भागलपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब:गंगा दशहरा पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी; सुरक्षा के लिए गोताखोर और पुलिस मौजूद

भागलपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब:गंगा दशहरा पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी; सुरक्षा के लिए गोताखोर और पुलिस मौजूद

भागलपुर में गंगा दशहरा पर आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालुओं का गंगा घाटों पर जुटना शुरू हो गया था। बरारी, बूढ़ानाथ, आदमपुर समेत शहर के अलग-अलग घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय मां गंगे’ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और युवाओं के साथ-साथ बच्चों में भी पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद दीप, फूल, फल अर्पित कर मां गंगा से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। दूर-दूर से गंगा तट पर पहुंचते हैं भक्त धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं। इसी घटना की स्मृति में गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और मां गंगा की आराधना करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है। व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालु दूर-दूर से गंगा तट पर पहुंचकर स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पर्व को लेकर घाटों पर विशेष साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में आवश्यक इंतजाम किए गए थे। घाटों पर गोताखोरों की तैनाती की गई थी। पुलिसकर्मी भी लगातार निगरानी करते नजर आए। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। मां गंगा से परिवार की खुशहाली की कामना श्रद्धालु संजीव मंडल ने बताया कि गंगा दशहरा का पर्व सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। गंगा में स्नान करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां गंगा से परिवार की खुशहाली, समाज में शांति और देश की उन्नति की प्रार्थना करते हैं। भागलपुर में गंगा दशहरा पर आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालुओं का गंगा घाटों पर जुटना शुरू हो गया था। बरारी, बूढ़ानाथ, आदमपुर समेत शहर के अलग-अलग घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय मां गंगे’ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और युवाओं के साथ-साथ बच्चों में भी पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद दीप, फूल, फल अर्पित कर मां गंगा से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। दूर-दूर से गंगा तट पर पहुंचते हैं भक्त धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं। इसी घटना की स्मृति में गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और मां गंगा की आराधना करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है। व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालु दूर-दूर से गंगा तट पर पहुंचकर स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पर्व को लेकर घाटों पर विशेष साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में आवश्यक इंतजाम किए गए थे। घाटों पर गोताखोरों की तैनाती की गई थी। पुलिसकर्मी भी लगातार निगरानी करते नजर आए। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। मां गंगा से परिवार की खुशहाली की कामना श्रद्धालु संजीव मंडल ने बताया कि गंगा दशहरा का पर्व सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। गंगा में स्नान करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां गंगा से परिवार की खुशहाली, समाज में शांति और देश की उन्नति की प्रार्थना करते हैं।  

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