उमरिया जिले के उद्यानिकी विभाग में बड़ी लापरवाही सामने आई है। किसानों के लिए खरीदी गई दवाएं एक्सपायर हो गईं, जिसके बाद विभाग उन्हें कचरे में फेंक रहा है। मामले की जानकारी मिलने पर सहायक संचालक झनक सिंह मरावी ने जांच के निर्देश दिए हैं। घटना ऐसे समय में हुई है जब देश और प्रदेश में इस वर्ष को ‘किसान वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। ये दवाएं किसानों को उनकी फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सब्जियों व पौधों को बीमारियों से बचाने के लिए उपलब्ध कराई गई थीं। मामले में सख्त कार्रवाई की मांग दवाओं के वितरण न होने के संबंध में जब उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि दवाएं जिला कार्यालय से विकासखंड स्तर पर भेजी जाती हैं और फिर किसानों को बांटी जाती हैं। उन्होंने कहा कि विकासखंड स्तर पर अधिकारियों से बात की जाएगी कि दवाएं क्यों नहीं बांटी गईं। हालांकि, वे इस पूरे मामले पर जवाब देने से बचते नजर आए। पूर्व विधायक अजय सिंह ने किसानों को दवाएं न मिलने को बड़ी लापरवाही बताया है। उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। विभाग ने कचरे में फेकी स्टॉक जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर दूर डबरौआ स्थित उद्यानिकी विभाग की नर्सरी में ये दवाएं रखी गई थीं। इस नर्सरी में फलदार और छायादार पौधे तैयार किए जाते हैं, और यहीं विभाग की दवाएं व अन्य उपयोगी सामान भी संग्रहीत किए जाते हैं। वर्ष 2024-25 में खरीदी गई ये दवाएं स्टॉक में रखी गईं, लेकिन विभाग के अधिकारियों की ओर से इन्हें किसानों तक नहीं पहुंचाया गया। परिणामस्वरूप, दवाएं एक्सपायर हो गईं और उन्हें फेंकना पड़ा। किसानों के हित में आई इन दवाओं का उन तक न पहुंचना एक गंभीर मुद्दा बन गया है। यह पहली बार नहीं है जब जिले का उद्यानिकी विभाग इस तरह की लापरवाही के कारण सुर्खियों में आया है।


