हांसी में मनाया सोमनाथ स्वाभिमान पर्व:सांसद सुभाष बराला हुए शामिल, बोले-भारत की संस्कृति को मिटाने की कोशिशें हर बार नाकाम

हांसी में मनाया सोमनाथ स्वाभिमान पर्व:सांसद सुभाष बराला हुए शामिल, बोले-भारत की संस्कृति को मिटाने की कोशिशें हर बार नाकाम

राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने हांसी में स्थित बजरंग आश्रम में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर हांसी के विधायक विनोद भयाना, भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक सैनी, अतिरिक्त उपायुक्त लक्षित शरीन और एसडीएम राजेश खोथ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और भाजपा कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद बराला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत के इतिहास, संस्कृति और गौरव से जुड़े विशेष दिनों को जनभागीदारी के माध्यम से यादगार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत को कभी ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था, लेकिन विदेशी आक्रमणकारियों ने समय-समय पर देश की संस्कृति और मंदिरों को लूटा और तोड़ा। सोमनाथ मंदिर और राम मंदिर को केवल धार्मिक स्थल नहीं उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर और राम मंदिर को केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, स्वाभिमान और आस्था का प्रतीक बताया। बराला ने जोर दिया कि मंदिरों को बार-बार तोड़ने के प्रयासों के बावजूद, सनातन संस्कृति हर बार और अधिक मजबूती से खड़ी हुई है। मीडिया से बातचीत के दौरान, सुभाष बराला ने सफाई कर्मचारियों और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की चल रही हड़ताल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मंत्री विपुल गोयल और मुख्यमंत्री नायब सैनी इस मामले पर लगातार नजर रख रहे हैं और जल्द ही इसका समाधान निकाल लिया जाएगा। वह किसी धर्म विशेष के विरोध में नहीं हैं- बराला कुलदीप बिश्नोई के भाजपा से कथित नाराजगी के सवाल पर बराला ने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताया। उन्होंने कहा कि भजन लाल उनके लिए पूजनीय नेता रहे हैं और सभी मतभेद आपसी बातचीत से सुलझा लिए जाएंगे। धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि इस विषय पर आम जनता को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने इसे समाज से जुड़ा एक संवेदनशील विषय बताया, जिस पर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर विचार-विमर्श करना चाहिए। बराला ने स्पष्ट किया कि वह किसी धर्म विशेष के विरोध में नहीं हैं और सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करते हैं।

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