पश्चिम चम्पारण जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन में लापरवाही और धीमी प्रगति को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उप विकास आयुक्त काजले नितिन वैभव ने जिले के कई प्रखंडों के बीडीओ, आवास पर्यवेक्षकों और प्रखंड समन्वयकों को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। उन्हें लंबित आवासों को एक सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश भी दिया गया है। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, पश्चिम चम्पारण द्वारा जारी पत्र के अनुसार, आवास योजना की समीक्षा में पाया गया कि कई प्रखंडों में तीसरी किस्त का भुगतान होने के बावजूद बड़ी संख्या में आवास अधूरे हैं। प्रशासन ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना है। प्रगति रिपोर्ट के मुताबिक, नौतन प्रखंड की स्थिति सबसे खराब है, जहां 3225 लाभार्थियों को तीसरी किस्त मिलने के बाद भी 1879 आवास अधूरे हैं। लौरिया में 764 आवास अभी तक पूरे नहीं हुए
अन्य प्रखंडों में भी बड़ी संख्या में आवास लंबित हैं। बैरिया में 1324, मझौलिया में 1289, बगहा-2 में 948 और लौरिया में 764 आवास अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। जिले में कुल 20995 लाभार्थियों को तीसरी किस्त जारी की गई है, लेकिन इनमें से 8941 आवास अब तक पूर्ण नहीं हो सके हैं। पत्र में मनरेगा और आवास योजना के समन्वय पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। निर्देशों के बावजूद कई प्रखंडों में आवास निर्माण से संबंधित मजदूरी भुगतान के लिए मास्टर रोल नहीं बनाए जा रहे हैं। तकनीकी सहायकों और रोजगार सेवकों पर भी लापरवाही बरतने का आरोप है। इसके अतिरिक्त, ई-केवाईसी लंबित रहने की समस्या पर भी नाराजगी व्यक्त की गई है। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि लगातार निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है। विभागीय निर्देशों और निर्धारित कार्य संस्कृति के प्रतिकूल
उप विकास आयुक्त काजले नितिन वैभव ने स्पष्ट किया है कि योजना के क्रियान्वयन में शिथिलता विभागीय निर्देशों और निर्धारित कार्य संस्कृति के प्रतिकूल है। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में जिले की खराब प्रगति से प्रशासन की छवि प्रभावित हो रही है। संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने और एक सप्ताह के अंदर सभी लंबित आवासों को पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है। पश्चिम चम्पारण जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन में लापरवाही और धीमी प्रगति को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उप विकास आयुक्त काजले नितिन वैभव ने जिले के कई प्रखंडों के बीडीओ, आवास पर्यवेक्षकों और प्रखंड समन्वयकों को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। उन्हें लंबित आवासों को एक सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश भी दिया गया है। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, पश्चिम चम्पारण द्वारा जारी पत्र के अनुसार, आवास योजना की समीक्षा में पाया गया कि कई प्रखंडों में तीसरी किस्त का भुगतान होने के बावजूद बड़ी संख्या में आवास अधूरे हैं। प्रशासन ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना है। प्रगति रिपोर्ट के मुताबिक, नौतन प्रखंड की स्थिति सबसे खराब है, जहां 3225 लाभार्थियों को तीसरी किस्त मिलने के बाद भी 1879 आवास अधूरे हैं। लौरिया में 764 आवास अभी तक पूरे नहीं हुए
अन्य प्रखंडों में भी बड़ी संख्या में आवास लंबित हैं। बैरिया में 1324, मझौलिया में 1289, बगहा-2 में 948 और लौरिया में 764 आवास अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। जिले में कुल 20995 लाभार्थियों को तीसरी किस्त जारी की गई है, लेकिन इनमें से 8941 आवास अब तक पूर्ण नहीं हो सके हैं। पत्र में मनरेगा और आवास योजना के समन्वय पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। निर्देशों के बावजूद कई प्रखंडों में आवास निर्माण से संबंधित मजदूरी भुगतान के लिए मास्टर रोल नहीं बनाए जा रहे हैं। तकनीकी सहायकों और रोजगार सेवकों पर भी लापरवाही बरतने का आरोप है। इसके अतिरिक्त, ई-केवाईसी लंबित रहने की समस्या पर भी नाराजगी व्यक्त की गई है। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि लगातार निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है। विभागीय निर्देशों और निर्धारित कार्य संस्कृति के प्रतिकूल
उप विकास आयुक्त काजले नितिन वैभव ने स्पष्ट किया है कि योजना के क्रियान्वयन में शिथिलता विभागीय निर्देशों और निर्धारित कार्य संस्कृति के प्रतिकूल है। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में जिले की खराब प्रगति से प्रशासन की छवि प्रभावित हो रही है। संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने और एक सप्ताह के अंदर सभी लंबित आवासों को पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है।


