सिंहस्थ 2028 को लेकर उज्जैन में अधोसंरचना विकास कार्यों ने गति पकड़ ली है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए शहर के 100 प्रमुख चौराहों का विकास और आधुनिकीकरण किया जाएगा। इन चौराहों को हाईटेक तकनीक से लैस किया जाएगा, जिससे ट्रैफिक और क्राउड मैनेजमेंट को बेहतर बनाया जा सकेगा। उज्जैन कलेक्टर रौशन सिंह ने बताया कि सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के तहत शहर में सड़कों के विस्तार के साथ-साथ चौराहों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहर के 100 से अधिक चौराहों को चिन्हित किया गया है, जहां आधुनिक डिजाइन के अनुरूप निर्माण कार्य किया जाएगा। सभी चौराहों पर लेफ्ट टर्न और यू-टर्न की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि यातायात का प्रवाह सुचारु बना रहे। प्रमुख सड़कों को छह और चार लेन में विकसित कर रहे उन्होंने बताया कि वर्तमान में कई प्रमुख सड़कों को छह लेन और चार लेन में विकसित किया जा रहा है। शहर के भीतर 60 से अधिक सड़कों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। सड़क निर्माण कार्यों के पूरा होने के बाद चरणबद्ध तरीके से चौराहों का विकास शुरू किया जाएगा। इसके लिए डिजाइन भी तैयार कर ली गई है। कैमरों से होगी निगरानी, कंट्रोल रूम से होगा संचालन कलेक्टर रौशन सिंह के अनुसार सभी विकसित चौराहों को स्मार्ट तकनीक से जोड़ा जाएगा। चौराहों पर लगाए जाने वाले कैमरों और ट्रैफिक सिग्नलों की लाइव फीड एक केंद्रीय कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी। इससे किसी भी स्थान पर भीड़ बढ़ने या ट्रैफिक जाम की स्थिति बनने पर तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी। प्रभावी मॉनिटरिंग हो सकेगी प्रशासन का दावा है कि हाईटेक चौराहों के माध्यम से पूरे शहर की प्रभावी मॉनिटरिंग संभव होगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग से यातायात प्रबंधन अधिक सुगम बनेगा और सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित किया जा सकेगा। सिंहस्थ 2028 से पहले सभी प्रस्तावित चौराहों का निर्माण और आधुनिकीकरण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि महाकुंभ के दौरान शहर में बेहतर यातायात व्यवस्था और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।


