सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं, जेब में प्रदूषण सर्टिफिकेट के बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड न मिलने पर कट रहे चालान

भास्कर न्यूज | जालंधर प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट का सरकारी सॉफ्टवेयर अपडेट होने के चक्कर में ऐसा ठप पड़ा है कि वाहन चालकों की जेब में असली कागज होने के बावजूद पुलिस उनके चालान काट रही है। दरअसल, वाहन चालकों ने पैसे देकर प्रदूषण केंद्रों से सर्टिफिकेट तो बनवा लिया है और उनके पास फिजिकल (कागजी) कॉपी भी है, लेकिन सरकारी ऑनलाइन सिस्टम पर वह शो ही नहीं कर रहा। ट्रैफिक पुलिस के मुलाजिम जैसे ही अपनी मशीन से नंबर चेक करते हैं, वहां नो पीयूसी लिखा आ जाता है। इसके बाद पुलिस वाले 5 हजार का चालान कर देते हैं। यह समस्या पूरे देश की है क्योंकि पॉल्यूशन का यह सॉफ्टवेयर केंद्रीय स्तर पर अपडेट किया जा रहा है। केस 1: चंडीगढ़ में भुगतना पड़ा 1000 का चालान गुरु नानक पुरा के सौरभ मित्तल ने चार दिन पहले ही सर्टिफिकेट बनवाया था। चंडीगढ़ में ट्रैफिक पुलिस ने जब ऑनलाइन चेक किया, तो डेटा गायब मिला। सौरभ ने असली कागजी सर्टिफिकेट भी दिखाया, लेकिन पुलिस ने उसे गलत करार देते हुए 1,000 रुपये का ऑनलाइन चालान काट दिया। केस 2: सेंटर मालिक के हस्तक्षेप से बची जान बसंत एवेन्यू के राकेश को रामा मंडी चौक पर पुलिस ने रोका। ऑनलाइन रिकॉर्ड न मिलने पर पुलिस चालान काटने पर अड़ गई। राकेश ने मौके पर ही प्रदूषण केंद्र के मालिक की पुलिस से बात करवाई। संचालक द्वारा सिस्टम की खराबी समझाने और काफी मिन्नतें करने के बाद ही राकेश का चालान बच सका। केस 3: मोबाइल नंबर सॉफ्टवेयर ने गलत बताया मॉडल टाउन के रमन शर्मा अमृतसर जाने से पहले नया सर्टिफिकेट बनवाना चाहते थे। लेकिन जब वे सेंटर पहुंचे, तो सॉफ्टवेयर ने ‘मोबाइल नंबर गलत या अपडेट न होने’ का एरर देकर सर्टिफिकेट बनाने से मना कर दिया। मजबूरन उन्हें एक्सपायरी के डर के बीच ही सफर तय करना पड़ा। केस 4: डिलीवरी बॉय को मिली जब्ती की धमकी नकोदर रोड के अमित कुमार (फूड डिलीवरी बॉय) के पास डिजिटल और फिजिकल दोनों कॉपी थीं। पीएपी चौक पर चेकिंग के दौरान डेटा शो न होने पर पुलिस ने न केवल चालान काटा, बल्कि बाइक जब्त करने की धमकी भी दी। अमित की तकनीकी खराबी वाली दलील को पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया। असर : एडवांस में भी नहीं बन पा रहे सर्टिफिकेट इस तकनीकी खराबी के कारण जहां आम जनता सड़कों पर पुलिस के हाथों परेशान हो रही है, वहीं पॉल्यूशन सेंटर संचालकों के कामकाज पर भी असर देखने को मिल रहा है। लोग रोज केंद्रों पर आकर लड़ रहे हैं कि उन्होंने पैसे दिए थे तो उनका सर्टिफिकेट ऑनलाइन क्यों नहीं चढ़ाया गया। इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति लंबे टूर पर जाना चाहता है और उसका पीयूसी दो-चार दिन बाद एक्सपायर होने वाला है, तो वह एडवांस में नया सर्टिफिकेट भी नहीं बनवा पा रहा है, क्योंकि सॉफ्टवेयर पुरानी अवधि खत्म होने से पहले नया डेटा एक्सेप्ट (स्वीकार) ही नहीं कर रहा।

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