Akhilesh Yadav: कानपुर में उस समय हलचल मच गई जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के कुछ जवान अपने कमांडेंट के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। बताया गया कि यह मुलाकात एक जवान की शिकायत से जुड़े मामले को लेकर की गई थी। अधिकारियों के अनुसार बातचीत के बाद सभी जवान और कमांडेंट वहां से शांतिपूर्वक रवाना हो गए,लेकिन इसी दौरान पुलिस कमिश्नर कार्यालय परिसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसने नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया।
वायरल वीडियो से उठे सवाल, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। समाजवादी पार्टी ने इस घटनाक्रम को लेकर सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो साझा करते हुए लिखा है कि “UP की भाजपा सरकार और उसकी पुलिस की नाइंसाफ़ी और ज़्यादती देखकर ITBP को भी इन पर भरोसा नहीं है। दिल्ली का भरोसा लखनऊ से उठ गया है तभी ITBP ने ये घेराबंदी की होगी। ये कैसा डबल इंजन है जो एक-दूसरे के ख़िलाफ़ बंदूक ताने खड़ा है”। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
ITBP कमांडेंट का स्पष्टीकरण, घेराव के आरोपों को बताया गलत
इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए ITBP के कमांडेंट गौरव प्रसाद ने बताया कि वे एक जवान से जुड़े पारिवारिक मामले को लेकर पहले से तय अपॉइंटमेंट के तहत पुलिस कमिश्नर से मिलने आए थे। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से एक औपचारिक मुलाकात थी।कमांडेंट ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की घेराबंदी या विरोध प्रदर्शन जैसी कोई स्थिति नहीं बनी थी। सभी अधिकारी शांति के साथ कार्यालय पहुंचे और बातचीत के बाद सामान्य रूप से लौट गए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की ओर से पूरा सहयोग मिला है।
जांच प्रक्रिया पर नजर, रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
कमांडेंट ने बताया कि मामले से जुड़ी रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या गलत सूचना से स्थिति न बिगड़े।


