कोटगेट-सांखला फाटक पर अंडरब्रिज योजना का विरोध तेज, बोले…‘जुगाड़ू उपाय से बढ़ेंगी नई समस्याएं’

कोटगेट-सांखला फाटक पर अंडरब्रिज योजना का विरोध तेज, बोले…‘जुगाड़ू उपाय से बढ़ेंगी नई समस्याएं’

कोटगेट रेल फाटक पर आरयूबी निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही विरोध के स्वर भी मुखर हो गए हैं। गुरुवार को आदिनाथ भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में बीकानेर व्यापार एसोसिएशन एवं जन संघर्ष समिति ने कोटगेट और सांखला रेल फाटकों पर प्रस्तावित आरयूबी एवं अंडरपास निर्माण को लेकर कड़ा रोष जताया। वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से शुरू की जा रही यह प्रक्रिया जनता के हित में नहीं है। इससे समस्या का समाधान होने के बजाय शहर में नई परेशानियां खड़ी होंगी। उनका कहना था कि रेलवे बाईपास ही इस समस्या का स्थायी और व्यावहारिक समाधान है।
रेल बाईपास सरकार और रेलवे की ही योजना

वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. दास गुप्ता ने कहा कि रेल बाईपास कोई निजी कल्पना नहीं, बल्कि सरकार और रेलवे प्रशासन की स्वीकृत योजना है। वर्ष 1972 से 2023 तक के मास्टर प्लान में रेलवे बाईपास को ही समाधान माना गया है। रेलवे ने वर्ष 2003-04 की पिंक बुक में भी इसे शामिल किया था। वर्ष 2005 में भूमि अवाप्ति और 2011 में राज्य के मुख्य सचिव की टिप्पणी भी बाईपास के पक्ष में रही है। एसोसिएशन के सचिव उमेश मेहंदीरता ने नक्शों के जरिए प्रस्तावित योजनाओं और संभावित प्रभावों की जानकारी दी।

सांखला फाटक पर बनेगी दीवार

एसोसिएशन अध्यक्ष नरपत सेठिया ने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन सांखला फाटक पर स्थायी दीवार बनाकर रास्ता बंद करने की तैयारी में है। साथ ही मटका गली से कोयला गली तक तीसरा अंडरब्रिज प्रस्तावित किया गया है, जिससे शहर के भीतर यातायात दबाव और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि जनता के हितों के विपरीत कोई काम स्वीकार नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को तेज किया जाएगा।सेठिया ने कहा कि कोटगेट पर प्रस्तावित आरयूबी महज चार मीटर चौड़ा और ढाई मीटर ऊंचा होगा, जिससे बड़े वाहन नहीं निकल सकेंगे। बारिश में पानी भराव की समस्या रहेगी। रेलवे क्रॉसिंग भी समाप्त नहीं होगी और दोनों ओर चौराहे बनने से जाम एवं दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पैदल यात्रियों, अग्निशमन वाहनों, बड़ी एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों के लिए सुरक्षित और सुगम रास्ते की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।

इतने चक्कर मंदिर के लगाता तो भगवान मिल जाते
पत्रकार वार्ता के दौरान अधिवक्ता आर.के. दास गुप्ता की टिप्पणी भी चर्चा में रही। उन्होंने कहा कि रेलवे बाईपास की मांग को लेकर वे सांसद अर्जुनराम मेघवाल से भी कई बार मिल चुके हैं। उन्होंने व्यंग्य भर लहजे में कहा कि इतने चक्कर अगर मंदिर के लगाए होते, तो शायद भगवान भी मिल जाते। उन्होंने कहा कि रेलवे बाईपास के लिए संघर्ष जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर फिर जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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