बिजनौर में जमीन फर्जीवाड़े के एक मामले में कारोबारी तालिब की जमानत अर्जी रद्द कर दी गई है। गैंगस्टर कोर्ट की विशेष सत्र न्यायाधीश अलका चौधरी ने सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। तालिब पिछले करीब दो महीने से जेल में बंद हैं। तालिब और उनके भाई सांसद भारतेंदु सिंह पर जानलेवा हमले के एक अन्य मामले में पहले से ही जेल में बंद हैं। एडीजीसी पंकज चौहान ने बताया कि जेल में रहते हुए ही तालिब के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की गई थी। यह एफआईआर थाना शेरकोट के मोहल्ला नौधना निवासी शाहिद पुत्र असगर ने दर्ज कराई है। इसमें तालिब और मोहम्मद गाजी सहित सात अन्य लोगों पर सहकारी आवास समिति लिमिटेड की संपत्ति में धोखाधड़ी का आरोप है। शिकायतकर्ता शाहिद ने बताया कि वह इस समिति का पंजीकृत सदस्य है, जिसमें कुल 51 सदस्य हैं। आरोप है कि तालिब और उनके साथियों ने फर्जी इकरारनामे के आधार पर समिति की संपत्ति में हेरफेर किया। यह संपत्ति मूल रूप से 1989 में अब्दुल अज़ीज़ पुत्र अब्दुल गफूर से एक इकरारनामे के तहत समिति के पक्ष में थी। सब रजिस्ट्रार कार्यालय धामपुर के रिकॉर्ड के अनुसार, 25 बीघा जमीन का बैनामा शेरकोट आवास समिति के नाम किया जाना था। हालांकि, विक्रेता अब्दुल अजीज की मृत्यु के बाद, समिति के सचिव शौकत अली पुत्र हसमतुल्लाह ने विक्रेता के वारिसों के साथ मिलकर केवल साढ़े बारह बीघा जमीन का ही बैनामा समिति के नाम कराया। शेष साढ़े बारह बीघा जमीन का बैनामा नौ फर्जी सदस्य बनकर हेरफेर कर दिया गया। इस संपत्ति के फर्जीवाड़े और जालसाजी में आरोपियों ने आपस में एक-दूसरे को फर्जी बैनामे भी किए। अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कारोबारी तालिब की जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया।


