Rajasthan Electricity : राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग का नया आदेश, बिजली कंपनियों में मची खलबली, मंथन शुरू

Rajasthan Electricity : राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग का नया आदेश, बिजली कंपनियों में मची खलबली, मंथन शुरू

Rajasthan Electricity : राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग के 3200 मेगावाट क्षमता के थर्मल पावर प्लांट को लेकर दिए गए आदेश (सशर्त अनुमति) ने ऊर्जा महकमे के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब मामला केवल नई थर्मल बिजली खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे पावर प्लानिंग मॉडल को नए सिरे से साबित करने की स्थिति बन रही है। 4440 मेगावाट थर्मल बिजली के प्रस्ताव को सशर्त अनुमति तो दे दी, लेकिन आयोग ने भविष्य में रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी स्टोरेज, न्यूक्लियर परियोजना और पुराने थर्मल प्लांटों की रिटायरमेंट को ध्यान में रखते हुए नई रिसोर्स एडीक्वेसी प्लानिंग तैयार करने को कहा है।

यानी बिजली की भविष्य की मांग और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन का विस्तृत आकलन तैयार करना होगा। आदेश के बाद ऊर्जा महकमे में बैठकों का दौर शुरू हो गया है और आगे की रणनीति पर मंथन चल रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि पूरा मामला अब तकनीकी, वित्तीय और रेगुलेटरी समीक्षा की स्थिति में पहुंच गया है।

ऊर्जा महकमे के सामने ये चुनौतियां

1- भविष्य में बिजली की जरूरत को साबित करना
यह साबित करना होगा कि आने वाले वर्षों में प्रदेश को वास्तव में अतिरिक्त थर्मल बिजली की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए उन्हें बिजली मांग, पीक लोड, पुराने प्लांट बंद होने और नई परियोजनाओं के आंकड़े पेश करने होंगे।

2- ग्रीन एनर्जी और थर्मल बिजली में संतुलन बनाना
राजस्थान में तेजी से सोलर और विंड ऊर्जा बढ़ रही है। ऐसे में डिस्कॉम को यह साबित करना होगा कि नई थर्मल क्षमता जोड़ने के बाद भविष्य में जरूरत से ज्यादा बिजली नहीं होगी और इसका अतिरिक्त खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।

3- कोयला आपूर्ति और परियोजनाओं की स्थिति
आयोग ने कहा है कि कई प्रस्तावित परियोजनाएं अभी शुरुआती चरण में हैं और उनमें कोयला आपूर्ति, मंजूरियां और वित्तीय स्थिति साफ नहीं है। डिस्कॉम को बताना है कि कौन-सी परियोजनाएं समय पर शुरू होकर बिजली दे पाएंगी।

4- पुराने थर्मल प्लांट बंद करने का आधार
कोटा और सूरतगढ़ जैसे पुराने थर्मल प्लांटों की तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता का अध्ययन कर यह तय करना होगा कि उन्हें चलाना है या रिटायर करना है।

5- पीक समय में बिजली आपूर्ति और ग्रिड संतुलन बनाना
दिन के समय सोलर बिजली ज्यादा मिलती है, लेकिन सुबह और शाम के पीक समय में स्थिर बिजली की जरूरत रहती है। ऐसे में बैटरी स्टोरेज, ग्रीन एनर्जी और थर्मल पावर के बीच संतुलन बनाना होगा, ताकि महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम पड़े।

6- मंजूरी की प्रशासनिक चुनौती
नई बिजली खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले निगम बोर्ड, राज्य सरकार और अन्य से अनुमति लेनी होगी। अलग-अलग स्तरों पर मंजूरी हासिल करना बिजली कंपनियों के लिए प्रशासनिक चुनौती रहेगी।

इस मामले में अलग स्थिति देखने को मिली

आमतौर पर आयोग याचिका को मंजूर करता है या खारिज, लेकिन इस मामले में अलग स्थिति देखने को मिली। याचिका खारिज होती तो बिजली कंपनी नई बिजली खरीद की योजना बनाती और मंजूरी मिलती तो प्रक्रिया आगे बढ़ती। अब मामला पावर प्लानिंग मॉडल की समीक्षा की स्थिति में पहुंच गया है।
आर.जी. गुप्ता, पूर्व सीएमडी, राजस्थान डिस्कॉम्स

आयोग ने दिए निर्देश

आयोग ने विस्तृत रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान तैयार करने, वास्तविक बिजली जरूरत देखने और मौजूदा अतिरिक्त क्षमताओं की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। ऊर्जा विकास निगम और डिस्कॉम को यह तय करना होगा कि भविष्य की मांग और लागत दक्षता को देखते हुए आगे की रणनीति क्या हो।
अंशुमान गोठवाल, ऊर्जा विशेषज्ञ

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