शांतिपूर्ण तरीके से जयपुर कूच का ऐलान किया, तब सरकार और उसका खुफिया तंत्र पूरी तरह से बौखला गया था।
बेनीवाल ने आरोप लगाया कि अगले ही दिन प्रदेश में पवित्र ईद का त्योहार था, इसलिए सरकार के कुछ आला अधिकारी और राजनैतिक आका इस पूरे शांतिपूर्ण आंदोलन के बीच कोई न कोई सांप्रदायिक या प्रशासनिक विवाद पैदा करने की गहरी फिराक में थे ताकि आंदोलन को बदनाम किया जा सके और प्रदेश का माहौल बिगाड़ा जा सके। मगर हनुमान बेनीवाल और आरएलपी के कार्यकर्ताओं व पूज्य संतों की सूझबूझ के कारण सरकार के उन तमाम विभाजनकारी मंसूबों को पूरी तरह से नाकाम कर दिया गया और हमारा आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और सफल रहा। उन्होंने संकल्प दोहराया कि गायों, संतों और सनातन परंपराओं के सम्मान के लिए आरएलपी हमेशा भैराणा धाम के संतों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी।
‘जिस पेड़ पर बैठे हैं, उसी की डाल काट रहे हैं’
संवाददाताओं ने जब हनुमान बेनीवाल से उनके द्वारा हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनकी कैबिनेट के मंत्रियों के खिलाफ दिए गए कुछ तीखे और आक्रामक बयानों को लेकर प्रश्न पूछा, तो बेनीवाल ने अपने चिरपरिचित अंदाज में एक ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्य का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधा।
बेनीवाल ने कहा कि हमारे देश के इतिहास और साहित्य में महाकवि कालिदास के प्रारंभिक जीवन से जुड़ा एक अत्यंत प्रसिद्ध तथ्य सामने आता है कि वे अपने शुरुआती दिनों में जिस पेड़ की शाखा पर खुद बैठे थे, अज्ञानतावश उसी डाल को कुल्हाड़ी से काट रहे थे। आज राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी बिल्कुल उसी भूमिका में नजर आ रहे हैं। वे जिस भारतीय जनता पार्टी और जनता के विश्वास रूपी पेड़ पर मुख्यमंत्री बनकर बैठे हैं, अपनी प्रशासनिक अदूरदर्शिता, कमजोर फैसलों और मंत्रियों के बीच आपसी खींचतान के कारण उसी पेड़ की जड़ों और डालियों को लगातार काटने में लगे हुए हैं।
बेनीवाल ने यह भी संगीन आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा परोक्ष रूप से कांग्रेस के उन कुछ बड़े नेताओं के साथ अंदरूनी रूप से मिले हुए हैं जो केवल दिखावे के लिए विधानसभा में उनके खिलाफ बोलते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे दोनों की राजनैतिक जुगलबंदी चल रही है।
‘RLP कार्यकर्ताओं पर पुलिसिया कार्रवाई निंदनीय‘
डीडवाना-कुचामन जिले के कुचामन शहर में हुई हालिया घटना का जिक्र करते हुए आरएलपी सुप्रीमो ने स्थानीय प्रशासन और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कुचामन की आम जनता पिछले लंबे समय से टूटी हुई सड़कों, पीने के साफ पानी के गंभीर संकट और भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती की मार झेल रही है। जब आरएलपी के स्थानीय कार्यकर्ता पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से कुचामन आए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से इन बुनियादी जन-समस्याओं पर जवाब मांगने गए थे, तो मदन राठौड़ के पास जनता को देने के लिए कोई ठोस जवाब नहीं था।
अपनी प्रशासनिक विफलता को छिपाने के लिए भाजपा नेताओं के इशारे पर स्थानीय पुलिस ने आरएलपी के शांतिप्रिय कार्यकर्ताओं पर लाठियां भांजी और उनके खिलाफ दमनकारी कानूनी कार्रवाई की, जो कि पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और निंदनीय है। बेनीवाल ने कड़े लहजे में कहा कि भाजपा सरकार यह न भूले कि आरएलपी के कार्यकर्ता और मरुधरा के किसान सत्ता की इन सरकारी लाठियों और मुकदमों के डर से पीछे हटने वाले नहीं हैं। जनता के हक के लिए हमारा यह संघर्ष आने वाले दिनों में और ज्यादा उग्र और व्यापक रूप धारण करेगा।


