Iran US War Update: ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर अब सवाल उठने लगे हैं। ट्रंप ने दावा किया था कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नेताओं ने उनसे ईरान पर सैन्य कार्रवाई टालने की अपील की थी, लेकिन अब खाड़ी देशों के अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें किसी भी संभावित अमेरिकी हमले की जानकारी नहीं थी।
दरअसल, ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित हमले को इसलिए रोक दिया क्योंकि खाड़ी देशों के नेताओं ने उन्हें बातचीत के लिए थोड़ा और समय देने को कहा था। ट्रंप के मुताबिक, इन देशों का मानना था कि अमेरिका और ईरान के बीच गंभीर वार्ता चल रही है और जल्द कोई समझौता हो सकता है।
खाड़ी देशों ने कहा- हमें कोई जानकारी नहीं
हालांकि, बाद में कुछ खाड़ी देशों के अधिकारियों ने अमेरिकी मीडिया से कहा कि उन्हें किसी भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की जानकारी नहीं थी। इससे ट्रंप के दावों पर नया विवाद खड़ा हो गया है।
ट्रंप ने दावा किया था कि कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि ये देश मानते हैं कि ईरान के साथ परमाणु मुद्दे पर समझौते की संभावना अभी बाकी है।
हमले से सिर्फ एक घंटा दूर थे
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर हमला करने से सिर्फ एक घंटा दूर था, लेकिन उन्होंने आखिरी समय में फैसला बदल दिया। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर परमाणु वार्ता विफल होती है तो आने वाले दिनों में ईरान पर फिर से हमला किया जा सकता है।
ट्रंप ने कहा ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो सैन्य विकल्प अब भी टेबल पर है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फरवरी 2026 के बाद से लगातार बढ़ा हुआ है। अमेरिकी और इजरायली सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ी है और तेल बाजारों पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों के बयानों और ट्रंप के दावों में विरोधाभास से यह साफ हो रहा है कि क्षेत्रीय कूटनीति अभी बेहद संवेदनशील और अनिश्चित दौर से गुजर रही है।


