भरतपुर। लैंड पुलिंग मामले को लेकर विरोध-प्रदर्शन होने के दूसरे ही दिन भरतपुर विकास प्राधिकरण ने दो गांवों में कार्रवाई की। किसानों ने इसे प्रदर्शन के बाद की बौखलाहट बताया है। इसके तहत सेवर क्षेत्र में करीब 90 भूखंडों पर बीडीए का बुलडोजर चला। एक ओर किसान विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बीडीए ने भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई तेज कर दी। बीडीए ने यह कार्रवाई खडेरा और सेवर कलां क्षेत्र में की, जिससे पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
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बीडीए का कहना है कि किसानों की ओर से अपनी ही भूमि पर बिना अनुमति प्लाटिंग करना अवैध है, क्योंकि यह जमीन लैंड पुलिंग योजना के तहत अधिग्रहित की जानी प्रस्तावित है। वहीं किसान इस योजना का लगातार विरोध कर रहे हैं। सेवर क्षेत्र में लंबे समय से यह विवाद चल रहा है। बीडीए किसानों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहित करना चाहता है, लेकिन किसान इसके लिए तैयार नहीं हैं।
बुधवार को भरतपुर विकास प्राधिकरण पुलिस प्रशासन के साथ इन क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने पहुंचा। बीडीए के अनुसार इन जमीन पर अवैध निर्माण किया गया था और करीब 90 भूखंड चिन्हित किए गए थे। कार्रवाई के दौरान मौका मजिस्ट्रेट मनीष कुमार मीना, तहसीलदार पूर्वी जोन मुकेश कुमार और प्राधिकरण की टीम मौजूद रही। सहायक अभियंता मनोज पाराशर, भू-अभिलेख निरीक्षक ज्ञानसिंह निमेश, दीवान सिंह तथा पटवारी मृत्युजंय मिश्रा, दिगम्बर सिंह और लोकेश शर्मा ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।
90 भूखंडों पर कार्रवाई
दस्ते ने जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध रूप से विकसित कॉलोनियों में करीब 90 भूखंडों पर कार्रवाई की। इसके अलावा कॉलोनियों में बनाए गए ग्रेवल रास्तों को भी खोदकर हटाया गया। प्राधिकरण ने मौके पर मौजूद लोगों को निर्देश दिए कि नियमानुसार भू-उपयोग परिवर्तन कराकर लेआउट स्वीकृत कराएं। बीडीए ने साफ किया कि उसके प्लान के अनुसार नहीं बनने वाली कॉलोनियों को अवैध माना जाएगा और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रदर्शन के बाद रुकी कार्रवाई, कलक्टर का आश्वासन
बीडीए की कार्रवाई का किसानों ने जमकर विरोध किया। बड़ी संख्या में किसान मौके पर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान बबली और उसका पति बनवारी अपनी जमीन बचाने के लिए जेसीबी के आगे आ गए। भीषण गर्मी के कारण दोनों बेहोश हो गए। इसकी सूचना जिला कलक्टर तक पहुंची, जिसके बाद कार्रवाई रुकवाई गई। कलक्टर ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी सहमति के बिना भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा।


