मौसम का कहर: बाढ़ के चलते 31 मई तक बंद रहेंगे सिद्धपीठ के कपाट!

मौसम का कहर: बाढ़ के चलते 31 मई तक बंद रहेंगे सिद्धपीठ के कपाट!

अगर आप छुट्टियों में शाकंभरी सिद्ध पीठ के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। सहारनपुर में मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ और उससे हुए नुकसान को देखते हुए प्रशासन ने 31 मई तक सिद्धपीठ के कपाट बंद करवा दिये हैं। यानी अब 31 मई के बाद ही शाकंभरी सिद्ध पीठ के दर्शन हो सकेंगे।

शिवालिक की तलहटी में हैं माता का दरबार

शाकंभरी सिद्ध पीठ मंदिर शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। यह क्षेत्र उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर है। गुरुवार की रात पहाड़ी क्षेत्रों में ही बरसात के बाद यहां बाढ़ आ गई थी। बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। कई अस्थाई दुकानें पानी के बहाव में बह गई और एक महिला की मौत होने के साथ-साथ कई श्रद्धालु भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए। एक ट्रैक्टर ट्रॉली को भी पानी अपने साथ बहा ले गया। बाढ़ के कारण रातभर शाकम्भरी क्षेत्र में अफरा-तफरी मची रही। कई दुकानों का भारी नुकसान होने की आशंका है। प्रशासन अब बाढ़ में हुए कुल नुकसान का आकलन कर रहा है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में शुरू हुआ अभियान

जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने शाकंभरी सिद्धपीठ के पास बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान यहां हुए भारी नुकसान को देखते हुए 31 मई तक दर्शन बंद करा दिए गए। इसकी एक वजह यह भी है की मौसम विभाग की ओर से अभी और भी अलर्ट जारी किए गए हैं। ऐसे में इस घटना की पुनरावृत्ति ना हो इसी के मद्देनजर 31 मई तक शाकंभरी सिद्ध पीठ के कपाट बंद रहेंगे। प्रशासन ने कहा है कि जो श्रद्धालु छुट्टियों में शाकंभरी दर्शन की योजना बना रहे थे उन्हे 31 मई तक इंतजार करना चाहिए। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जब तक मौसम ठीक नहीं हो जाता वह शाकंभरी सिद्धपीठ या शिवालिक की पहाड़ियों की ओर ना जाएं। यहां बरसाती नदियां अचानक से उफान पर आ सकती हैं।

संभलने तक मौका नहीं मिला

गुरुवार की रात भी ऐसा ही हुआ लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और जब पहाड़ी इलाकों पर बरसात हुई तो वहां से पानी तेजी से नीचे आया। इस पानी की रफ्तार इतनी अधिक थी कि वह अपने साथ ट्रैक्टर ट्राली को भी बहा ले गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह सब इतनी तेजी से हुआ कि लोगों के संभलने का मौका नहीं मिल पाया। यह पहली बार नहीं है। शाकम्भरी क्षेत्र में इससे पहले भी इस तरह अचानक बाढ़ की घटनाएं हो चुकी हैं।

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