Food Poisoning For Watermelon-Muskmelon: गर्मी में राहत देने वाले तरबूज और खरबूजे अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगे हैं। बाजार में जल्दी पकाने और ज्यादा मुनाफे के लिए फलों में इंजेक्शन, केमिकल और पेस्टीसाइड का इस्तेमाल किया जा रहा है जो फूड पॉइजनिंग का बड़ा कारण बनता जा रहा है। इन जहरीले फलों को खाने के बाद लोगों को उल्टी-दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनके सेवन के बाद लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है।
ऐसे में अगर आप भी बिना जांचे-परखे अगर तरबूज व खरबूजे खा रहे हैं तो आपके लिए महंगा पड़ सकता है। तरबूज और खरबूजे के सेवन से नवलगढ़ कस्बे में एक परिवार के पांच सदस्य बीमार हो गए। जबकि कस्बे के चूणा चौक में एक युवती तरबूज का जूस पीने के बाद बेहोश हो गई।
खरबूजे का जूस पीने से परिवार के ये सदस्य हुए बीमार
नवलगढ़ कस्बे में गर्मी से राहत और सेहत के लिए घर लाए गए तरबूज-खरबूजे एक परिवार के लिए आफत बन गए। शनिवार सुबह साढ़े दस बजे खरबूजे का ज्यूस पीने के करीब दो घंटे बाद वार्ड 36 निवासी श्रीराम शर्मा, इनकी माता सुमित्रा देवी (60), पत्नी ज्योति देवी (35), पुत्री आरोही (11) और प्रियांशी (6) की तबीयत बिगड़ गई। सभी को एक साथ उल्टी-दस्त शुरू हो गए। इसके बाद बाद पड़ोसियों की मदद से उन्हें नवलगढ़ के राजकीय जिला अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। श्रीराम शर्मा ने बताया कि गर्मी से बचने के लिए शनिवार सुबह करीब 10 बजे वह घर के लिए तरबूज और खरबूजा लेकर आए। घर पहुंचकर जब तरबूज काटा।
तरबूज अंदर से सड़ा हुआ निकला तो उसे फेंक दिया गया। इसके बाद बच्चों की इच्छा पर खरबूजे का ज्यूस बनाया गया। पांच सदस्यों ने ज्यूस पी लिया। कुछ देर बाद वह अपने काम से घूमचक्कर चला गया। करीब दो घंटे बाद सबसे पहले इनकी मां सुमित्रा देवी को उल्टी और दस्त शुरू हुए। थोड़ी ही देर में पत्नी और दोनों बेटियों की हालत भी बिगड़ गई। परिवार से सूचना मिलने पर श्रीराम घर लौटने निकला, लेकिन रास्ते में उसे भी उल्टियां शुरू हो गईं। पड़ोसियों ने तत्परता दिखाते हुए सभी को राजकीय जिला अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने देर रात तक उपचार किया। बाद में श्रीराम, उसकी पत्नी और दोनों बेटियों को दवाइयां देकर छुट्टी दे दी गई, जबकि सुमित्रा देवी को रविवार रात तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
तरबजू का ज्यूस पीने से चूणा चौक में एक युवती हुई बेहोश
रविवार शाम करीब सात बजे शहर के चूणा चौक स्थित एक नाई की दुकान पर उस समय अफरा-तफरी मच गई। जब वहां बैठी एक युवती अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी। दुकानदार और आसपास के लोगों ने तुरंत संभाला तथा पास के निजी क्लिनिक से चिकित्सक को बुलाया। प्राथमिक उपचार और पानी के छींटे मारने के करीब 15-20 मिनट बाद युवती को होश आया। युवती ने बताया कि उसने करीब एक घंटे पहले तरबूज का ज्यूस पिया था।
इंजेक्शन, केमिकल और पेस्टीसाइड बन रहे बीमारी की वजह
राजकीय जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संदीप चौधरी बताते हैं कि इन दिनों तरबूज, खरबूजा और आम खाने से फूड पॉइजनिंग के मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि आम को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायन तथा तरबूज-खरबूजे में मिठास और चमक बढ़ाने के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि फलों में मौजूद रसायन पेट में पहुंचते ही आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं, जिससे उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
गुनगुने पानी से ऐसे करें तरबूज की जांच
डॉ. चौधरी ने लोगों को सलाह दी कि गर्मी के मौसम में केवल विश्वसनीय किसान से ही फल खरीदें। उन्होंने बताया कि तरबूज की जांच के लिए उसकी गिरी का छोटा टुकड़ा गुनगुने पानी में डालें। यदि पानी लाल हो जाए तो समझना चाहिए कि उसमें कलरिंग एजेंट या कृत्रिम मिठास का इस्तेमाल किया गया है। वहीं बिना रसायन वाले तरबूज से पानी का रंग नहीं बदलता। उन्होंने लोगों से पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से पके आम और ऑर्गेनिक तरीके से उगाए गए फलों को प्राथमिकता देने की अपील की।
400 किलो तरबूज नष्ट कराए थे, कार्रवाई यहीं तक सिमटी
खाद्य सुरक्षा विभाग ने 21 मई को झुंझुनूं शहर में 400 किलो तरबूज नष्ट कराए थे। विभाग की टीम ने बाजार क्षेत्र में फल-सब्जी विक्रेताओं की जांच की और खराब एवं अस्वास्थ्यकर तरबूज को मौके पर ही नष्ट करवाया। अधिकारियों ने विक्रेताओं को सख्त निर्देश दिए कि वे केवल ताजे और गुणवत्तापूर्ण फल-सब्जियों की ही बिक्री करें। झुंझुनूं शहर में यह कार्रवाई सिमट कर रह गई।
स्थानीय किसानों की भागीदारी कम
जानकारों के अनुसार जिले में तरबूज और खरबूजे की खेती करने वाले स्थानीय किसानों की संख्या बेहद कम है। पिछले कुछ वर्षों में यूपी, एमपी समेत अन्य राज्यों से आए किसान यहां जमीन किराए पर लेकर बड़े स्तर पर इन फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। अधिक मुनाफा कमाने और फलों को जल्दी तैयार करने की होड़ में कई जगहों पर इंजेक्शन, केमिकल और पेस्टीसाइड का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। यही वजह है कि बाजार में पहुंच रहे फल लोगों की सेहत के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।


