Iran Nuclear Threat: अमेरिका व इजरायल ने दुबारा हमला किया तो 90% परमाणु बम से जवाब देगा ईरान

Iran Nuclear Threat: अमेरिका व इजरायल ने दुबारा हमला किया तो 90% परमाणु बम से जवाब देगा ईरान

Middle East Tension: पश्चिम एशिया में जारी भारी उथल-पुथल के बीच ईरान ने एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा हलकों में हड़कंप मचा दिया है। ईरानी संसद के नेशनल सिक्योरिटी कमीशन (राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग) के प्रवक्ता ने बेहद सख्त लहजे में ऐलान किया है कि अगर अमेरिका और इजरायल ने ईरान की संप्रभुता पर दोबारा कोई सैन्य हमला किया, तो तेहरान इसका ’90 प्रतिशत यूरेनियम एनरिचमेंट’ के साथ जवाब देगा। कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह महज एक बयान नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर परमाणु बम बनाने की खुली धमकी है।

90% यूरेनियम संवर्धन का असली मतलब क्या है ?

आसान भाषा में समझें तो यूरेनियम संवर्धन की मात्रा यह तय करती है कि उसका इस्तेमाल किस काम के लिए होगा। शांतिपूर्ण कार्यों, जैसे बिजली बनाने वाले न्यूक्लियर पावर प्लांट में सिर्फ 3 से 5 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम की जरूरत होती है। वहीं, मेडिकल रिसर्च के लिए इसे 20 प्रतिशत तक प्यूरिफाई किया जाता है। लेकिन जब किसी देश के पास 90 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम आ जाता है, तो उसे ‘वेपन ग्रेड’ या हथियार बनाने के योग्य माना जाता है। ईरान ने साफ कर दिया है कि हमले की स्थिति में वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की परवाह किए बिना सीधे न्यूक्लियर हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ जाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के लिए बड़ी चुनौती

इजरायल और अमेरिका की विदेश नीति की सबसे बड़ी रेड लाइन यही रही है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम हासिल करने से रोका जाए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ही ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर बेहद आक्रामक रुख रखते आए हैं। इजरायल तो कई बार ईरान के परमाणु ठिकानों पर सीधे हमले की रणनीति पर काम कर चुका है। लेकिन ईरान की इस ताजा धमकी ने दोनों देशों के सामने एक बहुत बड़ी सामरिक उलझन पैदा कर दी है। अगर वे ईरान को कमजोर करने के लिए हमला करते हैं, तो ईरान सीधे परमाणु शक्ति बनने की ओर मुड़ सकता है।

दुनिया के लिए मंडराता खतरा

यह अल्टीमेटम ऐसे समय में आया है जब पूरा क्षेत्र पहले से ही बारूद के ढेर पर बैठा है। अगर ईरान 90 प्रतिशत यूरेनियम संवर्धन की ओर बढ़ता है, तो मध्य पूर्व में हथियारों की एक अंधी दौड़ शुरू हो जाएगी। सऊदी अरब जैसे देश भी अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु विकल्प तलाशने लगेंगे। इससे न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक शांति दांव पर लग जाएगी। अब देखना यह है कि ईरान की इस ‘न्यूक्लियर ब्लैकमेल’ रणनीति का अमेरिका और इजरायल किस तरह से जवाब देते हैं।

यूरोपीय संघ ने बयान को बेहद भड़काऊ और खतरनाक करार दिया

ईरान के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों और संयुक्त राष्ट्र (UN) में गहरी चिंता जताई जा रही है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ईरान अब अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम को ही सबसे बड़े ‘डिटरेंस’ (निवारक) के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। यूरोपीय संघ के नेताओं ने भी इस बयान को बेहद भड़काऊ और खतरनाक करार दिया है।

इस घटनाक्रम का अगला बड़ा मोड़ होगा

इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का रुख सबसे अहम होगा। अब दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि IAEA ईरान की परमाणु साइट्स की निगरानी को लेकर क्या रिपोर्ट पेश करता है। साथ ही, व्हाइट हाउस और इजरायल की तरफ से इस बयान पर क्या आधिकारिक पलटवार आता है, यह इस घटनाक्रम का अगला बड़ा मोड़ होगा।

अगर तनाव युद्ध में बदलता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होगी

बहरहाल,पश्चिम एशिया में परमाणु तनाव बढ़ने की आहट से ही ग्लोबल शेयर बाजार और क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में बड़ा भूचाल आ सकता है। अगर तनाव युद्ध में बदलता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होगी, जिससे भारत समेत दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आएगा और महंगाई का नया संकट खड़ा हो जाएगा।

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