जनगणना के तहत स्वगणना का काम पूरा हो चुका है और अब जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षक भवनों की गणना में जुटे हैं। चिलचिलाती धूप में गांव की पगडंडियों और शहर की सड़कों पर घूमकर नजरी-नक्शा बना रहे हैं। लेकिन इनमें कई ऐसे शिक्षक हैं, जो दोहरी जिम्मेदारी से कराहते नजर आ रहे हैं। जनगणना के साथ उनपर त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की मतदाता सूची के तीसरी बार सत्यापन का दबाव भी है। एक ओर जनगणना का काम जल्दी पूरा करने का दबाव है तो दूसरी ओर निर्वाचन कार्यालय 28 मई तक सत्यापन पूरा करने को कह रहा है। भीषण गर्मी में इस दोहरी जिम्मेदारी ने उन्हें परेशान कर दिया है। 22 मई से जिले में मकानों की गणना का काम किया जा रहा है। लेकिन जो बातें ट्रेनिंग में बताई गई थीं, उससे धरातल पर अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। हाउस लिस्टिंग ब्लाक (HLB) से कहीं भिन्न स्थितियां धरातल पर हैं, जिससे प्रगणक पसीने से तर-बतर होकर लोकेशन ढूंढने में लगे हैं। इधर निर्वाचन कार्यालय की ओर से त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की संभावित डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची भी थमा दी गई है। बतौर बीएलओ उन्हें यह भी काम करना है। इस सूची में सभी मतदाताओं के सामने उनके आधार नंबर फीड करने हैं। जबकि इससे पहले दो बार यही काम बीएलओ कर चुके हैं। कहीं ट्यूबवेल तो कहीं सुअरबाड़ा है पहला मकान आमतौर पर गांवों में जिस दिशा से नजरी नक्शा बनाना है, वह गांव के बाहर है। प्रगणक पहले खेतों में पहुंचे और पहले मकान के रूप में वहां ट्यूबवेल मिला। उसके बाद सुअरबाड़ा। उसपर भी भवन संख्या दर्ज करना है। उसके बाद काफी दूरी तक खेती और बाग पार करते हुए आबादी तक पहुंचे।
तेज धूप होने के कारण गांव के लोग भी बाहर नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में पता पूछना भी आसान नहीं है। कई ऐसे घर मिल रहे हैं, जहां केवल महिलाएं हैं, वे बात करने से मना कर रही हैं। उनका कहना है कि घर के पुरुष मेंबर जब आएंगे तो आइएगा। उन्हें समझाने में प्रगणकों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। जानकारी देने में भी घबरा रहे लोग प्रगणकों को अपने घर के बारे में जानकारी देने में भी लोग घबरा रहे हैं। कार, बाइक, मार्बल, टाइल्स आदि की जानकारी देने से पहले हिचकिचा रहे हैं। उन्हें इस बात की आशंका है कि यह सब सूचना दर्ज हो जाएगी तो भविष्य में योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बातचीत में कई लोग घर में शौचालय न होने की बात भी कह रहे हैं, बाइक व साइकिल न होना भी बता रहे हैं। हां, सबके पास स्मार्ट फोन जरूर है और इस बात को वे भी स्वीकार कर रहे हैं। पहले ही दिन कुछ लोगों ने पूरा कर लिया लक्ष्य
चौरी चौरा क्षेत्र में एक पंचायत सहायक ने पहले ही दिन 106 घरों का सर्वे पूरा कर लिया है। इसपर कई शिक्षकों ने ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि जब ट्रेनिंग में यह बताया गया था कि पहले तीन दिन नजरी नक्शा बनाकर तहसील में जमा करना है, उसके बाद एप पर सर्वे करना है तो पहले ही दिन कोई काम कैसे पूरा कर सकता है।


