Prateek Yadav Health Issue : क्या होता है पल्मोनरी एम्बोलिज्म; जिसकी वजह से भर्ती हुए थे प्रतीक यादव, डॉक्टर से जानें

Prateek Yadav Health Issue : क्या होता है पल्मोनरी एम्बोलिज्म; जिसकी वजह से भर्ती हुए थे प्रतीक यादव, डॉक्टर से जानें

Prateek Yadav Death News: मुलायम सिंह यादव के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का निधन हो गया है। वे पल्मोनरी एम्बोलिज्म (Pulmonary Embolism) नाम की गंभीर स्थिति से जूझ रहे थे। जैसा कि डॉ. रुचिता शर्मा (एक प्राइवेट अस्पताल लखनऊ की एसोसिएट डायरेक्टर) ने ANI को बताया है। आइए जानते हैं कि ये क्या होता है? इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय क्या होते हैं?

क्या कहना है डॉक्टर का?

डॉ. रुचिता शर्मा के अनुसार, प्रतीक यादव पिछले काफी समय से हाई ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन का इलाज करा रहे थे। कुछ दिन पहले उन्हें सांस लेने में तकलीफ के कारण अस्पताल लाया गया, जहां जांच में पल्मोनरी एम्बोलिज्म की पुष्टि हुई। डॉक्टर ने बताया कि यह एक ऐसी क्रिटिकल स्थिति है जिसमें फेफड़ों की धमनियों में खून का थक्का (Blood Clot) जम जाता है, जिससे दिल पर बुरा असर पड़ता है। वे पहले से ही ब्लड थिनर (खून पतला करने वाली दवाएं) ले रहे थे, लेकिन इस बीमारी की प्रकृति इतनी गंभीर होती है कि इसमें जोखिम हमेशा बना रहता है।

पल्मोनरी एम्बोलिज्म क्या होता है?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, पल्मोनरी एम्बोलिज्म फेफड़ों का दौरा जैसा है। हमारे शरीर की नसों में कभी-कभी खून जम जाता है (खासकर पैरों की नसों में जिसे DVT कहते हैं)। जब यह जमा हुआ खून का थक्का वहां से टूटकर खून के बहाव के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है और वहां की किसी नस को ब्लॉक कर देता है, तो इसे ही पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहते हैं।

पल्मोनरी एम्बोलिज्म के मुख्य लक्षण क्या हैं?

  • अचानक सांस फूलना।
  • सीने में दर्द होना।
  • सूखी खांसी के साथ खून आना।
  • दिल की धड़कन तेज होना।
  • पैर में सूजन आना।

(सोर्स- मायो क्लिनिक)

पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण

  • लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना।
  • किसी बड़ी सर्जरी के बाद बेड रेस्ट पर रहने से खून जमने का खतरा बढ़ जाता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, या कैंसर जैसी बीमारियां।
  • धूम्रपान करना।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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