तमिलनाडु की राजनीति में नया सियासी बवाल देखने को मिला है। AIADMK को चुनाव के ठीक बाद बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पुराने और पूर्व विधानसभा स्पीकर पी धनपाल ने भी AIADMK से इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने साफ कहा कि पार्टी के मौजूदा नेतृत्व ने उन्हें और कई अन्य साथियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। धनपाल ने यह फैसला अपने बेटे रासिपुरम विधायक डी लोगेश तमिलसेल्वन की शपथ ग्रहण समारोह के बाद लिया। बेटा तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) की सरकार में मंत्री बने हैं।
समारोह से निकलकर धनपाल ने दिखाई नाराजगी
समारोह से निकलकर धनपाल ने मीडिया से बात करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा- नेतृत्व ने कई लोगों को अनदेखा किया। आज लोगों ने उन्हें इग्नोर कर दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पार्टी के शुरुआती दिनों से लेकर अब तक का सफर देखा है। पार्टी को मजबूत होते देखा है, लेकिन आज उसकी हालत देखकर बहुत दुख होता है।
AIADMK के बहुत पुराने नेता हैं धनपाल
धनपाल AIADMK के बहुत पुराने नेता हैं। उनका राजनीतिक करियर 40 साल से ज्यादा पुराना है। वे सात बार तमिलनाडु विधानसभा के लिए चुने गए हैं।
2012 से 2021 तक वे विधानसभा स्पीकर भी रहे। इसके अलावा उन्होंने आदिवासी कल्याण, सहकारिता, खाद्य और नागरिक आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले।
पार्टी में बढ़ रही बेचैनी
यह इस्तीफा AIADMK के लिए सामान्य नहीं है। कुछ दिन पहले ही पूर्व मंत्री एस सेम्मलाई ने भी पार्टी छोड़ दी थी। दोनों घटनाएं पार्टी में असंतोष और नेतृत्व पर सवालों को और मजबूत कर रही हैं।
कई वरिष्ठ नेता पहले से ही नाराज चल रहे हैं। चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी को फिर से खड़ा करने की कोशिश चल रही है, लेकिन ऐसे झटके लगातार आ रहे हैं।
बेटे की सफलता के दिन पिता का फैसला
सबसे दिलचस्प बात यह है कि धनपाल ने यह कदम उसी दिन उठाया जब उनका बेटा मंत्री पद की शपथ ले रहा था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि धनपाल जैसे अनुभवी नेता का जाना AIADMK के लिए बड़ी कमी है। वे पार्टी के ग्रासरूट स्तर पर भी लोकप्रिय रहे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या अन्य वरिष्ठ नेता भी इसी रास्ते पर चलेंगे या पार्टी अपने अंदरूनी कलह को सुलझा पाएगी। AIADMK के वर्तमान नेतृत्व को अब जल्दी से जल्दी कदम उठाने होंगे, वरना पार्टी और कमजोर होती जाएगी।


