इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा निदेशक उप्र लखनऊ को स्पष्टीकरण के साथ 18 मई को तलब किया है । यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने सुशील कुमार सिंह की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची को बीएसए मऊ की तरफ से अनुभव प्रमाणपत्र जारी किया गया। प्रमाणपत्र की सत्यता को लेकर सवाल उठा। हाईकोर्ट ने निदेशक से जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि डिस्पैच रजिस्टर में दर्ज नहीं है जारी प्रमाणपत्र और बी एस ए का कहना है कि उनके हस्ताक्षर नहीं है। देखना चाहिये कि क्या उचित है कोर्ट ने इस जानकारी को बिना विवेक का इस्तेमाल किए दिया गया माना कहा स्थापित कानून हैं कि डिस्पैच रजिस्टर में दर्ज न होने के आधार पर किसी के दावे को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के सुबोध कुमार प्रसाद केस का हवाला दिया।कहा निदेशक की दी गई जानकारी सही नहीं है। उस बी एस ए का नाम नहीं लिखा जिसने हस्ताक्षर किए थे और जिससे पूछताछ की गई थी। कोर्ट ने कहा निदेशक को जानकारी उपलब्ध कराने के पहले खुद देखना चाहिए कि जानकारी उचित है या नहीं। कोर्ट ने कहा ऐसे उच्च अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह तथ्यों की गहन जांच करके आगे बढाये ।जिस पर कोर्ट ने अपने आचरण के स्पष्टीकरण के साथ बेसिक शिक्षा निदेशक को हाजिर होने का निर्देश दिया है।


