गांगुली ने बताया कि धोनी का राष्ट्रीय टीम में इतना तेज उभरना कोई संयोग नहीं था। उन्होंने खुद जमशेदपुर जाकर घरेलू क्रिकेट में धोनी को देखा और उसके बाद ही अंतिम फैसला लिया।
भारत के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी का अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सौरव गांगुली की कप्तानी में हुआ था। गांगुली ने शुरुआत से ही धोनी को पूरा समर्थन दिया और उन्हें बल्लेबाजी क्रम में नंबर 3 पर खेलने का मौका भी प्रदान किया। गांगुली ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में खुलासा किया कि उन्होंने धोनी को कितनी तेजी से भारतीय टीम में शामिल किया और सिस्टम के अंदर लाकर आगे बढ़ाया।
राज शमानी के पॉडकास्ट में बात करते हुए गांगुली ने बताया कि धोनी का राष्ट्रीय टीम में इतना तेज उभरना कोई संयोग नहीं था। उन्होंने खुद जमशेदपुर जाकर घरेलू क्रिकेट में धोनी को देखा और उसके बाद ही अंतिम फैसला लिया। गांगुली ने कहा, “मुझे खुद देखना था, इसलिए मैंने कुछ दिनों के लिए उन्हें टीम में चुनने का फैसला टाल दिया। फिर मैं मैच देखने जमशेदपुर गया।” गांगुली ने मुस्कुराते हुए कहा, “धोनी को पता भी नहीं था कि मैं मैच देखने आया हूं।”
साबा करीम को दिया क्रेडिट
पूर्व चयनकर्ता साबा करीम ने सबसे पहले गांगुली को धोनी की ताकत के बारे में बताया था। गांगुली ने कहा, “सबा करीम ने मुझसे कहा था, ‘वह बहुत छक्के मारता है।’ इसलिए हमने उसे सीधे वहीं से इंडिया ‘ए’ टीम के लिए चुन लिया। उसने अपना पहला मैच वानखेड़े स्टेडियम में मेरी टीम के साथ खेला था। उसने उस मैच में शतक बनाया था और छत तक छक्के मार रहा था।”
पूर्व कप्तान ने उस एग्रेसिव प्रमोशन मॉडल के पीछे का क्रिकेट लॉजिक भी समझाया। उन्होंने कहा, ”यह सिस्टम है। अगर आप अपने लेवल से ऊपर के लोगों के साथ खेलते हैं तो आपका गेम ऊपर जाएगा। अगर आप नीचे खेलते हैं तो आपका गेम नीचे जाएगा।” इसी विश्वास ने युवराज सिंह, हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग और सबसे खास एमएस धोनी जैसे खिलाड़ियों को निखारने में अहम भूमिका निभाई।
गांगुली ने साफ कहा, “जो खिलाड़ी अच्छा है, उसे तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए। धीरे-धीरे पकाते रहोगे तो वो खत्म हो जाएगा।” यही सोच गांगुली की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट को नई दिशा देने में काम आई।
पहला मैच निराशाजनक रहा, लेकिन गांगुली का भरोसा नहीं डिगा
धोनी का वनडे डेब्यू दिसंबर 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ चटोग्राम में हुआ, जहां वे शून्य पर रन आउट हो गए। लेकिन गांगुली ने अपना धैर्य नहीं खोया। कुछ महीने बाद विशाखापट्टनम में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने धोनी को नंबर 3 पर भेजा। धोनी ने 123 गेंदों पर 148 रनों की विस्फोटक पारी खेली और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी दस्तक दे दी।
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