इंदौर के चर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में हुई 36 मौतों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में दायर छह जनहित याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई। हालांकि एक याचिका में पक्षकार बनाए गए निगम एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा बबलू, पार्षद कमल वाघेला और तत्कालीन अपर कमिश्नर रोहित सिसोनिया द्वारा नाम हटाने संबंधी आवेदन पर सुनवाई नहीं हो सकी। मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच में प्रस्तावित थी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले याचिका दायर कर पक्षकार बनाया गया और अब नाम हटाने के आवेदन प्रस्तुत किए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई अत्यावश्यक परिस्थिति नहीं है, इसलिए अब इस मामले में सुनवाई न्यायालयीन अवकाश के बाद की जाएगी। आवेदन में दलील; हमारी सीधे जिम्मेदारी नहीं एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा बबलू और पार्षद कमल वाघेला ने अपने आवेदन में कहा है कि भागीरथपुरा जल प्रदूषण प्रकरण में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका या जिम्मेदारी नहीं है। इसलिए उनका नाम याचिका से हटाया जाए। इसी प्रकार तत्कालीन अपर कमिश्नर व आईएएस अधिकारी रोहित सिसोनिया को भी याचिका में पक्षकार बनाया गया है। दिसंबर में शुरू हुआ था मौतों का सिलसिला गौरतलब है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में दिसंबर 2025 के आखिरी हफ्चे में दूषित पानी की आपूर्ति के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। इस मामले में 36 लोगों की मौत होने हुई है। पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। जल प्रदाय विभाग के मांगा खर्चों का रिकॉर्ड भागीरथपुरा हादसे के बाद नगर निगम के जलप्रदाय विभाग में पिछले वर्षों में हुए करोड़ों रुपये के खर्च भी जांच के दायरे में आ गए हैं। राज्य सूचना आयोग ने नगर निगम के जलप्रदाय विभाग को वर्ष 2018 से 2022 तक विभिन्न बजट मदों में किए गए भुगतान और खर्चों का पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश पूर्व पार्षद दिलीप कौशल द्वारा मांगी गई जानकारी के संदर्भ में जारी किया गया है। आयोग ने निगम प्रशासन को 29 मई 2026 तक पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है।


