Rohingya और Bangladeshi Infiltrators के खिलाफ Suvendu Adhikari का सख्त एक्शन, विदेशियों को रखने के लिए सभी 23 जिलों में बनेंगे Holding Centres

Rohingya और Bangladeshi Infiltrators के खिलाफ Suvendu Adhikari का सख्त एक्शन, विदेशियों को रखने के लिए सभी 23 जिलों में बनेंगे Holding Centres
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अब पूरी तरह सख्त रुख अपना लिया है। राज्य के सभी 23 जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने का आदेश जारी करते हुए सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि बंगाल अब अवैध बांग्लादेशी, रोहिंग्या और दूसरे विदेशी घुसपैठियों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी की “पहचान करो, सूची से हटाओ और देश से बाहर भेजो” नीति के तहत पकड़े गए अवैध घुसपैठियों को हिरासत में लेकर निर्वासन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार ने चेतावनी दी है कि जो लोग अवैध रूप से बंगाल में रह रहे हैं और नागरिकता कानून के दायरे में नहीं आते, उन्हें किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा तथा कानून के अनुसार वापस भेजा जाएगा।
हम आपको बता दें कि राज्य के गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी, रोहिंग्या तथा अन्य विदेशी नागरिकों और जेल से रिहा किए गए विदेशी कैदियों को निर्वासन तक रखने के लिए विशेष होल्डिंग सेंटर बनाए जाएं। यह कदम केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की उस गाइडलाइन के तहत उठाया गया है जिसमें राज्यों को अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान, सत्यापन और निर्वासन की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया था।

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राज्य सरकार का यह निर्णय मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी के उस बयान के कुछ ही दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार अवैध घुसपैठियों के खिलाफ “पहचान करो, सूची से हटाओ और देश से बाहर भेजो” की नीति पर काम करेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा। राज्य पुलिस ऐसे लोगों को हिरासत में लेकर सीमा सुरक्षा बल को सौंपेगी और सीमा सुरक्षा बल बांग्लादेश सीमा रक्षक बल से संपर्क कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी करेगा।
राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर बनाना आवश्यक है ताकि पकड़े गए विदेशी नागरिकों और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे विदेशी कैदियों को वहां रखा जा सके। इन केंद्रों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों को अधिकतम तीस दिन तक रखा जा सकेगा। इस दौरान उनकी नागरिकता, दस्तावेज और पहचान की जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार अंतिम निर्णय जिलाधिकारी या समकक्ष अधिकारी के स्तर पर लिया जाएगा।
हम आपको याद दिला दें कि पिछले वर्ष मई में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे बांग्लादेश और म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों, विशेषकर रोहिंग्या समुदाय के लोगों की पहचान कर तीस दिनों के भीतर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करें। इसके साथ ही जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर बनाने और बायोमेट्रिक आंकड़े दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए थे ताकि निर्वासन की प्रक्रिया तेज हो सके। हालांकि उस समय ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने से इंकार कर दिया था। तृणमूल कांग्रेस का आरोप था कि यह राष्ट्रीय नागरिक पंजी और नागरिकता संशोधन कानून का विस्तार है तथा इसके जरिए भारतीय नागरिकों की नागरिकता पर सवाल खड़े किए जा सकते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि जब तक उनकी सरकार सत्ता में है तब तक किसी को भी डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सीमा पर निगरानी की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल की है और केंद्र सरकार राजनीतिक लाभ के लिए घुसपैठ के मुद्दे को बढ़ा चढ़ाकर पेश कर रही है। इस वर्ष जनवरी में उन्होंने यहां तक कहा था कि सीमा सुरक्षा बल की ढिलाई के कारण बांग्लादेश से अवैध प्रवेश हो रहा है।
हम आपको याद दिला दें कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान अवैध घुसपैठ को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था। पार्टी ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर बांग्लादेश सीमा की घेराबंदी पूरी की जाएगी और अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लगभग 2216 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जिसमें करीब 550 किलोमीटर हिस्सा अब भी बिना बाड़ के है। हाल ही में राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को 27 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाने के लिए जमीन भी उपलब्ध कराई है।
हम आपको यह भी बता दें कि राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में विदेशी नागरिक अधिनियम और विदेशी पंजीकरण अधिनियम के तहत नौ सौ पांच लोगों को हिरासत में रखा गया था। इससे पहले की रिपोर्ट के अनुसार राज्य की जेलों में बंद कुल कैदियों में लगभग नौ प्रतिशत विदेशी नागरिक थे। इनमें सबसे बड़ी संख्या बांग्लादेशी नागरिकों की थी। सात सौ अठहत्तर दोषी कैदी और चौदह सौ चालीस विचाराधीन कैदी बांग्लादेशी बताए गए थे।
हम आपको यह भी बता दें कि पश्चिम बंगाल सरकार की इस नीति की तुलना अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस नीति से भी की जा रही है जिसमें उन्होंने अवैध प्रवासियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर निर्वासन अभियान चलाने का वादा किया था। अमेरिका में भी अवैध प्रवासियों को हिरासत केंद्रों में रखने और कठोर आव्रजन नीति को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। हालांकि बंगाल सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस भेजना है।
बहरहाल, यह कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर जिस तरह कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है, उससे यह संदेश साफ चला गया है कि अब पश्चिम बंगाल में कानून से ऊपर कोई नहीं है। लंबे समय से सीमा पार से हो रही घुसपैठ को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार की यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को भी अब समझ लेना चाहिए कि बंगाल में अवैध तरीके से रहने के दिन खत्म हो चुके हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि जो भी व्यक्ति बिना वैध दस्तावेज के राज्य में पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी और उसे हर हाल में वापस भेजा जाएगा।

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