दुर्ग संभाग आयुक्त न्यायालय ने रिसाली नगर निगम के वार्ड-16 बीआरपी कॉलोनी के पार्षद विनय नेताम को पद से बर्खास्त कर दिया है। यह आदेश संभाग आयुक्त सत्य नारायण राठौर ने छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 19(1)(अ) के तहत जारी किया। आदेश में कहा गया है कि अब उनका पार्षद पद पर बने रहना नगर निगम और जनता के हित में ठीक नहीं है। जानिए पूरा मामला यह मामला 29 मार्च 2024 का है। उस दिन रिसाली नगर निगम प्रशासन ने मतदाता जागरूकता बाइक रैली का आयोजन किया था, जिसमें सुबह 8 से 10 बजे तक अधिकारी और कर्मचारी व्यस्त थे। इसी दौरान निगम मुख्यालय के आधार पंजीयन कक्ष में तोड़फोड़ की घटना हुई। आधार ऑपरेटर अमरदीप कुमार साव ने शिकायत दर्ज कराई कि पार्षद विनय नेताम ने कमरे में घुसकर प्रिंटर, मॉनिटर, बायोमेट्रिक मशीन और स्कैनर समेत कई उपकरण तोड़ दिए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना के समय पार्षद ने कर्मचारियों के सामने तोड़फोड़ करने की बात स्वीकार की थी। नगर निगम प्रशासन ने संभाग आयुक्त न्यायालय में बताया कि इस घटना में लगभग 1 लाख रुपए की सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ है और सरकारी कामकाज भी प्रभावित हुआ। इस मामले में नेवई थाने में एफआईआर क्रमांक 0096/2024 दर्ज है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 427, 294 और 506 के तहत केस दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान आधार ऑपरेटर अमरदीप कुमार साव ने बयान दिया और बताया कि पार्षद ने निगम मुख्यालय स्थित आधार केंद्र में घुसकर उपकरण तोड़ दिए थे। पार्षद के बचाव पक्ष ने लगाया राजनीतिक रंजिश का आरोप सुनवाई के दौरान पार्षद विनय नेताम के बचाव पक्ष ने कहा कि यह मामला व्यक्तिगत विवाद और राजनीतिक रंजिश के कारण बनाया गया है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आधार केंद्र एक निजी चॉइस सेंटर था और उसका नगर निगम से कोई सीधा संबंध साबित नहीं होता। पक्ष ने यह तर्क दिया कि यह मामला पहले से ही अदालत में चल रहा है, इसलिए इसी मामले में दोबारा कार्रवाई करना सही नहीं है। लेकिन संभाग आयुक्त की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पार्षद की ओर से लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं।
साक्ष्य पेश नहीं करने पर कमजोर पड़ा पक्ष आदेश में कहा गया है कि पार्षद पक्ष को अपनी बात रखने और सबूत देने के लिए पूरा मौका दिया गया था, लेकिन उन्होंने न तो गवाहों से पूछताछ की और न ही कोई ठोस सबूत पेश किए। वहीं, आवेदक पक्ष द्वारा दिए गए फोटो और दस्तावेजों को अदालत ने महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि इन सबूतों से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप साबित होते हैं। 2026 में फिर निगम कार्यालय में विवाद का आरोप मामले की सुनवाई के दौरान रिसाली नगर निगम आयुक्त ने 19 मार्च 2026 को न्यायालय में एक और रिपोर्ट पेश की। इसमें आरोप लगाया गया कि पार्षद ने निगम कार्यालय में आयुक्त और अन्य अधिकारियों के कमरे बंद कर दिए थे, जिससे कर्मचारियों को बंधक जैसी स्थिति में रहना पड़ा और आम लोगों को अधिकारियों से मिलने से रोक दिया गया। न्यायालय ने कहा कि इस आरोप पर भी पार्षद की ओर से कोई जवाब या सफाई नहीं दी गई। सार्वजनिक हित में हटाने का आदेश संभाग आयुक्त ने आदेश में कहा कि उपलब्ध दस्तावेज और सबूतों से यह साफ होता है कि पार्षद विनय नेताम ने अपने पद की जिम्मेदारियों को सही तरीके से नहीं निभाया और नगर निगम के कामकाज में बाधा डाली। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 19(1)(अ) के तहत उन्हें पार्षद पद से हटा दिया गया।


