HbA1c 5.8 क्या यह शुगर की शुरुआत है? समझें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

HbA1c 5.8 क्या यह शुगर की शुरुआत है? समझें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Prediabetes Symptoms : HbA1c टेस्ट पिछले 2-3 महीनों के औसत ब्लड शुगर को बताता है। विर्टा हेल्थ के अनुसार, 5.7% से 6.4% के बीच का स्कोर प्री-डायबिटीज माना जाता है। 5.8 का स्कोर एक चेतावनी है कि आपका शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। अगर अभी ध्यान नहीं दिया गया, तो यह आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज में बदल सकता है। चलिए जानते है इसके बारे में:

क्या 5.8 स्कोर खतरनाक है?

इसे खतरनाक कहने के बजाय सावधान करने वाला स्कोर कहना सही होगा। रिसर्च बताती है कि प्री-डायबिटीज वाले लोगों में दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है। लंबे समय तक शुगर लेवल थोड़ा भी बढ़ा रहे, तो यह किडनी और नसों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर सकता है।

journal of Gastroenterology and Hepatology की रिसर्च के अनुसार, HbA1c 5.8 होने पर NAFLD (लिवर से जुड़ी समस्या) का खतरा भी बढ़ सकता है।

प्री-डायबिटीज के कारण क्या-क्या होते है?

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस।
  • वजन का ज्यादा होना।
  • गलत खान-पान।
  • शारीरिक श्रम की कमी होना।

प्री-डायबिटीज की पहचान कैसे होती है?

National Library of Medicine के अनुसार, जब आपका HbA1c लेवल 5.7% से 6.4% के बीच आता है, तो इसे प्री-डायबिटीज कहा जाता है। प्री-डायबिटीज होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको अब डायबिटीज होगी ही। इसका मतलब है कि आपके खून में शुगर का लेवल नॉर्मल से तो ज्यादा हो गया है, लेकिन अभी इतना ज्यादा नहीं हुआ है कि उसे टाइप-2 डायबिटीज की कैटेगरी में डाल दिया जाए। प्री-डायबिटीज की स्थिति में या तो शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता या फिर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता।

प्री-डायबिटीज के लक्षण क्या है?

National Libray of Medicine में इसके लक्षणों को भी विस्तार से बताया है जिसे आप निन्मलिखित तरीके से समझ सकते है-

  • ज्यादा प्यास और बार-बार यूरिन।
  • बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
  • धुंधला दिखना।
  • गर्दन के पास कालापन आना।

बचने के लिए क्या करें?

  • हफ्ते में कम से कम 150 मिनट तेज चलें या व्यायाम करें।
  • फाइबर युक्त आहार शामिल करें।
  • वजन कंट्रोल रखें।
  • स्मोकिंग से दूर रहें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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