रानीगंज-गोढ़ी मार्ग के किनारे फेंका मिला मेडिकल वेस्ट

रानीगंज-गोढ़ी मार्ग के किनारे फेंका मिला मेडिकल वेस्ट

भास्कर न्यूज | अररिया रानीगंज बस स्टैंड से गोढ़ी चौक जाने वाली सड़क पर नहर किनारे शुक्रवार को बड़ी मात्रा में मेडिकल वेस्ट फेंका हुआ मिला। यहां एक्सपायरी और इस्तेमाल की गई एंटीबायोटिक दवाइयों के साथ कई इंजेक्शन की सिरिंज और अन्य मेडिकल सामग्री पाई गई। सड़क किनारे खुले में मेडिकल कचरा मिलने से आसपास के लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। समय-समय पर सदर अस्पताल और अन्य अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को खुले स्थानों पर फेंका जाता रहा है, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अररिया में मेडिकल वेस्ट को लापरवाही से फेंकने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। वर्ष 2018 में पनार नदी और स्टेशन रोड स्थित नहर पुल के पास मेडिकल कचरा मिला था। अप्रैल 2019 में इसी पुल पर दोबारा मेडिकल वेस्ट फेंका गया था। वहीं, 2019 में सदर अस्पताल परिसर में कंडोम जलाने का मामला भी सामने आया था। इसके अलावा वर्ष 2020 में सूजन से संबंधित दवाइयां, मलहम, सुई और एंटीबायोटिक दवाएं अधजली अवस्था में मिली थीं। वर्ष 2022 में नगर परिषद क्षेत्र के स्टेशन रोड स्थित जेबीसी नहर पर हजारों पत्ते दवाइयों को इस तरह फेंका गया था, जैसे किसी बेकार सामान को कचरे में डाल दिया गया। खुले में मेडिकल वेस्ट फेंकना जानलेवा चिकित्सक डॉ. मार्तेडेंय ने कहा कि खुले में मेडिकल वेस्ट फेंकना लोगों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है। उन्होंने बताया कि इस्तेमाल की गई सिरिंज, सुई और दूषित पट्टियों से संक्रमण फैलने का खतरा सबसे अधिक रहता है। दूषित सुइयों के संपर्क में आने से एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। भास्कर न्यूज | अररिया रानीगंज बस स्टैंड से गोढ़ी चौक जाने वाली सड़क पर नहर किनारे शुक्रवार को बड़ी मात्रा में मेडिकल वेस्ट फेंका हुआ मिला। यहां एक्सपायरी और इस्तेमाल की गई एंटीबायोटिक दवाइयों के साथ कई इंजेक्शन की सिरिंज और अन्य मेडिकल सामग्री पाई गई। सड़क किनारे खुले में मेडिकल कचरा मिलने से आसपास के लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। समय-समय पर सदर अस्पताल और अन्य अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को खुले स्थानों पर फेंका जाता रहा है, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अररिया में मेडिकल वेस्ट को लापरवाही से फेंकने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। वर्ष 2018 में पनार नदी और स्टेशन रोड स्थित नहर पुल के पास मेडिकल कचरा मिला था। अप्रैल 2019 में इसी पुल पर दोबारा मेडिकल वेस्ट फेंका गया था। वहीं, 2019 में सदर अस्पताल परिसर में कंडोम जलाने का मामला भी सामने आया था। इसके अलावा वर्ष 2020 में सूजन से संबंधित दवाइयां, मलहम, सुई और एंटीबायोटिक दवाएं अधजली अवस्था में मिली थीं। वर्ष 2022 में नगर परिषद क्षेत्र के स्टेशन रोड स्थित जेबीसी नहर पर हजारों पत्ते दवाइयों को इस तरह फेंका गया था, जैसे किसी बेकार सामान को कचरे में डाल दिया गया। खुले में मेडिकल वेस्ट फेंकना जानलेवा चिकित्सक डॉ. मार्तेडेंय ने कहा कि खुले में मेडिकल वेस्ट फेंकना लोगों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है। उन्होंने बताया कि इस्तेमाल की गई सिरिंज, सुई और दूषित पट्टियों से संक्रमण फैलने का खतरा सबसे अधिक रहता है। दूषित सुइयों के संपर्क में आने से एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *