बदल रहा बस्तर! 25 साल बाद लौटी खाकी की पहचान, पुलिस जवान अब गर्व से पहन रहे यूनिफॉर्म

बदल रहा बस्तर! 25 साल बाद लौटी खाकी की पहचान, पुलिस जवान अब गर्व से पहन रहे यूनिफॉर्म

Naxal Free Bastar: कभी नक्सलियों के डर से सादे कपड़ों में ड्यूटी करने को मजबूर रहने वाले पुलिसकर्मी अब बचेली में खुलेआम खाकी वर्दी पहनकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। दशकों बाद बदले इस दृश्य ने न सिर्फ पुलिस महकमे में नया आत्मविश्वास भरा है, बल्कि आम लोगों के मन में भी सुरक्षा और भरोसे की भावना मजबूत हुई है।

जहां कभी पुलिसकर्मियों के लिए यूनिफॉर्म पहनना खतरे से खाली नहीं माना जाता था, वहीं अब नक्सल प्रभाव कमजोर पड़ने के बाद बचेली थाना परिसर में पुलिस जवान गर्व के साथ खाकी वर्दी में नजर आ रहे हैं। इलाके में बदलते हालात को लोग शांति और सामान्य जीवन की वापसी के रूप में देख रहे हैं।

Naxal Free Bastar: वर्षों तक सादे कपड़ों में करनी पड़ती थी ड्यूटी

पुलिसकर्मियों के अनुसार पिछले 25 से 30 वर्षों तक बचेली और आसपास के नक्सल प्रभावित इलाकों में खुलकर खाकी वर्दी पहनना आसान नहीं था। नक्सलियों द्वारा निशाना बनाए जाने का लगातार खतरा बना रहता था, इसलिए जवानों को अक्सर सादे कपड़ों में ही ड्यूटी करनी पड़ती थी। ऑपरेशन के दौरान जवान डांगरी या विशेष पोशाक का इस्तेमाल करते थे, लेकिन थाना परिसर और आम दिनचर्या में भी यूनिफॉर्म से बचा जाता था। सुरक्षा कारणों से यह एक तरह की मजबूरी बन चुकी थी।

अब गर्व से पहन रहे खाकी वर्दी

बदलते हालात के बीच अब बचेली थाना स्टाफ पूरी तरह वर्दीधारी नजर आने लगा है। पुलिस अधीक्षक गौरव राय के निर्देश के बाद थाने में नियमित रूप से खाकी वर्दी पहनकर ड्यूटी की जा रही है। अब पुलिसकर्मी थाने में हाजिरी लगाते समय, फाइलों पर काम करते हुए और गश्त के दौरान भी यूनिफॉर्म में दिखाई दे रहे हैं। पहले जहां खाकी वर्दी केवल वीआईपी दौरे या राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नजर आती थी, वहीं अब यह पुलिस व्यवस्था का सामान्य हिस्सा बनती जा रही है।

स्थानीय लोगों में बढ़ा भरोसा

बचेली में पुलिस की बदली तस्वीर देखकर स्थानीय नागरिकों में भी खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि पहले पुलिसकर्मियों की पहचान करना मुश्किल होता था, लेकिन अब खाकी वर्दी में उन्हें देखकर सुरक्षा का एहसास होता है। ग्रामीणों और व्यापारियों का मानना है कि इससे यह संदेश जा रहा है कि इलाके में शासन-प्रशासन की पकड़ मजबूत हुई है और भय का माहौल धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।

नक्सलवाद कमजोर पड़ने का असर

पुलिस सूत्रों के मुताबिक नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय से सुरक्षा कारणों के चलते यूनिफॉर्म न पहनने की परंपरा चली आ रही थी। लेकिन अब लगातार नक्सली समर्पण, शिविरों के खत्म होने और सुरक्षा बलों की सक्रिय कार्रवाई के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं। इलाके में सामान्य जनजीवन बहाल होने लगा है और इसका असर पुलिस व्यवस्था में भी साफ दिखाई देने लगा है।

पुलिस अधीक्षक का स्पष्ट निर्देश

पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने जिले के सभी थानों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पुलिस स्टाफ अब नियमित रूप से खाकी वर्दी में ही ड्यूटी करेगा। उनका कहना है कि पुलिस की पहचान उसकी वर्दी से होती है और लंबे समय बाद क्षेत्र में सामान्य स्थिति लौटने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों का खुले तौर पर यूनिफॉर्म पहनना न केवल विभाग के आत्मविश्वास को दर्शाता है, बल्कि आम लोगों के मन में भी सुरक्षा और भरोसे की भावना को मजबूत करता है।

पुलिस अधीक्षक का मानना है कि जब पुलिसकर्मी पूरे आत्मविश्वास के साथ खाकी वर्दी में नजर आते हैं, तो इससे यह संदेश जाता है कि प्रशासन की पकड़ मजबूत हुई है और क्षेत्र में कानून व्यवस्था पहले से बेहतर स्थिति में है। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में वर्षों तक सुरक्षा कारणों से पुलिसकर्मियों को सादे कपड़ों में काम करना पड़ता था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।

लगातार चल रहे अभियान, नक्सलियों के समर्पण और सुरक्षा बलों की सक्रिय मौजूदगी के कारण क्षेत्र में नक्सल प्रभाव कमजोर पड़ा है। ऐसे में खाकी वर्दी की वापसी केवल एक औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि इलाके में लौटती शांति और सामान्य जनजीवन का बड़ा प्रतीक बनकर सामने आई है। पुलिस प्रशासन का मानना है कि इससे लोगों के बीच सकारात्मक माहौल बनेगा और शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

बदलते दौर की नई तस्वीर

बचेली में खाकी वर्दी की वापसी केवल ड्रेस बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह इलाके में लौटते सामान्य माहौल, बढ़ती सुरक्षा और प्रशासनिक विश्वास का प्रतीक बन चुकी है। लंबे समय बाद पुलिस जवानों को खुलेआम यूनिफॉर्म में देखकर लोगों को भी यह भरोसा होने लगा है कि अब क्षेत्र धीरे-धीरे भय के दौर से बाहर निकल रहा है।

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