‘एआई समिट में टेक्नोलॉजी से ज्यादा राजनीतिक माहौल दिखाई दिया, पर हमें नेताओं के भाषण से कुछ सीखने को नहीं मिला, क्योंकि वे लोग क्या जाने कि AI क्या होता है? वे लोग तो पढ़ाई से कोशों दूर रहते हैं। जब कोई एआई फाउंडर या टेक्नोलॉजी स्पीकर मंच पर आता था तो उसे बहुत कम समय में अपनी बात खत्म करने के लिए कहा जाता था, जबकि नेताओं और मंत्रियों के लंबे राजनीतिक भाषण चलते रहे। फेक आईडी से 15 हजार में बिक रहे थे टिकट, जबकि प्रोग्राम में फ्री एंट्री थी।’ ये बातें बिहार एआई समिट में पहुंचे युवाओं ने कही हैं।
बिहार एआई समिट की कैसी रही व्यवस्था, कार्यक्रम कितना हुआ सफल, छात्रों को कितना हुआ लाभ, युवाओं की प्रतिक्रिया सिलसिलेवार पढ़ें… कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें… बिहार एआई समिट का कैसा रहा माहौल पटना में पहली बार ‘बिहार एआई समिट’ हुआ। आईटी विभाग ने दावा किया था समिट में देश-विदेश के 50 से अधिक एआई एक्सपर्ट्स, स्टार्टअप फाउंडर्स और टेक्नोलॉजी स्पीकर्स हिस्सा लेंगे, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर एआई से ज्यादा राजनीति दिखी। बिहार सरकार के मंत्रियों-नेताओं के बड़े पोस्टर थे, पर एआई स्पीकर्स-टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कई प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें यह तक पता नहीं चल पाया कि कार्यक्रम में कौन-कौन स्पीकर्स आने वाले हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, फेक वेबसाइटों से टिकट बिक्री, एंट्री में अव्यवस्था और घंटों बाहर इंतजार पर लोगों में नाराजगी दिखी। कुछ लोगों को कार्ड और वेरिफिकेशन होने के बावजूद अंदर प्रवेश नहीं मिला।
बिहार सरकार AI को कैसे इस्तेमाल करेगी लोगों को बताना चाहिए था रोहित राय कहते हैं रजिस्ट्रेशन-वेरिफिकेशन होने के बाद भी लोगों को काफी लंबे समय तक बाहर रखा गया। फेक और मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर पैसे लिए गए। अनजाने में भुगतान भी कर दिया था। स्लिप दिखाकर बाहर खड़ा रखा गया। शुरुआत में ही बता दिया जाता कि अंदर जगह नहीं है, एक-दो घंटे बाद बुलाया जाएगा, तो लोग इतनी भीड़ में परेशान नहीं होते, लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था या सूचना नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह मंच राजनीति का नहीं, बल्कि AI और टेक्नोलॉजी का होना चाहिए था। बिहार सरकार AI को कैसे इस्तेमाल करेगी, उसकी स्पष्ट नीति क्या है, यह लोगों को बताया जाना चाहिए था। उदाहरण के लिए AI का उपयोग हेल्थ डिपार्टमेंट, एजुकेशन, लॉ एंड ऑर्डर, ट्रैफिक कंट्रोल, सीवेज सिस्टम और अन्य सरकारी विभागों में किस तरह किया जाएगा, इस पर चर्चा होनी चाहिए थी। पहले युवाओं को स्किल्ड बनाना होगा रोहित राय ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण सवाल रोजगार का है। AI के कारण बिहार में कितने नए रोजगार होंगे, कितने निवेश आएंगे और कौन-कौन सी कंपनियां बिहार में काम शुरू करेंगी इस पर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। अगर सरकार AI के जरिए कई विभागों में बदलाव लाएगी, तो यह भी बताना ज़रूरी है कि पहले से बेरोजगारी झेल रहे युवाओं के लिए नए अवसर कैसे तैयार होंगे। सिर्फ यह कह देना कि नई नौकरियां होंगी ये काफी नहीं है। पहले बिहार के युवाओं को स्किल्ड और तैयार बनाना होगा। अभी तक ऐसा कोई बड़ा कोर्स, डिप्लोमा या ट्रेनिंग प्रोग्राम देखने को नहीं मिला जो 10वीं-12वीं या ग्रेजुएट छात्रों को AI के क्षेत्र में प्रशिक्षित करे। सरकार को पहले शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए, फिर बड़े स्तर पर AI इम्प्लीमेंटेशन की बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई स्पीकर्स ने अच्छी और प्रेरणादायक बातें कहीं। बिहार के विकास, अर्बन डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी की संभावनाओं पर चर्चा हुई, लेकिन अच्छी बातें कहना और उन्हें जमीन पर लागू करना दोनों अलग बातें हैं। बिहार में लंबे समय से बड़े-बड़े वादे होते आए हैं, लेकिन उनका वास्तविक क्रियान्वयन अक्सर दिखाई नहीं देता।
रोडमैप साफ होना चाहिए रोहित राय ने कहा कि बिहार औद्योगीकरण में अब तक पीछे रहा है। शायद अब समय आ गया है कि राज्य AI और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़े। अच्छी बात यह है कि AI सेक्टर में पारंपरिक उद्योगों जितना भारी निवेश नहीं चाहिए। 200–500 करोड़ के निवेश में भी डेटा सेंटर जैसे बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं, जो रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। 600 किलोमीटर दूर से आए, लेकिन अंदर जाने नहीं दिया संदीप ने बताया कि मैं 600 किलोमीटर से सिर्फ एआई समिट में शामिल होने के लिए आया हूं। मैं बिहार का रहने वाला हूं, लेकिन मेरा कॉलेज यूपी में है। हमने इस कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन भी कराया था और यहां पहुंचने के बाद भी कार्ड बना, लेकिन मुझे अंदर जाने नहीं दिया गया। बहुत कोशिश करने के बाद शाम में एंट्री दी गई। यहां जितने भी स्टार्टअप वाले आए हैं, वह सब अपने प्रोडक्ट का प्रमोशन कर रहे हैं। मुझे लगता है कि इसके पहले AI के बारे में लोगों को एजुकेट करना जरूरी है। सरकार को बताना चाहिए कि AI क्या होता है? पहले AI से रिलेटेड कोई कोर्स बना दे, पेड या फ्री कोई भी कोर्स करवाए। जिससे पहले हम सीखें फिर जाकर लोगों को बताएं। कार्यक्रम में नेताओं के भाषण ज्यादा थे और माहौल किसी राजनीतिक रैली जैसा लग रहा था। हमारे मुख्यमंत्री ने भी कल कहा था कि “गमछे वाले गुंडे को भगा देंगे।” यह सुनकर हमें अच्छा नहीं लगा क्योंकि यह AI समिट है।
अच्छे कॉलेज होंगे तभी बिहार डेवलप करेगा वरुण कुमार ने बताया कि मैं बिहार का रहने वाला हूं और मध्य प्रदेश में रहकर पढ़ाई करता हूं। यहां AI समिट कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ में अच्छे कॉलेज भी होने चाहिए, ताकि हमें बाहर जाकर नहीं पढ़ाई करना पड़े। तभी तो बिहार डेवलप होगा। मैं देखना आया हूं कि बिहार में पहली बार यह कार्यक्रम हो रहा है तो उसमें क्या सिखाया जा रहा है। बिहार में अभी लोगों को यह नहीं सिखाया जा रहा है कि आने वाले समय में AI कितना महत्वपूर्ण रोल निभाएगा। बिहार सरकार को चाहिए कि हर गांव में जाकर प्रचार के जरिए लोगों को AI के बारे में जानकारी दे। AI का इवेंट करा रहे हैं तो AI की ही बातचीत करनी चाहिए थी रक्षित रंजन ने कहा कि इस मंच पर मुझे कुछ AI और प्रोग्रामिंग से रिलेटेड लोगों से मिलने का मौका मिला, लेकिन जिस ऑफिशियल वेबसाइट से हमने रजिस्ट्रेशन किया, उसके अलावा भी कई सारे फेक वेबसाइट बनाए गए थे। सभी के नाम भी सिमिलर थे। दूसरे वेबसाइट पर 15 या 20 हजार रुपए के टिकट मिल रहे थे। जबकि मैंने इंस्टाग्राम पेज पर देखा था कि इस कार्यक्रम के लिए हम फ्री में रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। सरकार को फेक वेबसाइट के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। हमारे भारत को अपना AI मॉडल चाहिए। हम Chat GPT जैसे प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करते हैं तो हमारा डेटा दूसरे देशों में जाता है। इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी।
नेताओं के भाषण से कुछ सीखने को नहीं मिला आनंद प्रकाश ने कहा कि मैं जब कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन करा रहा था तब दो-दो वेबसाइट सामने आ रही थीं। मैंने दो बार पेमेंट कर दिया। करीब ₹200 देकर रजिस्ट्रेशन कराया। इसमें बहुत कंफ्यूजन था कि किसमें पेमेंट करना है और ईमेल पर कुछ भी नहीं आ रहा था। समिट के पहले दिन इतना गैदरिंग हो गया कि मैं बाहर ही खड़ा रहा, मुझे अंदर भी नहीं आने दिया गया। यहां नेताओं ने भाषण दिया, उससे कुछ सीखने को नहीं मिला, क्योंकि वह लोग क्या जाने कि AI क्या होता है? वह लोग तो पढ़ाई से कोशों दूर रहते हैं। उन्हें सिर्फ पॉलिटिक्स पता होता है।
बुक माय शो पर फिल्म की तरह टिकट बिक रहे थे मधुबनी से आए कुलजीत कुमार ने बताया कि जब मैंने AI समिट के लिए वेबसाइट पर सर्च किया तो देखा कि बुक माय शो पर टिकट मिल रहा था। जैसे हम फिल्म का टिकट बुक करते हैं वैसे ही इसका भी टिकट बुक कर लिया। जिसमें सिल्वर, जनरल और प्लैटिनम अलग-अलग तरह के टिकट्स उपलब्ध थे और अलग-अलग सुविधाएं भी लिखी गई थीं। एक टिकट 10 हजार रुपए के करीब था, लेकिन मैंने जनरल वाला लिया जो 540 रुपए का मिला। क्योंकि मुझे देखना था कि इस कार्यक्रम में क्या हो रहा है। यहां आकर देखा कि सब फ्री में एंट्री ले रहे हैं। ‘एआई समिट में टेक्नोलॉजी से ज्यादा राजनीतिक माहौल दिखाई दिया, पर हमें नेताओं के भाषण से कुछ सीखने को नहीं मिला, क्योंकि वे लोग क्या जाने कि AI क्या होता है? वे लोग तो पढ़ाई से कोशों दूर रहते हैं। जब कोई एआई फाउंडर या टेक्नोलॉजी स्पीकर मंच पर आता था तो उसे बहुत कम समय में अपनी बात खत्म करने के लिए कहा जाता था, जबकि नेताओं और मंत्रियों के लंबे राजनीतिक भाषण चलते रहे। फेक आईडी से 15 हजार में बिक रहे थे टिकट, जबकि प्रोग्राम में फ्री एंट्री थी।’ ये बातें बिहार एआई समिट में पहुंचे युवाओं ने कही हैं।
बिहार एआई समिट की कैसी रही व्यवस्था, कार्यक्रम कितना हुआ सफल, छात्रों को कितना हुआ लाभ, युवाओं की प्रतिक्रिया सिलसिलेवार पढ़ें… कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें… बिहार एआई समिट का कैसा रहा माहौल पटना में पहली बार ‘बिहार एआई समिट’ हुआ। आईटी विभाग ने दावा किया था समिट में देश-विदेश के 50 से अधिक एआई एक्सपर्ट्स, स्टार्टअप फाउंडर्स और टेक्नोलॉजी स्पीकर्स हिस्सा लेंगे, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर एआई से ज्यादा राजनीति दिखी। बिहार सरकार के मंत्रियों-नेताओं के बड़े पोस्टर थे, पर एआई स्पीकर्स-टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कई प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें यह तक पता नहीं चल पाया कि कार्यक्रम में कौन-कौन स्पीकर्स आने वाले हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, फेक वेबसाइटों से टिकट बिक्री, एंट्री में अव्यवस्था और घंटों बाहर इंतजार पर लोगों में नाराजगी दिखी। कुछ लोगों को कार्ड और वेरिफिकेशन होने के बावजूद अंदर प्रवेश नहीं मिला।
बिहार सरकार AI को कैसे इस्तेमाल करेगी लोगों को बताना चाहिए था रोहित राय कहते हैं रजिस्ट्रेशन-वेरिफिकेशन होने के बाद भी लोगों को काफी लंबे समय तक बाहर रखा गया। फेक और मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर पैसे लिए गए। अनजाने में भुगतान भी कर दिया था। स्लिप दिखाकर बाहर खड़ा रखा गया। शुरुआत में ही बता दिया जाता कि अंदर जगह नहीं है, एक-दो घंटे बाद बुलाया जाएगा, तो लोग इतनी भीड़ में परेशान नहीं होते, लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था या सूचना नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह मंच राजनीति का नहीं, बल्कि AI और टेक्नोलॉजी का होना चाहिए था। बिहार सरकार AI को कैसे इस्तेमाल करेगी, उसकी स्पष्ट नीति क्या है, यह लोगों को बताया जाना चाहिए था। उदाहरण के लिए AI का उपयोग हेल्थ डिपार्टमेंट, एजुकेशन, लॉ एंड ऑर्डर, ट्रैफिक कंट्रोल, सीवेज सिस्टम और अन्य सरकारी विभागों में किस तरह किया जाएगा, इस पर चर्चा होनी चाहिए थी। पहले युवाओं को स्किल्ड बनाना होगा रोहित राय ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण सवाल रोजगार का है। AI के कारण बिहार में कितने नए रोजगार होंगे, कितने निवेश आएंगे और कौन-कौन सी कंपनियां बिहार में काम शुरू करेंगी इस पर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। अगर सरकार AI के जरिए कई विभागों में बदलाव लाएगी, तो यह भी बताना ज़रूरी है कि पहले से बेरोजगारी झेल रहे युवाओं के लिए नए अवसर कैसे तैयार होंगे। सिर्फ यह कह देना कि नई नौकरियां होंगी ये काफी नहीं है। पहले बिहार के युवाओं को स्किल्ड और तैयार बनाना होगा। अभी तक ऐसा कोई बड़ा कोर्स, डिप्लोमा या ट्रेनिंग प्रोग्राम देखने को नहीं मिला जो 10वीं-12वीं या ग्रेजुएट छात्रों को AI के क्षेत्र में प्रशिक्षित करे। सरकार को पहले शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए, फिर बड़े स्तर पर AI इम्प्लीमेंटेशन की बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई स्पीकर्स ने अच्छी और प्रेरणादायक बातें कहीं। बिहार के विकास, अर्बन डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी की संभावनाओं पर चर्चा हुई, लेकिन अच्छी बातें कहना और उन्हें जमीन पर लागू करना दोनों अलग बातें हैं। बिहार में लंबे समय से बड़े-बड़े वादे होते आए हैं, लेकिन उनका वास्तविक क्रियान्वयन अक्सर दिखाई नहीं देता।
रोडमैप साफ होना चाहिए रोहित राय ने कहा कि बिहार औद्योगीकरण में अब तक पीछे रहा है। शायद अब समय आ गया है कि राज्य AI और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़े। अच्छी बात यह है कि AI सेक्टर में पारंपरिक उद्योगों जितना भारी निवेश नहीं चाहिए। 200–500 करोड़ के निवेश में भी डेटा सेंटर जैसे बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं, जो रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। 600 किलोमीटर दूर से आए, लेकिन अंदर जाने नहीं दिया संदीप ने बताया कि मैं 600 किलोमीटर से सिर्फ एआई समिट में शामिल होने के लिए आया हूं। मैं बिहार का रहने वाला हूं, लेकिन मेरा कॉलेज यूपी में है। हमने इस कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन भी कराया था और यहां पहुंचने के बाद भी कार्ड बना, लेकिन मुझे अंदर जाने नहीं दिया गया। बहुत कोशिश करने के बाद शाम में एंट्री दी गई। यहां जितने भी स्टार्टअप वाले आए हैं, वह सब अपने प्रोडक्ट का प्रमोशन कर रहे हैं। मुझे लगता है कि इसके पहले AI के बारे में लोगों को एजुकेट करना जरूरी है। सरकार को बताना चाहिए कि AI क्या होता है? पहले AI से रिलेटेड कोई कोर्स बना दे, पेड या फ्री कोई भी कोर्स करवाए। जिससे पहले हम सीखें फिर जाकर लोगों को बताएं। कार्यक्रम में नेताओं के भाषण ज्यादा थे और माहौल किसी राजनीतिक रैली जैसा लग रहा था। हमारे मुख्यमंत्री ने भी कल कहा था कि “गमछे वाले गुंडे को भगा देंगे।” यह सुनकर हमें अच्छा नहीं लगा क्योंकि यह AI समिट है।
अच्छे कॉलेज होंगे तभी बिहार डेवलप करेगा वरुण कुमार ने बताया कि मैं बिहार का रहने वाला हूं और मध्य प्रदेश में रहकर पढ़ाई करता हूं। यहां AI समिट कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ में अच्छे कॉलेज भी होने चाहिए, ताकि हमें बाहर जाकर नहीं पढ़ाई करना पड़े। तभी तो बिहार डेवलप होगा। मैं देखना आया हूं कि बिहार में पहली बार यह कार्यक्रम हो रहा है तो उसमें क्या सिखाया जा रहा है। बिहार में अभी लोगों को यह नहीं सिखाया जा रहा है कि आने वाले समय में AI कितना महत्वपूर्ण रोल निभाएगा। बिहार सरकार को चाहिए कि हर गांव में जाकर प्रचार के जरिए लोगों को AI के बारे में जानकारी दे। AI का इवेंट करा रहे हैं तो AI की ही बातचीत करनी चाहिए थी रक्षित रंजन ने कहा कि इस मंच पर मुझे कुछ AI और प्रोग्रामिंग से रिलेटेड लोगों से मिलने का मौका मिला, लेकिन जिस ऑफिशियल वेबसाइट से हमने रजिस्ट्रेशन किया, उसके अलावा भी कई सारे फेक वेबसाइट बनाए गए थे। सभी के नाम भी सिमिलर थे। दूसरे वेबसाइट पर 15 या 20 हजार रुपए के टिकट मिल रहे थे। जबकि मैंने इंस्टाग्राम पेज पर देखा था कि इस कार्यक्रम के लिए हम फ्री में रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। सरकार को फेक वेबसाइट के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। हमारे भारत को अपना AI मॉडल चाहिए। हम Chat GPT जैसे प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करते हैं तो हमारा डेटा दूसरे देशों में जाता है। इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी।
नेताओं के भाषण से कुछ सीखने को नहीं मिला आनंद प्रकाश ने कहा कि मैं जब कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन करा रहा था तब दो-दो वेबसाइट सामने आ रही थीं। मैंने दो बार पेमेंट कर दिया। करीब ₹200 देकर रजिस्ट्रेशन कराया। इसमें बहुत कंफ्यूजन था कि किसमें पेमेंट करना है और ईमेल पर कुछ भी नहीं आ रहा था। समिट के पहले दिन इतना गैदरिंग हो गया कि मैं बाहर ही खड़ा रहा, मुझे अंदर भी नहीं आने दिया गया। यहां नेताओं ने भाषण दिया, उससे कुछ सीखने को नहीं मिला, क्योंकि वह लोग क्या जाने कि AI क्या होता है? वह लोग तो पढ़ाई से कोशों दूर रहते हैं। उन्हें सिर्फ पॉलिटिक्स पता होता है।
बुक माय शो पर फिल्म की तरह टिकट बिक रहे थे मधुबनी से आए कुलजीत कुमार ने बताया कि जब मैंने AI समिट के लिए वेबसाइट पर सर्च किया तो देखा कि बुक माय शो पर टिकट मिल रहा था। जैसे हम फिल्म का टिकट बुक करते हैं वैसे ही इसका भी टिकट बुक कर लिया। जिसमें सिल्वर, जनरल और प्लैटिनम अलग-अलग तरह के टिकट्स उपलब्ध थे और अलग-अलग सुविधाएं भी लिखी गई थीं। एक टिकट 10 हजार रुपए के करीब था, लेकिन मैंने जनरल वाला लिया जो 540 रुपए का मिला। क्योंकि मुझे देखना था कि इस कार्यक्रम में क्या हो रहा है। यहां आकर देखा कि सब फ्री में एंट्री ले रहे हैं।


