IIT-NEET Free Coaching: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी शैक्षणिक पहल शुरू होने जा रही है। दुर्ग के ऐतिहासिक जेआरडी मल्टीपरपस स्कूल में जल्द ही ‘सुपर-30’ योजना प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सरकारी स्कूलों के मेधावी छात्र-छात्राओं को आईआईटी-जेईई और नीट जैसी देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की उच्चस्तरीय तैयारी पूरी तरह निशुल्क कराई जाएगी। योजना को लेकर जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके लिए देश की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाओं और एडटेक प्लेटफॉर्म्स का भी सहयोग लिया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की कोचिंग सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा सकें।
IIT-NEET Free Coaching: प्रवेश परीक्षा के जरिए होगा 30 विद्यार्थियों का चयन
योजना के तहत जिले के शासकीय स्कूलों से 10वीं कक्षा उत्तीर्ण मेधावी विद्यार्थियों का चयन विशेष प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। चयनित 30 विद्यार्थियों का एक विशेष बैच तैयार किया जाएगा, जिन्हें दो वर्षों तक व्यवस्थित और लक्ष्य आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन विद्यार्थियों को विज्ञान संकाय में अध्ययन के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई जाएगी, जिससे वे स्कूल शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा दोनों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
फिजिक्सवाला समेत प्रतिष्ठित संस्थाओं का मिलेगा सहयोग
योजना के संचालन में देश की अग्रणी ऑनलाइन और ऑफलाइन कोचिंग संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। फिजिक्सवाला सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं के विशेषज्ञ शिक्षक विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देंगे। स्मार्ट बोर्ड, हाई-स्पीड इंटरनेट और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म से लैस आधुनिक कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाई कराई जाएगी। विशेषज्ञ शिक्षक प्रत्यक्ष अथवा लाइव हाइब्रिड मोड के माध्यम से फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और बायोलॉजी जैसे विषयों की गहन तैयारी कराएंगे।
कोटा और दिल्ली जाने की मजबूरी होगी खत्म
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी कोटा, दिल्ली और अन्य बड़े शहरों का रुख करते हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। सुपर-30 योजना शुरू होने के बाद विद्यार्थियों को अपने जिले में ही राष्ट्रीय स्तर की तैयारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे न केवल अभिभावकों का आर्थिक भार कम होगा बल्कि जिले से प्रतिभाओं के पलायन पर भी रोक लगेगी।
हॉस्टल, भोजन और अध्ययन सामग्री भी निशुल्क
योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को केवल कोचिंग ही नहीं बल्कि समग्र शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को नि:शुल्क आवासीय हॉस्टल, पौष्टिक भोजन, अध्ययन सामग्री, प्रीमियम प्रिंटेड मॉड्यूल, संदर्भ पुस्तकें, डेली प्रैक्टिस पेपर तथा नियमित मॉक टेस्ट सीरीज उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की निरंतर निगरानी की जाएगी और उन्हें परीक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।
काउंसलिंग और मेंटरशिप पर रहेगा विशेष फोकस
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। इसे देखते हुए योजना में मोटिवेशनल सेशन, करियर काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक परामर्श की भी व्यवस्था की जाएगी। साथ ही विषयगत समस्याओं के समाधान के लिए विशेष डाउट-क्लियरिंग सिस्टम और व्यक्तिगत मेंटरशिप सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इससे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उनकी तैयारी अधिक प्रभावी हो सकेगी।
दुर्ग को मिल सकती है नई शैक्षणिक पहचान
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना सफलतापूर्वक लागू होती है तो आने वाले वर्षों में दुर्ग जिला आईआईटी और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर सकता है। इससे जिले के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा और दुर्ग प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण प्रतियोगी शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता है।
गरीब और किसान परिवारों के बच्चों के लिए ड्रीम प्रोजेक्ट
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि यह योजना केवल कोचिंग कार्यक्रम नहीं बल्कि गरीब, मजदूर और किसान परिवारों के बच्चों को देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाने का ड्रीम प्रोजेक्ट है। उन्होंने कहा कि फिजिक्सवाला जैसी उत्कृष्ट संस्थाओं के सहयोग से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा, हॉस्टल, टेस्ट सीरीज और आधुनिक अध्ययन सुविधाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकती है योजना
सुपर-30 योजना सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकती है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो यह पहल न केवल विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देगी, बल्कि दुर्ग जिले को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में नई पहचान भी दिलाएगी।


