GLP-1 Drugs vs Bariatric Surgery: मोटापे से छुटकारा पाने के लिए अब दो तरीके सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। एक तरफ तो पुरानी और भरोसेमंद सर्जरी है, और दूसरी तरफ वो नई दवाइयां जो आजकल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। लोग अब सोचते हैं कि जब एक इंजेक्शन से काम चल सकता है, तो पेट पर कट क्यों लगवाना? लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि दोनों के अपने नफा-नुकसान हैं। आपको क्या चुनना चाहिए, यह इस पर निर्भर करता है कि आपको कितना वजन कम करना है और आप कितना खर्चा उठा सकते हैं।
सर्जरी या इंजेक्शन किसका असर रहता है ज्यादा?
जॉन हॉपकिन्स मेडिसिन (Johns Hopkins Medicine) के अनुसार, बेरिएट्रिक सर्जरी के बाद लोग अपने शरीर का 60% से 70% तक फालतू वजन कम कर सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि सर्जरी के बाद वजन कम ही रहता है और टाइप-2 मधुमेह जैसी बिमारियां भी अक्सर ठीक हो जाती हैं। जीएलपी-1 इंजेक्शन सबको एक जैसा फायदा नहीं पहुंचाते।
सबसे सफल मामलों में भी वजन सिर्फ 20% तक ही कम हो पाता है। इसके साथ सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दवा छोड़ते ही वजन दोबारा बढ़ना बहुत आम बात है।
कितना आएगा खर्च और क्या है बीमा की स्थिति?
बेरिएट्रिक सर्जरी का खर्च सर्जरी के प्रकार और आपकी बीमा (Insurance) योजना पर निर्भर करता है। कई बीमा कंपनियां कुछ शर्तों को पूरा करने पर इस सर्जरी का खर्च वहन करती हैं। चूंकि यह एक बार का ऑपरेशन है, इसलिए यह लंबे समय के लिए एक निवेश जैसा है। जीएलपी-1 इंजेक्शन का खर्च आमतौर पर बीमा में कवर नहीं होता।
ब्रांडेड दवाओं की कीमत हर महीने 1,000 डॉलर (करीब 83,000 रुपये) या उससे ज्यादा हो सकती है। जेनेरिक दवाएं थोड़ी सस्ती हो सकती हैं, लेकिन यह खर्च आपको हर महीने उठाना होगा।
कब किसको चुनना चाहिए?
सर्जरी – जिनका बीएमआई (BMI) 40 से ज्यादा है, या जिनका बीएमआई 35-40 के बीच है और उन्हें बीपी या शुगर जैसी बीमारी है। साथ ही, उन्होंने पहले वजन घटाने की कोशिश की हो पर सफल न हुए हों।
जीएलपी-1 दवाएं- जिनका बीएमआई 30 या उससे ज्यादा है, या जिन्हें मोटापे की वजह से कोई स्वास्थ्य समस्या है।
साइड इफेक्ट्स
सर्जरी- ऑपरेशन की वजह से शुरू में मतली या चीरे वाली जगह पर दर्द हो सकता है। मरीजों को पहले हफ्ते सिर्फ लिक्विड डाइट पर रहना पड़ता है।
जीएलपी-1 दवाएं- जीएलपी-1 लेने वाले लोगों को चक्कर आना, थकान, कब्ज और मतली जैसी शिकायतें हो सकती हैं। इसे लंबे समय तक सहन करना हर किसी के बस की बात नहीं होती।
निष्कर्ष: जॉन हॉपकिन्स मेडिसिन की रिपोर्ट में उपरोक्त बातें हैं। उस आधार पर आप चयन कर सकते हैं। या फिर डॉक्टर आपकी स्थिति को देखकर बेहतर सलाह दे सकता है।
हालंकि,
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


