Familial Hypercholesterolemia: आजकल हम आए दिन सुनते हैं कि कोई जिम में वर्कआउट कर रहा था और उसे अचानक हार्ट अटैक आ गया। हम हैरान हो जाते हैं क्योंकि वह इंसान तो बिल्कुल फिट दिख रहा था। असल में, फिट दिखने के बावजूद शरीर के अंदर जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल (फेमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया) का खतरा हो सकता है। इसमें हमारा शरीर खून से खराब कोलेस्ट्रॉल को साफ नहीं कर पाता, जिससे नसें धीरे-धीरे ब्लॉक होने लगती हैं। यह इतना चुपचाप होता है कि जब तक पता चलता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है
क्या होता है जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल?
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, अगर माता-पिता में से किसी एक को भी यह समस्या है, तो बच्चों में इसके आने के 50% चांस होते हैं। ये एक जेनेटिक विकार माना जाता है इसके कारण हार्ट अटैक आने का खतरा ज्यादा होता है। हमारे शरीर में एक खास सिस्टम होता है जो फालतू कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालता है, लेकिन इस बीमारी में वह सिस्टम ही काम करना बंद कर देता है। कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने वाली दवाओं से इसकी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
- आंखों के पास पीली गांठें दिखने लगें।
- आंखों के काले हिस्से के चारों तरफ सफेद निशान बनना।
- हाथ-पैरों के जोड़ों पर उभार आना।
- एड़ी के पीछे सूजन आना।
जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल इतना खतरनाक क्यों?
आम लोगों का कोलेस्ट्रॉल उम्र के साथ बढ़ता है, पर इन मरीजों का कोलेस्ट्रॉल पैदा होते ही हाई होता है। इस बीमारी की वजह से 30-40 साल की उम्र में ही हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नसें अंदर ही अंदर ब्लॉक होती रहती हैं और इंसान बाहर से बिल्कुल हेल्दी दिखता रहता है।
बचाव और इलाज के लिए क्या करें?
अगर आपकी फैमिली में किसी को कम उम्र में हार्ट की दिक्कत हुई है, तो सिर्फ वजन देखकर खुश न हों, एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर करवाएं। इसमें सिर्फ परहेज से काम नहीं चलता, अक्सर दवाइयों (Statins) की जरूरत पड़ती है जो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखें। सिगरेट-शराब से दूर रहें और रोजाना एक्सरसाइज करें ताकि खतरा कम रहे।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


