इंदौर के शेल्बी हॉस्पिटल में एक मरीज के इलाज को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परिजन का कहना है कि गलत इलाज से मरीज की हालत बिगड़ने की आशंका है और डॉक्टरों ने भी इसे लिखकर दिया है। अब वे डिस्चार्ज करना चाहते हैं, लेकिन हम क्यों डिस्चार्ज लें। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज के परिजन लगातार विवाद पर उतारू है और जबर्दस्ती लिखवाया गया है। सुबह 11 बजे से चल रहा घटनाक्रम अभी भी चल रहा है। यह आरोप वल्लभ नगर निवासी विवेक मेहता ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर ये आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी मां हंसा मेहता को पैर में फ्रैक्चर होने के बाद 10 मई को इलाज के लिए अस्पताल में एडमिट कराया गया था। आरोप है कि उपचार के दौरान डॉक्टर द्वारा स्टाफ को मना करने पर भी गलत सिरप दिए। हंसा मेहता के बेटे विवेक का कहना है कि मरीज का इलाज कर रहे डॉ. योगेश शाह द्वारा उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कराने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि अस्पताल की ओर से यह अल्टीमेटम दिया गया कि यदि वे स्वयं डिस्चार्ज नहीं कराते हैं तो शाम 5 बजे के बाद मरीज को जबरन डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। विवेक का कहना है कि मां की हालत हिलने तक जैसी नहीं है, हम कहां ले जाए। बहरहाल, शाम 7.30 बजे तक डिस्चार्ज नहीं किया गया था जबकि मरीज की हालत ठीक है। अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को किया खारिज अस्पताल प्रशासन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। अस्पताल असुपरिटेंडेंट डॉ. विवेक जोशी ने कहा कि मरीज फिलहाल वार्ड में एडमिट है और उसकी स्थिति स्थिर है। जिन डॉ. योगेश शाह पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पिछले छह वर्षों से इस प्रकार के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। अस्पताल में वर्तमान में लगभग 140 मरीज भर्ती हैं और किसी प्रकार की शिकायत सामने नहीं आई है। हंसा मेहता के मामले में परिजन बिना कारण विवाद और हंगामा कर रहे हैं। मामले में पुलिस को शिकायत दर्ज कराई जाएगी। साथ ही सोमवार को अस्पताल प्रशासन मीडिया के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखेगा।


