Coal Mining: कोयले के बाद अब दुर्लभ खनिजों की माइनिंग में उतरेगी SECL, केंद्रीय मंत्री से मिले संकेत, खुलेंगे नए अवसर

Coal Mining: कोयले के बाद अब दुर्लभ खनिजों की माइनिंग में उतरेगी SECL, केंद्रीय मंत्री से मिले संकेत, खुलेंगे नए अवसर

Coal Mining: कोरबा कोल इंडिया की मिनी रत्न सहयोगी कंपनी एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) अब कोयला खनन में अपना वर्चस्व स्थापित करने के बाद देश के रणनीतिक और दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में कदम बढ़ाने जा रही है। कंपनी की योजना प्रदेश के गर्भ में छिपे ग्रेफाइट और टीन जैसे ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ (दुर्लभ तत्वों) को बाहर निकालने की है। इसी कड़ी में एसईसीएल की नजर बलरामपुर जिले के रामानुजगंज क्षेत्र में मौजूद ग्रेफाइट और दंतेवाड़ा जिले के विशाल टीन भंडार पर टिकी है। हाल ही में केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे के बिलासपुर प्रवास के दौरान एसईसीएल के शीर्ष प्रबंधन ने इन ब्लॉक्स के आवंटन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

Coal Mining: कोयला कंपनी के पास अनुभव

केंद्रीय राज्य मंत्री ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। कोयला कंपनी का तर्क है कि उसके पास दशकों का खनन अनुभव, अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की एक विशाल टीम मौजूद है, जो इन दुर्लभ खनिजों का सुरक्षित उत्खनन व संवर्धन कर देश के विकास के लिए बाजार में ला सकती है।

देश का 36 फीसदी टीन अकेले छत्तीसगढ़ में

इंडियन मिनरल ईयर बुक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में टीन अयस्क के कुल भंडार का लगभग 35.8 प्रतिशत हिस्सा अकेले छत्तीसगढ़ में समाहित है। राज्य में करीब 83.72 मिलियन टन टीन का विशाल भंडार है, जो मुख्य रूप से दंतेवाड़ा जिले में केंद्रित है। वहीं, बलरामपुर जिले के रामानुजगंज क्षेत्र में ग्रेफाइट और एस्बेस्टस के भंडार की पुष्टि हो चुकी है।

रामानुजगंज में सीएमपीडीआई का सर्वे तेज

खनिजों की सटीक उपलब्धता और गुणवत्ता का आकलन करने के लिए कोल इंडिया की तकनीकी शाखा सीएमपीडीआई (सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड) ने रामानुजगंज में बेस कैंप स्थापित किया है। यहां आधुनिक मशीनों के जरिए डीप ड्रिलिंग कर जमीन के भीतर से सैंपल्स निकाले जा रहे हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है। शुरुआती सर्वे में कोयले के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

क्यों खास है ग्रेफाइट?

नाभिकीय संयंत्रों (न्यूक्लियर रिएक्टर्स) में तीव्रगामी न्यूट्रॉन की गति को नियंत्रित करने वाले मॉडरेटर के रूप में और इस्पात उद्योगों की उच्च तापीय भट्टियों और इलेक्ट्रोलाइटिक सेल के निर्माण में इसके अलावा पेंसिल की लीड, बैटरी के एनोड और सूखे स्नेहक (ड्राई ल्यूब्रिकेंट) के रूप में उपयोग किया जाता है।

प्रदेशमें रेयर अर्थ मटेरियल (दुर्लभ खनिजों) के खनन के लिए एसईसीएल का राज्य सरकार के साथ पूर्व में ही एक एमओयू हो चुका है। प्रदेश में ग्रेफाइट और टीन अयस्क के उत्खनन को लेकर कंपनी बेहद गंभीर है और इस कार्ययोजना पर तेजी से काम चल रहा है।

  • डॉ. सनीष चंद, जनसंपर्क अधिकारी, एसईसीएल बिलासपुर

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