जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कई महीनों बाद अपने गृह जिले भरतपुर के दौरे पर हैं, लेकिन अच्छा होता कि वे जयपुर से निकलने से पहले पूरे राजस्थान में दम तोड़ती अपनी फ्लैगशिप ‘मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना’ की जमीनी हकीकत की भी सुध ले लेते। उन्होंने कहा कि पूरे राजस्थान में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की यह योजना प्रशासनिक शिथिलता और बैंकों की मनमानी की भेंट चढ़ चुकी है, जहां महिला अधिकारिता विभाग की ओर से भेजे गए आवेदनों में से 2,546 से अधिक फाइलें बैंकों में धूल फांक रही हैं और प्रदेश के 10 बड़े बैंकों ने तो एक भी महिला को ऋण देने की जहमत नहीं उठाई।
उन्होंने कहा कि एक करोड़ रुपए तक के ऋण के बड़े-बड़े दावों के विपरीत आज महिलाओं को औसतन केवल 10.62 लाख रुपए का ऋण देकर टरकाया जा रहा है, जिससे प्रदेश के 41 में से 23 जिलों में तय लक्ष्य तक पूरा नहीं हो सका।
गहलोत ने कहा कि विडंबना देखिए कि इस बदहाली में खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला भरतपुर पूरे प्रदेश में सबसे आखिरी पायदान पर आ गया है। सरकार केवल कागजी विज्ञापनों और दौरों से बाहर निकलकर तुरंत बैंकों की जवाबदेही तय करे, ताकि स्वरोजगार की राह देख रही प्रदेश की हजारों बेटियों और महिलाओं का भरोसा इस सिस्टम से न उठे।
राजस्थान सरकार महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना संचालित कर रही है। इस योजना के तहत महिला उद्यमियों और समूहों को व्यवसाय शुरू करने एवं विस्तार के लिए ऋण और अनुदान की सुविधा दी जा रही है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
- महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए अब तक की सबसे बड़ी ऋण अनुदान योजना
- व्यक्तिगत महिला उद्यमी अथवां स्वयं सहायता समूह को 50 लाख रुपए तक और समूहों के समूह के रूप में विद्यमान क्लस्टर या फेडरेशन को 1 करोड़ रूपये तक की ऋण सुविधा
- ऋण राशि का 25 प्रतिशत अनुदान, वंचित वर्ग को 30 प्रतिशत तक
- उद्योग, सेवा, व्यापार, डेयरी, कृषि आधारित उद्यम आदि समस्त क्षेत्रों के लिए ऋण सुविधा
- समस्त प्रक्रिया ऑनलाइन और समस्या समाधान के लिए निरंतरबग समन्वय और हेल्पलाईन की सुविधा


