गैंगस्टर के घर पुलिस ने लाइन लगकर तलाशी दी:मंत्री बोले- ये नियम है; सवाल फिर क्यों सस्पेंड किए गए 2 थाना प्रभारी

गैंगस्टर के घर पुलिस ने लाइन लगकर तलाशी दी:मंत्री बोले- ये नियम है; सवाल फिर क्यों सस्पेंड किए गए 2 थाना प्रभारी

2 दिन पहले पटना के मोकामा में गैंगस्टर सोनू-मोनू के घर रेड करने गई पुलिस टीम की तलाशी ली गई थी। इस मामले में 2 थाना प्रभारियों को सस्पेंड किया गया है। इधर, इसे लेकर मंत्री सुनील कुमार ने कहा है कि, जब कोई भी व्यक्ति किसी की तलाशी लेने जाता है, तो पहले उसे खुद की तलाशी देनी होती है ऐसा नियम है। जिस तरीके से इसे दिखाया जा रहै ये वैसी बात नहीं है। सोनू-मोनू के समर्थकों ने ने कहा- तलाशी देनी होगी मोकामा के पंचमहला थाना के नौरंगा गांव में पुलिस गैंगस्टर सोनू-मोनू के घर छापेमारी करने गई थी। सोनू-मोनू के परिजनों और समर्थकों ने पुलिस को घर में घुसने से रोक दिया। उन्होंने पुलिस से सर्च वारंट मांगा। पुलिस ने कहा कि सर्च वारंट जरूरी नहीं है। इसके बाद समर्थकों ने शर्त रखी कि अंदर जाने से पहले पुलिस को अपनी तलाशी देनी होगी। सोनू-मोनू के समर्थकों ने पंचमहला के थानेदार कुंदन कुमार और हथिदह थानेदार रंजन कुमार समेत 8 पुलिसकर्मियों को लाइन में खड़ा किया। उनके शरीर से लेकर पॉकेट तक की तलाशी ली गई। इसके बाद ही उन्हें घर के अंदर जाने दिया गया। इससे पहले पंचमहला थानेदार रंजन कुमार कुख्यात सोनू से मोबाइल का स्पीकर ऑन कर बात कर रहे थे। यह सब सोनू के लोगों के सामने हुआ। समर्थकों ने पुलिस की तलाशी और थानेदार की बातचीत का वीडियो बना लिया। वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। वीडियो वायरल होने से पुलिस की भारी किरकिरी हुई। पुलिस मुख्यालय और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। मामले में एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने कड़ा एक्शन लिया है। उन्होंने दोनों थानेदारों को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है। क्या मिला पुलिस को छापेमारी में सोनू नहीं मिला और उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। हालांकि, मौके से पुराने मामले की दो बाइक बरामद हो गईं। एक महीने पहले नौरंगा दियारा में बालू खनन के दौरान पुलिस ने दो जेसीबी और दो बाइक पकड़ी थीं। लॉक होने के कारण पुलिस ने बाइक वहीं छोड़ दी थीं। सोनू-मोनू के समर्थक इन्हें वहां से उठाकर ले आए थे। क्या था मामला विवाद 22 मई के एक फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ। मुकेश ने पंचायत और थाना प्रभारी की प्रशंसा की थी। पेशे से वकील प्रमोद ने पोस्ट डिलीट करने को कहा। मुकेश ने कहा उसने किसी का नाम नहीं लिखा है। इसी बात पर कहासुनी हुई। मुकेश का आरोप है कि प्रमोद ने अपने कुख्यात बेटों सोनू-मोनू को बुलाकर उस पर फायरिंग करा दी। क्यों गई थी पुलिस मोकामा विधायक अनंत सिंह के करीबी मुकेश कुमार पर शनिवार नौरंगा गांव में चार राउंड फायरिंग हुई। हमले में मुकेश बाल-बाल बचे। इसका आरोप सोनू-मोनू गिरोह पर लगा। इसी कारण पुलिस टीम सोनू-मोनू के घर छापेमारी करने गए थे। मुकेश की पत्नी प्रतिमा नौरंगा जलालपुर की सरपंच हैं। जबकि सोनू-मोनू की मां उर्मिला सिन्हा मुखिया हैं। पुलिस रेड के दौरान क्या है नियम रेड या छापेमारी के दौरान पुलिस के तलाशी लेने के बहुत सख्त और स्पष्ट नियम होते हैं। पुलिस मनमाने तरीके से घर या व्यक्ति की तलाशी नहीं ले सकती है। तलाशी की पूरी प्रक्रिया आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC/BNSS) के तहत तय होती है। बिहार में आब तक कहां पुलिस पर हमला हुआ मोकामा शूटआउट में भी आया था सोनू-मोनू का नाम सोनू-मोनू गैंग पहले भी अनंत सिंह को चुनौती दे चुके हैं। नौरंगा गोलीकांड में अनंत सिंह और दोनों गैंगस्टर भाइयों को जेल भी जाना पड़ा था। 22 जनवरी 2025 की शाम अनंत सिंह के समर्थकों और गैंगस्टर सोनू-मोनू के बीच 100 राउंड फायरिंग हुई थी। ग्रामीणों की माने तो शाम साढ़े 4 बजे अनंत सिंह पहुंचे थे, जिसके बाद गोलियां चलीं। अनंत सिंह का कहना था, ‘सोनू-मोनू से उनके आदमी बात करने गए तो उन्होंने फायरिंग की।’ हालांकि उस गांव वालों ने यह भी कहा था कि अनंत सिंह खुद भी फायरिंग कर रहे थे। आखिर किस विवाद को लेकर हुई थी फायरिंग वो समझिए अनंत सिंह ने बताया, ‘ईंट-भट्‌ठे पर 14 हजार की सैलरी पर काम करने वाले मुंशी मुकेश कुमार के पास सोनू-मोनू बकाया पैसा मांगने पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों ने मुंशी के साथ मारपीट की और उसे घर से बाहर करके ताला लगा दिया था।’ अनंत सिंह पंचायती कराने गए थे। इस दौरान अनंत सिंह के समर्थकों ने सोनू-मोनू से कहा, ‘मुकेश के घर का ताला खोल दो, लेकिन वे नहीं माने।’ इसके बाद अनंत सिंह अगले दिन अपने समर्थकों के साथ फिर से नौरंगा गांव में विवाद सुलझाने पहुंचे। तभी फायरिंग हुई। बाद में अनंत गुट ने भी गोलियां चलाईं। इस मामले में अनंत सिंह को सरेंडर कर बेउर जेल जाना पड़ा था। सोनू ने सरेंडर किया तो उसे फुलवारीशरीफ जेल भेजा गया था। अभी अनंत और सोनू दोनों जमानत पर हैं। सोनू-मोनू पर 8 संगीन केस दर्ज हैं। छोटे सरकार कहे जाते हैं जदयू विधायक अनंत सिंह अनंत सिंह मोकामा से 5वीं बार विधायक बने हैं। वो इस बार जदयू की टिकट पर विधानसभा पहुंचे हैं। मोकामा को अनंत सिंह का गढ़ कहा जाता है। फिलहाल अनंत सिंह दुलारचंद हत्याकांड में बेऊर जेल में बंद हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त दुलारचंद की हत्या हुई थी। इस मामले में अनंत सिंह को पुलिस ने अरेस्ट किया था। 2 दिन पहले पटना के मोकामा में गैंगस्टर सोनू-मोनू के घर रेड करने गई पुलिस टीम की तलाशी ली गई थी। इस मामले में 2 थाना प्रभारियों को सस्पेंड किया गया है। इधर, इसे लेकर मंत्री सुनील कुमार ने कहा है कि, जब कोई भी व्यक्ति किसी की तलाशी लेने जाता है, तो पहले उसे खुद की तलाशी देनी होती है ऐसा नियम है। जिस तरीके से इसे दिखाया जा रहै ये वैसी बात नहीं है। सोनू-मोनू के समर्थकों ने ने कहा- तलाशी देनी होगी मोकामा के पंचमहला थाना के नौरंगा गांव में पुलिस गैंगस्टर सोनू-मोनू के घर छापेमारी करने गई थी। सोनू-मोनू के परिजनों और समर्थकों ने पुलिस को घर में घुसने से रोक दिया। उन्होंने पुलिस से सर्च वारंट मांगा। पुलिस ने कहा कि सर्च वारंट जरूरी नहीं है। इसके बाद समर्थकों ने शर्त रखी कि अंदर जाने से पहले पुलिस को अपनी तलाशी देनी होगी। सोनू-मोनू के समर्थकों ने पंचमहला के थानेदार कुंदन कुमार और हथिदह थानेदार रंजन कुमार समेत 8 पुलिसकर्मियों को लाइन में खड़ा किया। उनके शरीर से लेकर पॉकेट तक की तलाशी ली गई। इसके बाद ही उन्हें घर के अंदर जाने दिया गया। इससे पहले पंचमहला थानेदार रंजन कुमार कुख्यात सोनू से मोबाइल का स्पीकर ऑन कर बात कर रहे थे। यह सब सोनू के लोगों के सामने हुआ। समर्थकों ने पुलिस की तलाशी और थानेदार की बातचीत का वीडियो बना लिया। वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। वीडियो वायरल होने से पुलिस की भारी किरकिरी हुई। पुलिस मुख्यालय और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। मामले में एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने कड़ा एक्शन लिया है। उन्होंने दोनों थानेदारों को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है। क्या मिला पुलिस को छापेमारी में सोनू नहीं मिला और उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। हालांकि, मौके से पुराने मामले की दो बाइक बरामद हो गईं। एक महीने पहले नौरंगा दियारा में बालू खनन के दौरान पुलिस ने दो जेसीबी और दो बाइक पकड़ी थीं। लॉक होने के कारण पुलिस ने बाइक वहीं छोड़ दी थीं। सोनू-मोनू के समर्थक इन्हें वहां से उठाकर ले आए थे। क्या था मामला विवाद 22 मई के एक फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ। मुकेश ने पंचायत और थाना प्रभारी की प्रशंसा की थी। पेशे से वकील प्रमोद ने पोस्ट डिलीट करने को कहा। मुकेश ने कहा उसने किसी का नाम नहीं लिखा है। इसी बात पर कहासुनी हुई। मुकेश का आरोप है कि प्रमोद ने अपने कुख्यात बेटों सोनू-मोनू को बुलाकर उस पर फायरिंग करा दी। क्यों गई थी पुलिस मोकामा विधायक अनंत सिंह के करीबी मुकेश कुमार पर शनिवार नौरंगा गांव में चार राउंड फायरिंग हुई। हमले में मुकेश बाल-बाल बचे। इसका आरोप सोनू-मोनू गिरोह पर लगा। इसी कारण पुलिस टीम सोनू-मोनू के घर छापेमारी करने गए थे। मुकेश की पत्नी प्रतिमा नौरंगा जलालपुर की सरपंच हैं। जबकि सोनू-मोनू की मां उर्मिला सिन्हा मुखिया हैं। पुलिस रेड के दौरान क्या है नियम रेड या छापेमारी के दौरान पुलिस के तलाशी लेने के बहुत सख्त और स्पष्ट नियम होते हैं। पुलिस मनमाने तरीके से घर या व्यक्ति की तलाशी नहीं ले सकती है। तलाशी की पूरी प्रक्रिया आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC/BNSS) के तहत तय होती है। बिहार में आब तक कहां पुलिस पर हमला हुआ मोकामा शूटआउट में भी आया था सोनू-मोनू का नाम सोनू-मोनू गैंग पहले भी अनंत सिंह को चुनौती दे चुके हैं। नौरंगा गोलीकांड में अनंत सिंह और दोनों गैंगस्टर भाइयों को जेल भी जाना पड़ा था। 22 जनवरी 2025 की शाम अनंत सिंह के समर्थकों और गैंगस्टर सोनू-मोनू के बीच 100 राउंड फायरिंग हुई थी। ग्रामीणों की माने तो शाम साढ़े 4 बजे अनंत सिंह पहुंचे थे, जिसके बाद गोलियां चलीं। अनंत सिंह का कहना था, ‘सोनू-मोनू से उनके आदमी बात करने गए तो उन्होंने फायरिंग की।’ हालांकि उस गांव वालों ने यह भी कहा था कि अनंत सिंह खुद भी फायरिंग कर रहे थे। आखिर किस विवाद को लेकर हुई थी फायरिंग वो समझिए अनंत सिंह ने बताया, ‘ईंट-भट्‌ठे पर 14 हजार की सैलरी पर काम करने वाले मुंशी मुकेश कुमार के पास सोनू-मोनू बकाया पैसा मांगने पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों ने मुंशी के साथ मारपीट की और उसे घर से बाहर करके ताला लगा दिया था।’ अनंत सिंह पंचायती कराने गए थे। इस दौरान अनंत सिंह के समर्थकों ने सोनू-मोनू से कहा, ‘मुकेश के घर का ताला खोल दो, लेकिन वे नहीं माने।’ इसके बाद अनंत सिंह अगले दिन अपने समर्थकों के साथ फिर से नौरंगा गांव में विवाद सुलझाने पहुंचे। तभी फायरिंग हुई। बाद में अनंत गुट ने भी गोलियां चलाईं। इस मामले में अनंत सिंह को सरेंडर कर बेउर जेल जाना पड़ा था। सोनू ने सरेंडर किया तो उसे फुलवारीशरीफ जेल भेजा गया था। अभी अनंत और सोनू दोनों जमानत पर हैं। सोनू-मोनू पर 8 संगीन केस दर्ज हैं। छोटे सरकार कहे जाते हैं जदयू विधायक अनंत सिंह अनंत सिंह मोकामा से 5वीं बार विधायक बने हैं। वो इस बार जदयू की टिकट पर विधानसभा पहुंचे हैं। मोकामा को अनंत सिंह का गढ़ कहा जाता है। फिलहाल अनंत सिंह दुलारचंद हत्याकांड में बेऊर जेल में बंद हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त दुलारचंद की हत्या हुई थी। इस मामले में अनंत सिंह को पुलिस ने अरेस्ट किया था।  

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