Union Carbide Campus : गैस त्रासदी के दाग से भोपाल की आवाम को छुटकारा दिलाने में इसका चौथा दशक खास रहा। पहले तो शहर को उस जहरीले कचरे से निजात मिली अब यूनियन कार्बाइड परिसर को नया रूप मिलने की उम्मीद जागी है। ये परिसर स्मारक बनेगा और यूनियन कार्बाइड परिसर के 67 एकड़ में डेढ़ लाख पौधे लगाए जाएंगे। यहां उपवन बनेगा,
जो शहर को नई सांसें देगा।
दरअसल, परिसर से जहरीला कचरा उठने के बाद पत्रिका ने विशेषज्ञों के विमर्श से इसे स्मारक के रूप में विकसित करने की मुहिम छेड़ी थी। पत्रिका के साथ शहर के हर कोने से आवाज बुलंद हुई। साइंटिस्ट, शिक्षाविद् से लेकर समाजसेवियों और गैस पीडि़तों ने आंदोलन का रूप दे दिया। जनआवाज का सम्मान करते हुए सीएम डॉ मोहन यादव ने यूनियन कार्बाइड परिसर का दौरा किया। गैस कांड की बरसी पर इसे नया रूप देने की घोषणा हुई।
41 साल पुराने दाग से आजादी…
दुनिया की सबसे भीषणतम औद्योगिक त्रासदी में दर्ज भोपाल गैस कांड 41 साल पहले 2 और 3 दिसंबर 1984 को हुआ था। अनुमान है कि, 20 हजार लोग हादसे में मारे गए। 6 लाख प्रभावित हुए। चार दशक पुराने लंबित मामलों के लिए दो आयोग के प्रस्ताव तैयार हुए, जिसमें एक्सपर्ट होंगे। प्रस्ताव संगठनों ने बनाए हैं, काम सरकार को करना है।
जहरीली जमीन पर सांसों की फसल, पर्यावरण सुधार से पर्यटन तक पहचान
-बनेगा ऑक्सीजोन: 1.5 लाख पेड़ों से शुद्ध ऑक्सीजन मिलेगी, जिससे सांस की बीमारियों में कमी आएगी।
-राहत: यह स्थान त्रासदी के ‘ट्रॉमा’ को भुलाकर शांति और नई उम्मीद का प्रतीक बनेगा।
-पर्यावरण शुद्धीकरण: विशिष्ट पौधे मिट्टी और भूजल से जहरीले तत्वों को सोखकर उसे साफ करेंगे।
-क्लाइमेट: 67 एकड़ की हरियाली शहर के बढ़ते तापमान को कम करने में मदद करेगी।
-औद्योगिक समाधान: 360 टन कचरे के निपटान के बाद अब शेष मलबे का वैज्ञानिक उपचार होगा।
-शहर की पहचान ग्लोबल इमेज: भोपाल की पहचान ‘त्रासदी के शहर’ से बदलकर हिरोशिमा की तर्ज पर ‘पीस मेमोरियल’ की बनेगी।
-टूरिज्म: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईकोटूरिज्म और शोध का प्रमुख केंद्र बनेगा।
हरियाली और ऑक्सीजन जोन बनाने की सराहनीय पहल

-घावों पर मरहम बनेगी पहल
पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे का कहना है कि, शहर के बीच पर्यावरण सुधार के लिए स्टडी में भूजल खराब मिला। यूका परिसर में पेड़ और पौधों की कई प्रजातियां सुझाई गई। ये भूमि का जहरीलापन कम करते हैं। शहर को हरियाली और ऑक्सीजन जोन बनाने की पहल घावों पर मरहम बनेगी।
-साइंटिफिक ट्रीटमेंट होना जरूरी
भोपाल ग्रुप ऑफ इनफॉरमेंशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने कहा कि, यूनियन कार्बाइड के आसपास शहर का सबसे जहरीला क्षेत्र है। यहां जांच नहीं हुई। यूका से 336 मीट्रिक टन जहर साफ होने के बाद जांच की जाए तो सुधार हो सकता है। ये शहर में प्रदूषण का मुख्य सोर्स है। साइंटिफिक ट्रीटमेंट होना जरूरी है। दो आयोग बने तो सुधार हो सकता है। इसके प्रस्ताव हैं।
-नया रूप दुनिया में भोपाल को पहचान देगा
सिटीजन वेलफेयर फोरम के सचिव मोहम्मद आफाक ने कहा कि, गैस कांड भोपाल के लिए दाग है। यूनियन कार्बाइड कारखाना जहां हादसा हुआ उसे नया रूप मिले तो यह दुनिया में भोपाल के लिए पहचान देगा। हिरोशिमा और नागाशाकी की तर्ज पर काम हो तो सुधार मुमकिन।
-शेष कचरे की जांच होनी चाहिए
गैस पीड़ित संगठन के बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि, यूनियन कार्बाइड के कचरे की जिम्मेदारी उस कंपनी को दी जाए जिसने यहां जहर फैलाया था। भोपाल की जमीन में अभी यूनियन कार्बाइड का काफी कचरा है। उसकी जांच की जानी चाहिए।


