Islamic NATO: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कतर और तुर्किये के साथ क्षेत्रीय रक्षा और आर्थिक व्यवस्था का विस्तार करने की संभावना का संकेत दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यह ढांचा एक व्यापक सुरक्षा समझौते के रूप में विकसित हो सकता है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना है। पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट ‘हम न्यूज’ के साथ एक इंटरव्यू में आसिफ ने कहा कि इस व्यवस्था पर चर्चा कई चरणों में है और भविष्य में इसमें इन देशों को भी शामिल किया जा सकता है।
आसिफ ने कहा, ‘अगर सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद इस समझौते में कतर और तुर्किये भी शामिल हो जाते हैं, तो यह स्वागत योग्य होगा कि देशों के बीच ऐसी आर्थिक और रक्षा व्यवस्था हमारे इस क्षेत्र में आए, ताकि क्षेत्र के बाहर पर हमारी निर्भरता कम से कम हो सके।’
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रस्तावित व्यवस्था किसी भी देश के खिलाफ निर्देशित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ाना और बाहरी निर्भरता को कम करना है। उन्होंने कहा कि दुनिया में निर्भरता तो रहेगी ही; एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय है जिसमें सभी देश आर्थिक और अन्य तरीकों से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लेकिन अपने क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए, मेरा मानना है कि यह समझौता किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि हमारे क्षेत्र के भीतर शांति की रक्षा के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।
सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान ने किया है समझौता
पाकिस्तान ने पिछले साल ही सऊदी अरब के साथ एक रणनीतिक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें यह वादा किया गया था कि किसी भी देश के खिलाफ होने वाली किसी भी आक्रामकता को दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस समझौते के तहत सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ कतर और तुर्किये के भी शामिल होने के संबंध में उनकी हालिया टिप्पणियां एक ‘इस्लामिक नाटो’ के गठन का संकेत देती हैं। यह एक ऐसा विचार है जिसे हाल के समय में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा संकट के बीच सामने लाया गया है।
सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौते पर भारत की नजर
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रणनीतिक रक्षा समझौते के बाद भारत ने भी अपनी प्रतिक्रिया जारी की थी। भारत ने कहा था कि वह इस समझौते के भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा. क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का बारीकी से अध्ययन करेगा। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया था कि इस घटनाक्रम के मद्देनजर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि बनी रहेगी।


