राजस्थान का रावतभाटा क्षेत्र अब प्रोजेक्ट चीता के तहत चीता पुनर्स्थापन के लिए संभावित नए ठिकाने के रूप में उभर रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी (National Tiger Conservation Authority)की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति ने बुधवार को रावतभाटा क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। सीसीएफ सुगनाराम जाट ने बताया कि यह सर्वेक्षण NTCA की 28वीं बैठक में लिए गए फैसले के तहत किया जा रहा है, जिसमें इस क्षेत्र को मेटा-पॉपुलेशन साइट के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। समिति में NTCA सदस्य एस. एस. श्रीवास्तव, मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव कोटा सुगना राम जाट, भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिपिन, गांधी सागर अभयारण्य के वन मंडल अधिकारी संजय रायखेरे और NTCA के एआईजी पवन जेफ शामिल रहे। टीम ने रावतभाटा रेंज के उस वन क्षेत्र का निरीक्षण किया जो राणा प्रताप सागर बांध के पूर्वी हिस्से में फैला हुआ है। करीब 299 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह इलाका प्राकृतिक रूप से पर्वतीय श्रेणियों से घिरा हुआ है। इसके उत्तर में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व और दक्षिण में गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी स्थित होने के कारण यह क्षेत्र महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर माना जा रहा है। निरीक्षण के दौरान समिति ने वनस्पति, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता, मिट्टी की संरचना, जैविक दबाव और अन्य पारिस्थितिकीय पहलुओं का अध्ययन किया। टीम ने राणा प्रताप सागर बांध, गॉर्ज क्षेत्र और आसपास के जंगलों का दौरा करते हुए एकलिंगपुरा और बरखेड़ा मार्ग से गांधी सागर तक निरीक्षण किया। समिति गुरुवार को कुल्थी, जावदा और भैंसरोड़गढ़ क्षेत्र का भी दौरा करेगी। यह सर्वे भविष्य में प्रोजेक्ट चीता के विस्तार और संरक्षण योजनाओं के लिए अहम माना जा रहा है।


