मऊ जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी नए श्रम कानूनों के विरोध में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में नोएडा, मानेसर समेत विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर आंदोलनों के दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और मजदूरों पर की गई कार्रवाई का विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने बिना पुख्ता सबूत गिरफ्तारी किए जाने और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ था आंदोलन ज्ञापन में कहा गया कि अप्रैल माह में मजदूरी बढ़ाने और अन्य मांगों को लेकर मजदूरों का स्वतःस्फूर्त आंदोलन शुरू हुआ था। आरोप लगाया गया कि आंदोलन के दौरान पुलिस ने कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और मजदूरों को हिरासत में लिया। महिला कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर सवाल प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेते समय महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं। साथ ही कई दिनों तक उनके परिजनों और साथियों को गिरफ्तारी की जानकारी भी नहीं दी गई। सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी का किया जिक्र ज्ञापन में सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी का विशेष उल्लेख किया गया। आरोप लगाया गया कि पुलिस अब तक हिंसा भड़काने से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाई है। वहीं, कई वीडियो और स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों में सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील किए जाने की बात सामने आई है। राष्ट्रपति से निष्पक्ष जांच की मांग प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं और मजदूरों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमे वापस लेने, सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी पर लगाए गए रासुका को हटाने तथा मजदूरों की जायज मांगें पूरी करने की अपील की गई।


