US Iran Deal Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी परमाणु समझौता वार्ता को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बड़ा बयान दिया है। वेंस ने कहा है कि अभी यह तय नहीं है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे या नहीं, क्योंकि दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर बातचीत अब भी जारी है।
जेडी वेंस ने गुरुवार को जॉइंट बेस एंड्रयूज पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के मसौदे में ‘कुछ भाषा संबंधी बिंदुओं’ पर अभी चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा, “यह कहना मुश्किल है कि राष्ट्रपति इस एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर कब या हस्ताक्षर करेंगे भी या नहीं। हम अभी कुछ मुद्दों पर आगे-पीछे बातचीत कर रहे हैं।”
परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम पर अटकी बात
वेंस ने बताया कि बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) का भंडार बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान इन मुद्दों पर स्पष्ट प्रतिबद्धता दे।
उन्होंने कहा कि अब तक ईरान ‘अच्छी नीयत’ के साथ बातचीत करता दिख रहा है, लेकिन अभी अंतिम सहमति बनने में समय लग सकता है। वेंस ने उम्मीद जताई कि यदि बातचीत आगे बढ़ती रही तो ट्रंप समझौते को मंजूरी देने की स्थिति में आ सकते हैं।
60 दिन के युद्धविराम पर बनी है सहमति
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के युद्धविराम विस्तार को लेकर एक प्रारंभिक समझौता तैयार किया गया है। इस प्रस्तावित एमओयू में होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई वार्ता शुरू करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि इस समझौते को लागू करने के लिए दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की अंतिम मंजूरी जरूरी होगी।
सीजफायर में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच हमलों और जवाबी कार्रवाई की घटनाओं के बावजूद वेंस ने दावा किया कि युद्धविराम अभी भी लागू है। उन्होंने कहा, “ऐसे युद्धविराम थोड़े अस्थिर होते हैं। कभी-कभी इनमें छोटे-छोटे तनाव या झड़पें होती रहती हैं।”
वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका अपनी सुरक्षा के लिए रक्षात्मक सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखेगा।
ट्रंप प्रशासन पर बढ़ रहा दबाव
ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर ट्रंप प्रशासन पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता ईरान को लेकर नरम रुख अपनाने का विरोध कर रहे हैं, जबकि वैश्विक तेल आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को देखते हुए अमेरिका पर समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का दबाव भी बना हुआ है।


