मुजफ्फरपुर में पुलिस पाठशाला के बच्चों की बचत अब बैंक एफडी तक पहुंच गई है। गुल्लक बैंक में जमा पैसों में सहयोग जोड़कर मेधावी छात्रों के नाम SBI में फिक्स डिपॉजिट कराया गया। कभी पुलिस से डरने वाले बच्चे आज ‘जय हिंद’ बोलते हैं और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। कन्हौली टीओपी में संचालित यह पुलिस पाठशाला रेड लाइट एरिया के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। समय के साथ यह पहल अब एक बड़े अभियान का रूप ले चुकी है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को न सिर्फ शिक्षा दी जा रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। पुलिस पाठशाला का बदलता असर पुलिस पाठशाला की सबसे खास बात यह है कि यहां बच्चों को पुलिसकर्मी ही पढ़ाते हैं। कभी यही बच्चे पुलिस को देखकर डर जाते थे और भाग जाते थे, लेकिन अब वही बच्चे पुलिस कर्मियों का ‘जय हिंद’ बोलकर स्वागत करते हैं। यह बदलाव इस पहल के सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने कम उम्र में शादी के खिलाफ नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया। इस नाटक के जरिए बाल विवाह के दुष्परिणामों को दिखाया गया, जिसे कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने काफी सराहा। इससे बच्चों में सामाजिक जागरूकता का संदेश भी सामने आया। गुल्लक बैंक से शुरू हुई बचत की सीख बच्चों में बचत की आदत विकसित करने के लिए पाठशाला में पहले ‘गुल्लक बैंक’ की शुरुआत की गई थी। इसके तहत सभी बच्चों को पासबुक दी गई थी और हर महीने 50 रुपए जमा किए जाते थे। इसके अलावा बच्चों के जन्मदिन पर 500 रुपए उनके खाते में जमा कराए जाते थे। इस तरह हर बच्चे के खाते में सालाना 1100 रुपए जमा होते थे। अब इस पहल को आगे बढ़ाते हुए बच्चों को एसबीआई में उनका खुद का बचत बैंक खाता उपलब्ध कराया गया है। बच्चों को सौंपा गया बैंक पासबुक एसबीआई के चीफ जनरल मैनेजर अनुराग जोशी ने सभी बच्चों को बैंक पासबुक सौंपते हुए इस पहल की सराहना की। कहा कि यह बेहद प्रेरणादायक कार्य है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और उनका भविष्य बेहतर हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां से पढ़ने वाले बच्चे आगे चलकर बैंकिंग क्षेत्र के साथ-साथ सिविल सेवा में भी अपनी पहचान बनाएंगे। बच्चों की शिक्षा के लिए बढ़ाया सहयोग कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसबीआई के चीफ जनरल मैनेजर अनुराग जोशी और उनकी पत्नी पूजा जोशी शामिल हुईं। उनके साथ सिटी एसपी मोहिबुल्ला अंसारी, टाउन वन एसडीपीओ सुरेश कुमार और एसडीपीओ टाउन टू विनीता सिन्हा भी मौजूद रहीं। अधिकारियों ने बच्चों से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया और बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित किया। नसीमा खातून की पहल की हुई सराहना सिटी एसपी मोहिबुल्ला अंसारी ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन किया और पाठशाला के संचालन में जुटी नसीमा खातून की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुलिस और नसीमा खातून की पहल से वे बच्चे, जिन्हें समाज में उचित स्थान नहीं मिल पाता था, आज आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं। शुरुआत में यहां केवल 15 बच्चे आते थे पाठशाला से जुड़ी नशीमा ने बताया कि शुरुआत में यहां केवल 15 बच्चे आते थे, लेकिन अब डेढ़ सौ से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक असुरक्षा होती है, इसलिए गुल्लक बैंक की शुरुआत की गई थी. महिलाओं ने भेंट किया ‘खोईछ’ कार्यक्रम के दौरान रेड लाइट एरिया की महिलाओं की ओर से पारंपरिक ‘खोईछ’ भेंट कर एसबीआई के सीजीएम अनुराग जोशी और सिटी एसपी मोहिबुल्ला अंसारी का सम्मान किया गया। मुजफ्फरपुर में पुलिस पाठशाला के बच्चों की बचत अब बैंक एफडी तक पहुंच गई है। गुल्लक बैंक में जमा पैसों में सहयोग जोड़कर मेधावी छात्रों के नाम SBI में फिक्स डिपॉजिट कराया गया। कभी पुलिस से डरने वाले बच्चे आज ‘जय हिंद’ बोलते हैं और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। कन्हौली टीओपी में संचालित यह पुलिस पाठशाला रेड लाइट एरिया के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। समय के साथ यह पहल अब एक बड़े अभियान का रूप ले चुकी है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को न सिर्फ शिक्षा दी जा रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। पुलिस पाठशाला का बदलता असर पुलिस पाठशाला की सबसे खास बात यह है कि यहां बच्चों को पुलिसकर्मी ही पढ़ाते हैं। कभी यही बच्चे पुलिस को देखकर डर जाते थे और भाग जाते थे, लेकिन अब वही बच्चे पुलिस कर्मियों का ‘जय हिंद’ बोलकर स्वागत करते हैं। यह बदलाव इस पहल के सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने कम उम्र में शादी के खिलाफ नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया। इस नाटक के जरिए बाल विवाह के दुष्परिणामों को दिखाया गया, जिसे कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने काफी सराहा। इससे बच्चों में सामाजिक जागरूकता का संदेश भी सामने आया। गुल्लक बैंक से शुरू हुई बचत की सीख बच्चों में बचत की आदत विकसित करने के लिए पाठशाला में पहले ‘गुल्लक बैंक’ की शुरुआत की गई थी। इसके तहत सभी बच्चों को पासबुक दी गई थी और हर महीने 50 रुपए जमा किए जाते थे। इसके अलावा बच्चों के जन्मदिन पर 500 रुपए उनके खाते में जमा कराए जाते थे। इस तरह हर बच्चे के खाते में सालाना 1100 रुपए जमा होते थे। अब इस पहल को आगे बढ़ाते हुए बच्चों को एसबीआई में उनका खुद का बचत बैंक खाता उपलब्ध कराया गया है। बच्चों को सौंपा गया बैंक पासबुक एसबीआई के चीफ जनरल मैनेजर अनुराग जोशी ने सभी बच्चों को बैंक पासबुक सौंपते हुए इस पहल की सराहना की। कहा कि यह बेहद प्रेरणादायक कार्य है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और उनका भविष्य बेहतर हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां से पढ़ने वाले बच्चे आगे चलकर बैंकिंग क्षेत्र के साथ-साथ सिविल सेवा में भी अपनी पहचान बनाएंगे। बच्चों की शिक्षा के लिए बढ़ाया सहयोग कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसबीआई के चीफ जनरल मैनेजर अनुराग जोशी और उनकी पत्नी पूजा जोशी शामिल हुईं। उनके साथ सिटी एसपी मोहिबुल्ला अंसारी, टाउन वन एसडीपीओ सुरेश कुमार और एसडीपीओ टाउन टू विनीता सिन्हा भी मौजूद रहीं। अधिकारियों ने बच्चों से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया और बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित किया। नसीमा खातून की पहल की हुई सराहना सिटी एसपी मोहिबुल्ला अंसारी ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन किया और पाठशाला के संचालन में जुटी नसीमा खातून की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुलिस और नसीमा खातून की पहल से वे बच्चे, जिन्हें समाज में उचित स्थान नहीं मिल पाता था, आज आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं। शुरुआत में यहां केवल 15 बच्चे आते थे पाठशाला से जुड़ी नशीमा ने बताया कि शुरुआत में यहां केवल 15 बच्चे आते थे, लेकिन अब डेढ़ सौ से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक असुरक्षा होती है, इसलिए गुल्लक बैंक की शुरुआत की गई थी. महिलाओं ने भेंट किया ‘खोईछ’ कार्यक्रम के दौरान रेड लाइट एरिया की महिलाओं की ओर से पारंपरिक ‘खोईछ’ भेंट कर एसबीआई के सीजीएम अनुराग जोशी और सिटी एसपी मोहिबुल्ला अंसारी का सम्मान किया गया।


