ई-फार्मेसी और नई दवा नीति के विरोध में बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर राज्यभर के दवा कारोबारी बुधवार को हड़ताल पर रहे। राजधानी की करीब 7200 और राज्यभर की करीब 40 हजार दवा दुकानें बंद रहीं। राजधानी में 15 करोड़ और राज्यभर में 35 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। पटना के बड़े अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे मरीज दवा के लिए परेशान रहे। पर्ची लेकर एक से दूसरी दुकान तक भटकते रहे। अस्पतालों के बाहर जन औषधि दुकानों को छोड़कर बाकी सभी मेडिकल स्टोर बंद रहे। बाहर से आने वाले मरीजों का कहना था कि दवाओं के लिए आज पटना में ही रुकना होगा, क्योंकि गांव चले जाने पर वहां नहीं मिलेंगी। सबसे ज्यादा परेशानी सर्जरी कराने वालों को झेलनी पड़ी, क्योंकि ज्यादातर सर्जिकल आइटम मरीजों को बाहर से लाने पड़ते हैं। हालांकि, अस्पतालों के मुताबिक, निर्धारित सर्जरी के लिए आवश्यक सामान पहले ही मंगवा लिया गया था। संदलपुर के संतोष मिश्रा ने कहा-बुजुर्ग पिता को उल्टी और गैस की शिकायत थी। पीएमसीएच के आसपास दवा लेने पहुंचे, लेकिन मेडिकल स्टोर बंद मिले। इमरजेंसी मरीजों के लिए कुछ दुकानों को खुला रखना चाहिए था। आईजीआईएमएस में पत्नी का इलाज करा रहे गर्दनीबाग के विनोद प्रसाद दवा के लिए भटकते रहे। दवा विक्रेताओं की हड़ताल को लेकर हमारा सिस्टम पहले से पूरी तरह सचेत था। सरकारी अस्पतालों में 611 प्रकार की दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। ऑपरेशन वाले मरीजों के लिए भी एक दिन पहले ही एडवांस में सामग्रियां सुरक्षित कर ली गई थीं। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुले रहने से भी मरीजों को काफी राहत मिली है।-डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल, सिविल सर्जन ई-फार्मेसी और नई दवा नीति के विरोध में बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर राज्यभर के दवा कारोबारी बुधवार को हड़ताल पर रहे। राजधानी की करीब 7200 और राज्यभर की करीब 40 हजार दवा दुकानें बंद रहीं। राजधानी में 15 करोड़ और राज्यभर में 35 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। पटना के बड़े अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे मरीज दवा के लिए परेशान रहे। पर्ची लेकर एक से दूसरी दुकान तक भटकते रहे। अस्पतालों के बाहर जन औषधि दुकानों को छोड़कर बाकी सभी मेडिकल स्टोर बंद रहे। बाहर से आने वाले मरीजों का कहना था कि दवाओं के लिए आज पटना में ही रुकना होगा, क्योंकि गांव चले जाने पर वहां नहीं मिलेंगी। सबसे ज्यादा परेशानी सर्जरी कराने वालों को झेलनी पड़ी, क्योंकि ज्यादातर सर्जिकल आइटम मरीजों को बाहर से लाने पड़ते हैं। हालांकि, अस्पतालों के मुताबिक, निर्धारित सर्जरी के लिए आवश्यक सामान पहले ही मंगवा लिया गया था। संदलपुर के संतोष मिश्रा ने कहा-बुजुर्ग पिता को उल्टी और गैस की शिकायत थी। पीएमसीएच के आसपास दवा लेने पहुंचे, लेकिन मेडिकल स्टोर बंद मिले। इमरजेंसी मरीजों के लिए कुछ दुकानों को खुला रखना चाहिए था। आईजीआईएमएस में पत्नी का इलाज करा रहे गर्दनीबाग के विनोद प्रसाद दवा के लिए भटकते रहे। दवा विक्रेताओं की हड़ताल को लेकर हमारा सिस्टम पहले से पूरी तरह सचेत था। सरकारी अस्पतालों में 611 प्रकार की दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। ऑपरेशन वाले मरीजों के लिए भी एक दिन पहले ही एडवांस में सामग्रियां सुरक्षित कर ली गई थीं। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुले रहने से भी मरीजों को काफी राहत मिली है।-डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल, सिविल सर्जन


